Songs of Shailendra::
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१९५४ – बादशाह – गुल मुस्कुरा उठा बुलबुल ये गा उठा | 1954 – Badshah – gul muskura utha bulbul ye gaa utha

गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ गई बहार दुल्हन के जैसी नई ज़िंदगी का आज ये पहला दिन है ख़ुशीका मौसम ये प्यार का, साज़-ओ-सिंगार का बाग़ों में आ गई बहार गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार | 1958 – Baaghi Sipahi – maan bhi le ae dil too apni ye haar

मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले ऐ दिल नए रंग लेके उतरती है शाम, जाने क्यूँ बनती-सँवरती है शाम आ हम भी सपनों की दुनिया सँवार लें झूम-झूम गाए ये पागल बहार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ओ बेरहम, तेरे सितम हम पे होंगे कब तक | 1958 – Baaghi Sipahi – o beraham tere sitam hum pe honge kab tak

ओ बेरहम, तेरे सितम हमपे होंगे कब तक, देखेंगे हम ये रौशनी जलती रहे, जान भी जाए तो हमें होगा ना ग़म वो देख आँसुओं से ज़ख़्म धो रही है ज़िंदगी वो ख़ाक होके बीज नए बो रही ज़िंदगी सिवा ख़ुदाके और की ना होगी हमसे बंदगी ये कहके देख ज़ार-ज़ार रो रही है ज़िंदगी … Continue reading

१९५१ – बादल – ऐ दिल न मुझसे छुपा | 1951 – Badal – ae dil na mujhse chhupa

ऐ दिल न मुझसे छुपा, सच बता क्या हुआ जाने भी दो दिलरुबा, जो हुआ सो हुआ तारे गिने रातभर, जाने कब याद में सो गई वो ख़्वाब था मदभरा, जिसमें बेहोश मैं खो गई कोई नींद में हमसे रूठके, हमको लूटके, चल दिया जाने भी दो दिलरुबा, जो हुआ सो हुआ ऐ दिल न … Continue reading

१९५१ – बादल – दो दिन के लिए मेहमान यहाँ | 1951 – Badal – do din ke liye mehman yahan

दो दिन के लिए मेहमान यहाँ मालूम नहीं मंज़िल है कहाँ अरमान-भरा दिल तो है मगर जो दिल से मिले वो दिल है कहाँ इक फूल जला, इक फूल खिला कुछ अपना लुटा, कुछ उनको मिला कैसे करें क़िस्मत से गिला रंगीन हर एक महफ़िल है कहाँ दो दिन के लिए … दुनिया में सवेरा … Continue reading

१९६३ – अपने हुए पराए – मैंने बुलाया और तुम आए | 1963 – Apne Huye Paraye – main ne bulaya aur tum aaye

मैंने बुलाया और तुम आए, अब दिल चाहे क्या आओ तुम्हें पलकों में रख लूँ, सच कर लूँ सपना आँचल में हैं फूल ख़ुशीके, तुमसा मीत मिला आओ तुम्हें पलकों में रख लूँ, सच कर लूँ सपना तुम हँसे और मेरे दिल में रौशनी हो गई ज़िंदगी प्यार की रागिनी के संग खो गई आओ … Continue reading

१९६२ – असली नक़ली – तेरा मेरा प्यार अमर | 1962 – Asli Naqli – tera mera pyar amar

तेरा-मेरा प्यार अमर फिर क्यूँ मुझको लगता है डर मेरे जीवनसाथी बता क्यूँ दिल धड़के रह-रहकर क्या कहा है चाँद ने, जिसको सुनके चाँदनी हर लहर पे झूमके, क्यूँ ये नाचने लगी चाहत का है हरसू असर फिर क्यूँ मुझको लगता है डर तेरा-मेरा प्यार अमर … कह रहा है मेरा दिल, अब ये रात … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ऐ दिलबर दिलवाले प्यार पे मरनेवाले | 1958 – Baaghi Sipahi – ae dilbar dilwale pyar pe marnewale

ऐ दिलबर दिलवाले, प्यार पे मरनेवाले दिल की लगी यूँ न बुझी, आग से आग बुझा ले ऐ दिलबर दिलवाले दूर-दूर-दूर से ये खेल किस काम के देख-देख-देख जानाँ, दामन को थामके छेड़के साज़-ए-दिल को, फिर वो तराना गा ले दिल की लगी यूँ न बुझी, आग से आग बुझा ले ऐ दिलबर दिलवाले झूम-झूम-झूमके … Continue reading

१९६० – अनुराधा – कैसे दिन बीते कैसे बीतीं रतियाँ | 1960 – Anuradha – kaise din beete kaise beeti ratiyan

कैसे दिन बीते, कैसे बीतीं रतियाँ पिया जाने ना नेहा लगाके मैं पछताई सारी-सारी रैना निंदिया ना आई जानके देखो मेरे जी की बतियाँ पिया जाने ना हाय, कैसे दिन बीते … रुत मतवाली आके चली जाए मन ही मेरे मन की रही जाए खिलने को तरसे नन्ही-नन्ही कलियाँ पिया जाने ना हाय, कैसे दिन … Continue reading

१९६३ – अपने हुए पराए – अपने हुए पराए क़िस्मत ने क्या दिन दिखलाए | 1963 – Apne Huye Paraye – apne huye paraye qismat ne kya din dikhlaye

अपने हुए पराए क़िस्मत ने क्या दिन दिखलाए कुछ सोचो और कुछ हो जाए हाय रे धीरज कौन बँधाए अपने हुए पराए अँधी जो तक़्दीर न होती, तो इतनी बेपीर न होती दिल पर इतना बोझ न होता, पैरों में ज़ंजीर न होती अपने हुए पराए … जिन राहों से कोई न आए, बैठे उनपे … Continue reading