Songs of Shailendra::
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Vyjayantimala

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१९६४ – संगम – ओ मेरे सनम | 1964 – Sangam – o mere sanam

ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम दो जिस्म मगर एक जान हैं हम, एक दिल के दो अरमान हैं हम ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम तन सौंप दिया, मन सौंप दिया, कुछ और तो मेरे पास नहीं जो तुमसे है मेरे हमदम, भगवान से भी वो आस नहीं जिस दिन से हुए एक दूजे … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए | 1956 – New Delhi – milte hi nazar aap mere dil mein aa gaye

मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए अफ़्सोस है कि आप भी मुश्किल में आ गए मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए दिल के कहने पे बढ़ते गए ये क़दम क्या ख़बर थी डगर भूल जाएँगे हम जाते थे कहीं और कहीं और आ गए मिलते-ही नज़र … नैन जादूभरे मुस्कुराते गए … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – नख़रेवाली, देखने में देख लो हैं कैसी | 1956 – New Delhi – nakhrewali dekhne mein dekh lo hain kaisi bholi bhali

नख़रेवाली देखने में देख लो हैं कैसी भोली-भाली अजनबी ये छोरियाँ, दिल पे डालें डोरियां मन की काली वो तो कोई और थी जो आँखों से समा गई दिल में बेरहम, बेवफ़ा, अपना कुछ अता-पता बता तो दे बेकली, बेकसी, कुछ तो कम हो फिर से मुस्कुरा तो दे वो तो कोई और थी जो … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – तुम संग प्रीत लगाई रसिया | 1956 – New Delhi – tum sang preet lagayi rasiya

तुम संग प्रीत लगाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं मर गई, बेदर्दी तेरे प्यार में गोरी-गोरी रात के गोरे-गोरे चाँद की तुझको क़सम राजा, लौटके आजा पहले मिलन की रंगभरी शाम को कैसे भुलाऊँ सैंया, तू ही बता जा मौसम ले अंगड़ाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से | 1956 – New Delhi – zindagi bahar hai mohabbat ki bahar se

ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से दिल से दिल को प्यार है, फिर क्यूँ डरना संसार से।। मैं गुमसुम, तुम भी चुप थे पर आँखों ने सब कह डाला मेरे प्यार में पहनी वरमाला ज़िंदगी बहार है … मैं नाचूँ मेरा मन नाचे मेरे संग-संग सारा जग नाचे मची धूम, ख़ुशी की धुन बाजे … Continue reading →

१९५८ – मधुमती – चढ़ गयो पापी बिछुआ | 1958 – Madhumati – chadh gayo papi bichhua

ओ ओ ओ ओ बिछुआ, हाय रे पीपल छैँया बैठी पलभर भरके गगरिया, हाय रे होय ओय ओय ओय दैय्या रे, दैय्या रे, चढ़ गयो पापी बिछुआ ओ हाय हाय रे मर गई, कोई उतारो बिछुआ दैय्या रे, दैय्या रे, चढ़ गयो पापी बिछुआ कैसो रे पापी बिछुआ, कैसो रे पापी बिछुआ दैय्या रे, दैय्या … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – तू माने या न माने बलम अनजाने | 1956 – Kismat Ka Khel – tu mane ya na mane balam anjane

तू माने या न माने, बलम अनजाने बेदर्द तेरे लिए नाचे मेरी ज़िंदगी नाचे मेरी ज़िंदगी जब भी हो तेरा-मेरा सामना मुश्किल हो जाए दिल को थामना तू माने या न माने … मेरा तन-मन घेरे खड़े हो फिर क्यूँ नज़रें फेरे खड़े हो तू माने या न माने … ले चले कहाँ दिल को … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – अर्ज़ है आपसे | 1956 – Kismat Ka Khel – arz hai aap se

अर्ज़ है आपसे, आपसे, और आपसे भी भेद की बात है, अपनों से कही जाती है बालम आएगा, आएगा चिट्ठी आई, ऐतवार की शाम तलक आ जाएगा, आएगा चाहे ग़ैरों को इसका यक़ीं हो न हो मेरा दिल कह रहा था कि आएँगे वो पहली-पहली मुलाक़ात की वो क़सम भूलकर भी नहीं भूल पाएँगे वो … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – चलो ले चलूँ मैं तारों में | 1956 – Kismat Ka Khel – chalo le chaloon main taaron mein

चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में चाँद से उतरी प्यार की पुतली, मैं तुम्हारी गुलबदन बिखरे सपने, खोए नग़्मे, लाई तुम्हारी गुलबदन चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में ना ऐसे ग़म हैं, ना ये सितम हैं, नीलम के उस देश में सब के साथ प्यार की बात होती है … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली | 1956 – Kismat Ka Khel – qismat ka khel hai janab-e-aali

क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली आपके पास हैं मोती-ख़ज़ाने और अपनी जेब ख़ाली, जेब ख़ाली, जेब ख़ाली निकले बाज़ार से वो मुस्कुराते, बढ़के हर चीज़ पे बोली लगाते हमने गर्दन झुका ली, हाँ झुका ली, लो झुका ली क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली हमको भी ढूँढ़ती क़िस्मत हमारे घर पे आई लेकिन हम सोए थे … Continue reading →