Songs of Shailendra::
archives

Shailendra

This tag is associated with 562 posts

१९५६ – नई दिल्ली – मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए | 1956 – New Delhi – milte hi nazar aap mere dil mein aa gaye

मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए अफ़्सोस है कि आप भी मुश्किल में आ गए मिलते-ही नज़र आप मेरे दिल में आ गए दिल के कहने पे बढ़ते गए ये क़दम क्या ख़बर थी डगर भूल जाएँगे हम जाते थे कहीं और कहीं और आ गए मिलते-ही नज़र … नैन जादूभरे मुस्कुराते गए … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – नख़रेवाली, देखने में देख लो हैं कैसी | 1956 – New Delhi – nakhrewali dekhne mein dekh lo hain kaisi bholi bhali

नख़रेवाली देखने में देख लो हैं कैसी भोली-भाली अजनबी ये छोरियाँ, दिल पे डालें डोरियां मन की काली वो तो कोई और थी जो आँखों से समा गई दिल में बेरहम, बेवफ़ा, अपना कुछ अता-पता बता तो दे बेकली, बेकसी, कुछ तो कम हो फिर से मुस्कुरा तो दे वो तो कोई और थी जो … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – तुम संग प्रीत लगाई रसिया | 1956 – New Delhi – tum sang preet lagayi rasiya

तुम संग प्रीत लगाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं मर गई, बेदर्दी तेरे प्यार में गोरी-गोरी रात के गोरे-गोरे चाँद की तुझको क़सम राजा, लौटके आजा पहले मिलन की रंगभरी शाम को कैसे भुलाऊँ सैंया, तू ही बता जा मौसम ले अंगड़ाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से | 1956 – New Delhi – zindagi bahar hai mohabbat ki bahar se

ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से दिल से दिल को प्यार है, फिर क्यूँ डरना संसार से।। मैं गुमसुम, तुम भी चुप थे पर आँखों ने सब कह डाला मेरे प्यार में पहनी वरमाला ज़िंदगी बहार है … मैं नाचूँ मेरा मन नाचे मेरे संग-संग सारा जग नाचे मची धूम, ख़ुशी की धुन बाजे … Continue reading →

१९६० – परख – मेरे मन के दिये | 1960 – Parakh – mere man ke diye

मेरे मन के दिये, मेरे मन के दिये यूँही घुट-घुटके जल तू, मेरे लाडले, ओ मेरे लाडले ख़ाक हो जाएँ हम प्यार के नाम पर प्यार की राह में रौशनी तो रहे मेरे मन के दिये … आग के फूल आँचल में डाले हुए कबसे जलता है वो आसमाँ देख ले मेरे मन के दिये … Continue reading →

१९६० – परख – ये बँसी क्यूँ गाए | 1960 – Parakh – ye bansi kyun gaye

ये बंसी क्यूँ गाए, मुझे क्यूँ सताए ये क्या धुन सुनाए, दूर न जाने काहे मुझको बुलाए, हाय बंसी क्यूँ गाए ये बंसी नदिया के तीर मोहे देखके अकेली मुझको सिखाने आई प्रीत-पहेली जिया उलझाए, मोहे ललचाए, कित जाऊँ, हाय बंसी क्यूँ गाए … हो बंसी बस में ना दिल ना ये नैन हमारे बचपन … Continue reading →

१९६० – परख – क्या हवा चली बाबा रुत बदली | 1960 – Parakh – kya hawa chali baba rut badli

क्या हवा चली, बाबा, रुत बदली क्या हवा चली, रे बाबा, रुत बदली शोर है गली-गली, सौ-सौ चूहे खायके बिल्ली हज को चली क्या हवा चली … पहले लोग मर रहे थे भूख से अभाव से अब कहीं ये मर न जाएँ अपनी खाव-खाव से मीठी बात कडवी लगे, गालियाँ भली क्या हवा चली … … Continue reading →

१९५४ – नौकरी – एक छोटी-सी नौकरी का तलबगार | 1954 – Naukri – ek chhoti si naukri ka talabgar

एक छोटी-सी नौकरी का तलबगार हूँ मैं तुमसे कुछ और जो माँगूँ तो गुनहगार हूँ मैं एक छोटी-सी नौकरी का तलबगार हूँ मैं एक-सौ-आँठवीं अर्ज़ी मेरे अरमानों की कर लो मंज़ूर कि बेकारी से बेज़ार हूँ मैं मैं कलेक्टर न बनूँ और न बनूँगा अफ़सर अपना बाबू ही बना लो मुझे बेकार हूँ मैं मैंने … Continue reading →

१९५४ – नौकरी – मन रे न ग़म कर | 1954 – Naukri – man re na gham kar

ओ मन रे, ना ग़म कर ये आँसू बनेंगे सितारे, जुदाई में दिल के सहारे बिछड़के भी हमसे जहाँ भी रहें वो, रहेंगे हमारे ओ मन रे, ना ग़म कर ये आँसू बनेंगे सितारे, जुदाई में दिल के सहारे जिधर से वो जाएँ आकाश पैरों में कलियाँ बिछा दे जहाँ रात हो कोई चुपके-से राहों … Continue reading →

१९५४ – नौकरी – झूमे रे कली, भँवरा उलझ गया | 1954 – Naukri – jhoome re kali, bhanwra ulajh gaya

झूमे रे कली, भँवरा उलझ गया काँटों में बन-बन ढूँढ़े पवन शराबी गगन कहे, चुपके-से फूल खिला काँटों में झूमे रे कली, भँवरा उलझ गया काँटों में साँझ-सवेरे दिल को घेरे, कौन ये मुझपे जादू फेरे सब समझावें प्रीत बुरी है लगन कहे, जीवन का चैन छुपा काँटों में झूमे रे कली, भँवरा उलझ गया … Continue reading →