Songs of Shailendra::
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1954

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१९५४ – नौकरी – छोटा-सा घर होगा | 1954 – Naukri – chhota sa ghar hoga

छोटा-सा घर होगा बादलों की छाँव में आशा दीवानी मन में बँसुरी बजाए हम ही हम चमकेंगे तारों के उस गाँव में आँखों की रौशनी हरदम ये समझाए चाँदी की कुर्सी पे बैठे मेरी छोटी बहना सोने के सिंघासन पे बैठे मेरी प्यारी माँ मेरा क्या मैं पड़ा रहूँगा अम्मीजी के पाँव में आ आ … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – बहक चले मेरे नैनवा | 1954 – Chandni Chowk – behak chale more nainwa

बहक चले मेरे नैनवा हाय, न जाने कैसी चली हवा क्यूँ न लगी कल रात को पलक, मुझे ये क्या हो गया हाय, मुझे ये क्या हो गया आँचल से मेरा हाथ हटे ना, नैन रहें मेरे झुके-झुके खड़ी रहूँ दर्पन के आगे, उलझी लट ना सुलझ सके मुझ-ही को मेरे हाल पे शर्माना कोई … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – जितने भी हैं ग़म ग़लत कर डाल | 1954 – Chandni Chowk – jitne bhi hain gham ghalat kar daal

ऐ ज़म ऐ ज़म ऐ ज़म ज़ी जितने-भी ग़म हैं, ग़लत कर डाल कि दुनिया है दो दिन की सारे जहाँ की बहारें, प्यार से तेरा ही नाम पुकारें झूमके पी ले मय उल्फ़त के जाम की ऐ ज़म ऐ ज़म … चाँद, हवा, ये सितारे, देखो हमारे हैं आज हमारे प्यार में जी ले, … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – दिल की शिकायत नज़र के शिकवे | 1954 – Chandni Chowk – dil ki shikayat nazar ke shikwe

दिल की शिकायत नज़र के शिकवे, एक ज़ुबाँ और लाख बयाँ छुपा सकूँ ना दिखा सकूँ, मेरे दिल के दर्द भी हुए जवाँ चाँद हँसा, तारे चमके, और मस्त हवा जब इठलाई छुपती फिरी न जाने क्यूँ मैं, जाने क्यूँ मैं शरमाई तेरे सिवा है कौन जो समझे क्या गुज़री मुझपे यहाँ छुपा सकूँ ना … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – जादू बुरा बंगाल का | 1954 – Chandni Chowk – jadoo bura bangal ka

बदल चली है जो उनकी नज़र तो क्या कीजे वफ़ा का थामके दामन, ये इल्तजा कीजे जादू बुरा बंगाल का, पूरब ना जइहो बालमा ना जइहो मेरे बालमा, पूरब ना जइहो बालमा जीतेजी दिल पे जुदाई का तीर सहना पड़ा जलाके आशियाँ अपना, कफ़स में रहना पड़ा हाय, लिखा है ये कौनसे पत्थर ने ये … Continue reading →

१९५४ – भाई साहब – रात फागुन की चाँद पूनम का | 1954 – Bhai Saheb – raat phagun ki chand poonam ka

रात फागुन की, चाँद पूनम का, फैली शीतल आग बड़ी मुश्किल से सोई बिरहन, पिया की याद में जाग आधी रात खुल गई पलक, सखी, कौन आया चौंक-चमक कामिनी उठ बैठी, कौन आया ये सच है या कोई सपना, मोहे नींद से आन जगाया मुख से न बोले, अँखियन मुस्काए साँवरिया मन भाया रे, कौन … Continue reading →

१९५४ – बूट पालिश – चली कौनसे देश गुजरिया | 1954 – Boot Polish – chali kaun se deh gujariya

चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके जाऊँ पिया के देश, ओ रसिया मैं सज-धजके चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके छलके मात-पिता की अँखियाँ रोवे तेरे बचपन की सखियाँ भैया करे पुकार भैया करे पुकार, न जा घर-आँगन तजके जाऊँ पिया के देश, ओ रसिया मैं सज-धजके चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके दूर देश … Continue reading →

१९५४ – बूट पालिश – नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी | 1954 – Boot Polish – nanhe munne bachche teri

नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है मुट्ठी में है तक़्दीर हमारी हमने क़िस्मत को बस में किया है भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है आँखों में झूमे उम्मीदों की दीवाली आनेवाली दुनिया का सपना सजा है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में … Continue reading →

१९५४ – बूट पालिश – ठहर ज़रा ओ जानेवाले | 1954 – Boot Polish – thaher zara o janewale

ठहर ज़रा ओ जानेवाले ठहर ज़रा ओ जानेवाले, बाबू मिस्टर गोरे काले कबसे बैठे आस लगाए, हम मतवाले पालिशवाले ये काली पालिश एक आना ये ब्राउन पालिश एक आना जूते की मालिश एक आना हर माल मिलेगा है एक आना ना है ना है ना पगड़ी है ना चोरी है छोटी-सी दूकान लगाए, हम मतवाले … Continue reading →

१९५४ – बूट पालिश – तुम्हारे हैं तुमसे दया | 1954 – Boot Polish – tumhare hain tum se daya mangte hain

तुम्हारे हैं तुमसे दया माँगते हैं तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं यतीमों की दुनिया में हरदम अँधेरा इधर भूलकर भी न आया सवेरा किसी शाम को एक पलभर जले जो हम आशा का ऐसा दिया माँगते हैं तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं थे हम जिनकी आँखों के चंचल सितारे हमें छोड़ वो इस … Continue reading →