Songs of Shailendra::
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Shankar-Jaikishan

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१९५१ – नगीना – तूने हाय मेरे ज़ख्म-ए-जिगर को | 1951 – Nagina – tune haay mere zakhm-e-jigar ko

तूने हाय मेरे ज़ख़्म-ए-जिगर को छू लिया दूर हूँ मैं तेरी दुनिया से क्यूँ छुआ ना मन मेरा तूने हाय मेरे ज़ख़्म-ए-जिगर को छू लिया मैं प्यार की चाँदनी रात हूँ उलझी हुई दर्द की बात हूँ तूने हाय मेरे ज़ख़्म-ए-जिगर को छू लिया सूना था घर कोई रहने लगा डरके मगर दिल ये कहने … Continue reading

१९५१ – नगीना – एक सितारा है आकाश में | 1951 – Nagina – ek sitara hai akash mein

एक सितारा है आकाश में, एक सितारा, एक सितारा दो थे कुछ दिन, आज अकेला एक वही पथहारा एक सितारा धुँधला-सा एक दीप जलाए, फिर अँधेरा बढ़ता जाए बड़े जतन से दिल में छुपाए, आग का एक अँगारा एक सितारा रात जो देखे उसक ग़म तो, ओस के आंसू रोए दुनिया अपने मीठे सपने गले … Continue reading

१९५१ – नगीना – हमसे कोई प्यार करो जी | 1951 – Nagina – hum se koi pyar karo ji

हमसे कोई प्यार करो जी hello एक एक एक एक बार करो जी hello हमसे कोई प्यार करो जी एक एक एक एक बार करो दिल को मेरे गुलज़ार करो जी हमसे कोई प्यार करो झाँकके आँखों से कहता दिल, hello hello, hello hello प्यार की दुश्मन है ये दुनिया, भाग चलो, चलो चलो हमसे … Continue reading

१९५१ – नगीना – कोई नहीं घर में | 1951 – Nagina – koi nahin ghar mein

my my my my my dear, आओ near आओ, mummy नहीं daddy नहीं कोई नहीं घर में लगता है मुझको डर, my dear झंडी क्यूँ दिखाई दिल का इंजन बेक़रार है देखूँ तेरे दिल क junction, कबसे इंतज़ार है देखो देखो देखो देखो लागे ना नज़र, मेरी बाली बाली बाली बाली उमर तेरी काली काली … Continue reading

१९५१ – नगीना – रोऊँ मैं सागर के किनारे | 1951 – Nagina – rouun main sagar kinare

रोऊँ मैं सागर के किनारे, सागर हँसी उड़ाए क्या जानें ये चंचल लहरें, मैं हूँ आग छुपाए मैं भी इतना डूब चुका हूँ, क्या तेरी गहराई काहे होड़ लगाए मोसे, काहे होड़ लगाए रोऊँ मैं सागर के किनारे … तुझमें डूबे चाँद मगर, एक चाँद ने मुझे डुबाया मेरा सबकुछ लूटके छिप गई, चाँदनी रात … Continue reading

१९५४ – पूजा – रूमझूमके बजाओ बंसरी मुरारी | 1954 – Pooja – rumjhumake bajao bansari murari

रूमझूमके बजाओ बंसरी मुरारी अंग-अंग में तरंग लाओ बनवारी रूमझूमके बजाओ बंसरी मुरारी मधुबन में मधुवंती गाएँ ब्रिजनारी रूमझूमके बजाओ बंसरी मुरारी राधा के मन में प्यार, रुनझुन पायल पुकार सखियाँ सजके सिंगार, आईं जमुना के पार रूमझूमके बजाओ बंसरी मुरारी रुक-थमके चाँद चले, तारों का मन मचले रुनक-झुनक धूम-धाम नीलम के गगन तले रूमझूमके … Continue reading

१९५४ – पूजा – मोरी बिपदा आन हरो | 1954 – Pooja – mori bipada aan haro

मोरी बिपदा आन हरो, प्रभु काहे देर करो मोरी बिपदा आन हरो मैं सपनों के महल बनाऊँ आशाओँ के दीप जलाऊँ आँख खुले तो कुछ ना पाऊँ मोसे छलिया छल ना करो मोरी बिपदा अन हरो … मन के बिखरे तार सजाऊँ जी चाहे संगीत सुनाऊँ लेकिन जाने क्यूँ घबराऊँ मेरा ये डर दूर करो … Continue reading

१९५४ – पूजा – मैं मुरलीधर की मुरली लई | 1954 – Pooja – main murlidhar ki murli layi

मैं मुरलीधर की मुरली लई, मुरलीधर ने लई मेरी माला मैं मुरलीधर की मुरली भई, मुरलीधर हो गए मेरी माला मैं मुरलीधर की मुरली लई मैं क्या जानूँ प्यार है क्या बला, ये दर्द है कैसा ये जग सारा लागे मुझे सखी सपनों के जैसा मैं अपनी सुध-बुध खो बैठी, दो नैनों ने जादू डाला … Continue reading

१९५४ – पूजा – जो एक बार कह दो | 1954 – Pooja – jo ek baar keh do

जहाँ कहीं दीपक जलता है, वहाँ पतंगा भी आता है प्रीत की रीत यही है, मूरख, तू कहे घबराता है परवाने की नादानी पर दुनिया हँसती है तो हँसे प्यार की मीठी आग में प्रेमी हँसते-हँसते जल जाता है जो एक बार कह दो कि तुम हो हमारे तो बदले ये दुनिया, बदलें नज़ारे जो … Continue reading

१९५४ – पूजा – होली आई प्यारी-प्यारी | 1954 – Pooja – holi aayi pyari pyari

होली आई प्यारी-प्यारी भर पिचकारी, रंग दे चुनरिया हमारी ओ पिया रंग दे चुनरिया हमारी मेरे तन को भिगा दे, मन को भिगा दे मान ले अरज हमारी ओ पिया रंग दे चुनरिया हमारी एक बरस में एक दिन होली, जग दो दिन का मेला तन का पिंजड़ा छोड़के एक दिन पँछी जाए अकेला दो … Continue reading