Songs of Shailendra::
archives

1954

This tag is associated with 28 posts

१९५४ – भाई साहब – घेरता है गर अँधेरा | 1954 – Bhai Saheb – gherta hai gar andhera

घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर दो घड़ी में मुस्कराएगी सहर, तू ग़म न कर घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर ढल गया एक और दिन, अच्छा हुआ समझो ज़िंदगी जितनी कटी ग़म कम हुआ समझो शुक्र कर कुछ कम हुआ ज़िंदगानी का सफ़र घेरता है गर … Continue reading →

१९५४ – भाई साहब – मंज़िल तो है बड़ी दूर | 1954 – Bhai Saheb – manzil to hai badi door

ऊँची-नीची ऊँची-नीची डगर जीवन की चलना सँभलके प्यारे, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर मंज़िल तो है बड़ी दूर, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर सूने सफ़र में लाखों चोर मिलेंगे तोहे, करनी करेंगे ज़रूर धर्म-कर्म की झोली कहाँ पे गँवाई तूने, पूछेंगे तेरे हुज़ूर संभलके चलना, मंज़िल तो है बड़ी दूर ऊँची-नीची … Continue reading →

१९५४ – बादशाह – रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे | 1954 – Badshah – rulakar chal diye ek din hansi bankar jo aaye the

रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे चमन रो-रोके कहता है, कभी गुल मुस्कुराए थे रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे अगर दिल के ज़ुबाँ होती, ये ग़म कुछ कम तो हो जाता उधर वो चुप, इधर सीने में हम तूफ़ाँ छुपाए थे ये अच्छा था न हम … Continue reading →

१९५४ – बादशाह – गुल मुस्कुरा उठा बुलबुल ये गा उठा | 1954 – Badshah – gul muskura utha bulbul ye gaa utha

गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ गई बहार दुल्हन के जैसी नई ज़िंदगी का आज ये पहला दिन है ख़ुशीका मौसम ये प्यार का, साज़-ओ-सिंगार का बाग़ों में आ गई बहार गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ … Continue reading →

१९५४ – अमानत – जबसे मिलीं तोसे अँखियाँ | 1954 – Amaanat – jab se milin tose ankhiyan

ओ जबसे मिलीं तोसे अँखियाँ, जियरा डोले रे डोले हो डोले हो मीठे-मीठे प्यार के ये हिंचकोले, जिया डोले रे डोले हो डोले ओ जबसे मिलीं तोसे अँखियाँ डोले हे डोले ये दिल की दुनिया, मैं नहीं अपने बस में वो मन में छुपा एक चोर है जो, मेरे जी की बतियाँ खोले ओ जबसे … Continue reading →

१९५४ – अमानत – मेरी वफ़ाएँ तुम्हारी जफ़ाएँ | 1954 – Amaanat – meri vafayein tumhari jafayein

मेरी वफ़ाएँ, तुम्हारी जफ़ाएँ आँसू लिखेंगे फ़साना मेरे प्यार का हाय रे हाय रे, जान क्यूँ ना जाए रे क्या रखा है जीने में, जलते आँसू पीने में हाय रे हाय रे, जान क्यूँ ना जाए रे मेरी वफ़ाएँ हमें क्या ख़बर थी, बदल जाओगे तुम किसी और के होके तड़पाओगे तुम मेरा तड़पना, तेरा … Continue reading →

१९५४ – अमानत – बाँकी अदाएँ देखना जी देखना | 1954 – Amaanat – baanki adayein dekhna ji dekhna

बाँकी अदाएँ, देखना जी देखना दिल ना चुराएँ, देखना जी कहने को भोली नज़र है मीठा-मीठा ये ज़हर है धोखा ना खाना, दिल ना गँवाना देखो जी रहना बचके, बचके, बचके बाँकी अदाएँ … रूप को धूप दिखाने से आता है चोर बुलाने से दिल का ख़ज़ाना यूँ ना लुटाना देखो जी रहना बचके, बचके, … Continue reading →

१९५४ – भाई साहब – नज़र ने कह दिया अफ़्साना मेरे प्यार का | 1954 – Bhai Saheb – nazar ne kah diya afsana mere pyar ka

Film Bhai Saheb Music Director Ninu Mazumdar Year 1954 Singer(s) C H Atma Audio Video On Screen नज़र ने कह दिया नज़र ने कह दिया अफ़्साना मेरे प्यार का हमेशा आँख में दिल रहता है दिलदार का खुले तो राज़-ए-इश्क़ यूँ खुले किसी भी ग़ैर को ख़बर ना मिले समझनेवाला समझ ले ये भी अंदाज़ … Continue reading →