Songs of Shailendra::
archives

Lata

This tag is associated with 209 posts

१९५९ – छोटी बहन – भैय्या मेरे राखी के बंधन को निभाना | 1959 – Chhoti Bahen – bhaiya mere rakhi ke bandhan ko nibhana

भैय्या मेरे, राखी के बँधन को निभाना भैय्या मेरे, छोटी बहन को ना भुलाना देखो ये नाता निभाना, निभाना भैय्या मेरे, … ये दिन ये त्यौहार ख़ुशीका, पावन जैसे नीर नदीका भाई के उजले माथे पे बहन लगाए मंगल टीका झूमे ये सावन सुहाना, सुहाना भैय्या मेरे, राखी के बँधन को निभाना … बाँधके हमने … Continue reading →

१९५९ – छोटी बहन – ये कैसा न्याय है तेरा | 1959 – Chhoti Bahen – ye kaisa nyay hai tera

ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा किसीको दी निगाह, राह छीन ली किसीको राह दी, निगाह छीन ली ये कैसा न्याय तेरा, दीपक तले अँधेरा तक़्दीर हमसे रूठी, अपने हुए पराए जाने कहाँ चले हैं, जाने कहाँ से आए चारों तरफ़ अँधेरा, बरबादियों ने घेरा किसीको दी निगाह, राह छीन ली किसीको राह दी, … Continue reading →

१९६५ – छोटी छोटी बातें – मोरी बाली रे उमरिया अब कैसे बीते | 1965 – Chhoti Chhoti Baten – mori bali umariya re ab kaise beete

लकडी जल कोयला भई, कोयला जल भयो राख मैं पापन ऐसी जली, न कोयला भई न राख मोरी बाली रे उमरिया, अब कैसे बीते राम रो-रोके बोली राधा, मोहे तजके गयो श्याम मोरी बाली रे उमरिया जो छोड़के ही जना था, तूने काहे को प्रीत लगाई मेरे मीत तेरा क्या बिगड़ा, मेरी हो गई जगत-हँसाई … Continue reading →

१९५९ – चाँद – खोई-खोई अँखियाँ नींद बिना | 1959 – Chaand – khoyi khoyi ankhiyan neend bina

खोई-खोई अँखियाँ नींद बिना देख रही हैं एक सपना खोई-खोई अँखियाँ नींद बिना झूम-झूमके बहार मेरी सेज बिछाए घड़ी-घड़ी करे अजब इशारे सज-धजके मैं जाऊँ, बैठी-बैठी घबराऊँ गड़ी जाऊँ देखो लाज के मारे आते ही होंगे मोरे सजना खोई-खोई अँखियाँ … आके मेरे मनभाए मेरा घुँघटा उठाएँ मोसे पलक उठाए उठ ना मेरी माँग को … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – बहक चले मेरे नैनवा | 1954 – Chandni Chowk – behak chale more nainwa

बहक चले मेरे नैनवा हाय, न जाने कैसी चली हवा क्यूँ न लगी कल रात को पलक, मुझे ये क्या हो गया हाय, मुझे ये क्या हो गया आँचल से मेरा हाथ हटे ना, नैन रहें मेरे झुके-झुके खड़ी रहूँ दर्पन के आगे, उलझी लट ना सुलझ सके मुझ-ही को मेरे हाल पे शर्माना कोई … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – दिल की शिकायत नज़र के शिकवे | 1954 – Chandni Chowk – dil ki shikayat nazar ke shikwe

दिल की शिकायत नज़र के शिकवे, एक ज़ुबाँ और लाख बयाँ छुपा सकूँ ना दिखा सकूँ, मेरे दिल के दर्द भी हुए जवाँ चाँद हँसा, तारे चमके, और मस्त हवा जब इठलाई छुपती फिरी न जाने क्यूँ मैं, जाने क्यूँ मैं शरमाई तेरे सिवा है कौन जो समझे क्या गुज़री मुझपे यहाँ छुपा सकूँ ना … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – नींदपरी लोरी गाए | 1961 – Char Diwari – neend pari lori gaye

नींदपरी लोरी गाए, माँ झुलाए पालना सो जा मेरे लालना, सो जा मेरे लालना मीठे-मीठे सपनों में खो जा मेरे लालना नींदपरी लोरी गाए तूने मेरे मदभरे सपनों को रंग डाला तेरी दोनों अँखियोँ में दुनिया का उजियाला तू जो हँसे, झिलमिलाए दीपमाला नींदपरी लोरी गाए … तू ना होता ज़िंदगी में आहें होतीं सूनी-सूनी … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – अकेला तुझे जाने न दूँगी | 1961 – Char Diwari – akela tujhe jane na doongi

अकेला तुझे जाने ना दूँगी बनके छैंया मैं संग-संग चलूँगी अकेला तुझे जाने ना दूँगी पूरब-दिस है जादू-टोना, भोला है मेरा सजन सलोना कोई बहका ले तो मैं क्या करूँगी अकेला तुझे जाने ना दूँगी चढ़ती नदिया बहता पानी, ढाए सौ-सौ जुलम जवानी गहरी धारा, मैं कब तक बहूँगी अकेला तुझे जाने ना दूँगी हमरा … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – झुक-झुक झूम घटा छाई रे | 1961 – Char Diwari – jhuk jhuk jhoom ghata chhayi re

झुक-झुक-झुक-झूम घटा छाई रे, मन मोरा लहराए पीहू पीहू पीहू पीहू पपीहा गाए, हाय झुक-झुक-झुक-झूम घटा छाई रे, घटा छाई रे गली-गली आज छिड़ी बादलों की रागिनी चंचल नारी-सी हँसे मतवारी दामिनी मस्तीभरी झूमे सावन की परी सुनके रिमझिम की झड़ी, जिया ललचाए, हाय झुक-झुक-झुक-झूम घटा छाई रे, घटा छाई रे दूर-दूर देश गईं संग … Continue reading →

१९५४ – चाँदनी चौक – जादू बुरा बंगाल का | 1954 – Chandni Chowk – jadoo bura bangal ka

बदल चली है जो उनकी नज़र तो क्या कीजे वफ़ा का थामके दामन, ये इल्तजा कीजे जादू बुरा बंगाल का, पूरब ना जइहो बालमा ना जइहो मेरे बालमा, पूरब ना जइहो बालमा जीतेजी दिल पे जुदाई का तीर सहना पड़ा जलाके आशियाँ अपना, कफ़स में रहना पड़ा हाय, लिखा है ये कौनसे पत्थर ने ये … Continue reading →