Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९५६ – क़िस्मत का खेल – तू माने या न माने बलम अनजाने | 1956 – Kismat Ka Khel – tu mane ya na mane balam anjane

तू माने या न माने, बलम अनजाने बेदर्द तेरे लिए नाचे मेरी ज़िंदगी नाचे मेरी ज़िंदगी जब भी हो तेरा-मेरा सामना मुश्किल हो जाए दिल को थामना तू माने या न माने … मेरा तन-मन घेरे खड़े हो फिर क्यूँ नज़रें फेरे खड़े हो तू माने या न माने … ले चले कहाँ दिल को … Continue reading

१९६८ – झुक गया आसमान – मेरे-तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर | 1968 – Jhuk Gaya Aasman – mere tumhare beech mein ab to na parvat na sagar

मेरे-तुम्हारे बीच में अब तो ना पर्वत ना सागर निसदिन रहे ख़यालों में तुम, अब हो जाओ उजागर अब आन मिलो सजना, अब आन मिलो सजना, सजना आया मदमाता सावन, फिर रिमझिम की रुत आई फिर मन में बजी शहनाई, फिर प्रीत ने ली अँगड़ाई मेरे-तुम्हारे बीच में अब तो … मैं मन को लाख … Continue reading

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – प्यार कर ले नहीं तो फाँसी चढ़ जाएगा | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – pyar kar le nahin to phansi chadh jayega

प्यार कर ले, नहीं तो फाँसी चढ़ जाएगा यार कर ले, नहीं तो यूँ-ही मर जाएगा प्यार कर ले जीते-हारे सैंकडों, तीर से तलवार से मेरे साथ मुस्कुरा, दिल को जीत प्यार से विचार कर ले, नहीं तो पीछे पछताएगा प्यार कर ले … चोरी करी, चोर बना, रोज़ नई घात है आज तेरी ज़िंदगी … Continue reading

१९६१ – जंगली – जा जा जा मेरे बचपन | 1961 – Junglee – ja ja ja mere bachpan

जा जा जा मेरे बचपन, कहीं जाके छुप नादाँ ये सफ़र है अब मुश्किल, आने को है तूफ़ाँ जा जा जा मेरे बचपन, कहीं जाके छुप नादाँ ज़िंदगी को नए रंग मिलने लगे एक किरन छू गई, फूल खिलने लगे जा जा जा मेरे बचपन … एक कसक हर घड़ी दिल में रहने लगी जो … Continue reading

१९६२ – काँच की गुड़िया – साथ हो तुम और रात जवाँ | 1962 – Kanch Ki Gudiya – saath ho tum aur raat jawan

साथ हो तुम और रात जवाँ नींद किसे अब चैन कहाँ कुछ तो समझ ऐ भोले सनम कहती है क्या नज़रों की ज़ुबाँ साथ हो तुम और रात जवाँ महकती हवा, छलकती घटा हमसे ये दिल सँभलता नहीं की मिन्नतें, मनाकर थके करें क्या, ये अब बहलाता नहीं देखके तुमको बहकने लगा, लो मचलने लगा … Continue reading

१९५७ – कठपुतली – हाय तू ही गया मोहे भूल रे | 1957 – Kathputli – haay tu hi gaya mohe bhool re

हाय तू ही गया मोहे भूल रे मैं हूँ तेरे जीवन की रागिनी हाय तू ही गया मोहे भूल रे तेरे नग़्मे तारे बनकर चमके सबके प्यारे बनकर हाय तू ही गया … फिर से ऐसा राग सुना रे झूम उठें ये ग़म के मारे हाय तू ही गया … haay tuu hii gayaa mohe … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – अर्ज़ है आपसे | 1956 – Kismat Ka Khel – arz hai aap se

अर्ज़ है आपसे, आपसे, और आपसे भी भेद की बात है, अपनों से कही जाती है बालम आएगा, आएगा चिट्ठी आई, ऐतवार की शाम तलक आ जाएगा, आएगा चाहे ग़ैरों को इसका यक़ीं हो न हो मेरा दिल कह रहा था कि आएँगे वो पहली-पहली मुलाक़ात की वो क़सम भूलकर भी नहीं भूल पाएँगे वो … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – चलो ले चलूँ मैं तारों में | 1956 – Kismat Ka Khel – chalo le chaloon main taaron mein

चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में चाँद से उतरी प्यार की पुतली, मैं तुम्हारी गुलबदन बिखरे सपने, खोए नग़्मे, लाई तुम्हारी गुलबदन चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में ना ऐसे ग़म हैं, ना ये सितम हैं, नीलम के उस देश में सब के साथ प्यार की बात होती है … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले | 1956 – Kismat Ka Khel – na bure na bhale ham gareeb gham ke pale

ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले तुम क्या जानो हस्ती हमारी, राजा, तुम क्या जानो हस्ती हमारी लाडली ज़िंदगी अपने आँसुओं में ढली तुम क्या जानो ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले तुम क्या जानो हस्ती हमारी, राजा, तुम क्या जानो हस्ती हमारी हमारी भी गली में मुस्कुराए चाँदनी … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली | 1956 – Kismat Ka Khel – qismat ka khel hai janab-e-aali

क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली आपके पास हैं मोती-ख़ज़ाने और अपनी जेब ख़ाली, जेब ख़ाली, जेब ख़ाली निकले बाज़ार से वो मुस्कुराते, बढ़के हर चीज़ पे बोली लगाते हमने गर्दन झुका ली, हाँ झुका ली, लो झुका ली क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली हमको भी ढूँढ़ती क़िस्मत हमारे घर पे आई लेकिन हम सोए थे … Continue reading