Songs of Shailendra::
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Mukesh

This category contains 79 posts

१९६५ – छोटी छोटी बातें – ज़िंदगी ख़्वाब है था हमें भी पता | 1965 – Chhoti Chhoti Baten – zindagi khwab hai tha humein bhi pata

ज़िंदगी ख़्वाब है था हमें भी पता पर हमें ज़िंदगी से बहुत प्यार था सुख भी थे, दुख भी थे दिल को घेरे हुए चाहे जैसा था रंगीन संसार था आ गई थी शिकायत लबों तक मगर किससे कहते तो क्या, कहना बेकार था चल पड़े दर्द पीकर तो चलते रहे हारकर बैठ जाने से … Continue reading

१९६७ – गुनाहों का देवता – चाहा था बनूँ प्यार की राहों का देवता | 1967 – Gunahon Ka Devta – chaha tha banoon pyar ki rahon ka devta

चाहा था बनूँ प्यार की राहों का देवता मुझको बना दिया है गुनाहों का देवता ये ज़िंदगी एक ख़्वाब है, जीना भी है नशा दो घूँट मैंने पी लिए, तो क्या बुरा किया रहने दो जाम सामने, सबकुछ यही तो है हर ग़मज़दा के आँसुओं-आहों का देवता मुझको बना दिया है गुनाहों का देवता क़िस्मत … Continue reading

१९६२ – रंगोली – हम-तुम ये खोई-खोई राहें | 1962 – Rungoli – hum tum ye khoyi khoyi raahein

हम-तुम, ये खोई-खोई राहें, चंचल इशारों से बुलाएँ आजा, तू आजा कहीं जाएँ, मौसम है प्यार का ले चल, बहारों ने पुकारा है, चंचल इशारों ने पुकारा है झूमते नज़ारों ने पुकारा है, मौसम है प्यार का हम-तुम, ये खोई-खोई राहें … दिल की हर एक धड़कन नग़मा बनती जाए मेरा सपना मेरी बाँहों में … Continue reading

१९५७ – कठपुतली – दुनिया में चाँद-सूरज | 1957 – Kathputli – duniya mein chand sooraj

मिनी मिनी ची ची, मिनी मिनी ची ची दुनिया में चाँद-सूरज हैं कितने हसीँ, कितने हसीँ उतना ही, सुन मेरे भैया, दिल को लुभाए रुपैया रुपयों का चश्मा चढ़ाओ, ये दुनिया दिखेगी रंगीली सारे नशे इसके नौकर, ये है चीज़ ऐसी नशीली ये चम-चम इसीकी, छम-छम इसीकी, गाए इसीको गवैया मिनी मिनी ची ची, मिनी … Continue reading

१९६३ – मेरी सूरत तेरी आँखें – ये किसने गीत छेड़ा | 1963 – Meri Surat Teri Ankhen – ye kisne geet chheda

ये किसने गीत छेड़ा, दिल मेरा नाचे थिरक-थिरक किसने गीत छेड़ा ये किसकी ज़ुल्फ़ बिखरी, जग सारा गया महक-महक किसकी ज़ुल्फ़ बिखरी चोरी-चोरी, हौले-हौले, ठण्डी-ठण्डी हवा आए कलियों के मुख चूमे, बगिया को दुलराए डाली-डाली जाए लचक-लचक किसकी ज़ुल्फ़ बिखरी ये किसने गीत छेड़ा, दिल मेरा नाचे थिरक-थिरक किसने गीत छेड़ा तुमने-ही किया टोना, तुमने-ही … Continue reading

१९५९ – कन्हैया – मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए | 1959 – Kanhaiya – mujhe tumse kuchh bhi na chahiye

मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए, मुझे मेरे हाल पे छोड़ दो मेरा दिल अगर कोई दिल नहीं, उसे मेरे सामने तोड़ दो मुझे तुमसे कुछ भी ना चाहिए मैं ये भूल जाऊँगा, ज़िंदगी कभी मुस्कुराई थी प्यार में मैं ये भूल जाऊँगा, मेरा दिल कभी खिल उठा था बहार में जिन्हें इस जहाँ ने … Continue reading

१९५९ – कन्हैया – याद आई आधी रात को | 1959 – Kanhaiya – yaad aayi aadhi raat ko

याद आई आधी रात को, कल रात की तौबा दिल पूछता है झूमके, किस बात की तौबा याद आई आधी रात को मरने भी न देंगे मुझे, दुश्मन मेरी जाँ के हर बात पे कहते हैं कि इस बात की तौबा याद आई आधी रात को … साक़ी मुझे बतला तो दे, मुँह फेरके मत … Continue reading

१९५९ – कन्हैया – रुक जा ओ जानेवाली रुक जा | 1959 – Kanhaiya – ruk ja o janewali ruk ja

रुक जा, रुक जा ओ जानेवाली रुक जा मैं तो राही तेरी मंज़िल का नज़रों में तेरी मैं बुरा सही आदमी बुरा नहीं मैं दिल का देखा ही नहीं तुझको, सूरत भी न पहचानी तू आके चली छम-से, ज्यूँ धूप के दिन पानी रुक जा, रुक जा ओ जानेवाली … मुद्दत से मेरे दिल के … Continue reading

१९५९ – कन्हैया – नी बलिये, रुत है बहार की | 1959 – Kanhaiya – ni baliye rut hai bahar ki

नी बलिये, रुत है बहार की सुन चन वे, रुत है बहार की देखो आए वो, लेके डोली प्यार की कुछ मत पूछो कैसे बीतीं घड़ियाँ इंतज़ार की नी बलिये, रुत है बहार की सुन चन वे, रुत है बहार की आख़िर सुन ली मनमोहन ने, मेरे मन की बोली अब जाकर हमको पहचानी उनकी … Continue reading

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – हम भी हैं तुम भी हो | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – hum bhi hain tum bhi ho

है आग हमारे सीने में, हम आग से खेलते आते हैं टकराते हैं जो इस ताक़त से, वो मिट्टी में मिल जाते हैं तुमसे तो पतंगा अच्छा है, जो हँसते हुए जल जाता है वो प्यार में मिट तो जाता है, पर नाम अमर कर जाता है हम भी हैं, तुम भी हो, दोनों हैं … Continue reading