Songs of Shailendra::
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१९६६ – प्यार मोहब्बत – हाय मिल गई मिल गई रे | 1966 – Pyar Mohabbat – haay mil gayi mil gayi mil gayi re

हुस्न को चाँद, जवानी को कँवल कहते हैं कोई सूरत नज़र आए तो ग़ज़ल कहते हैं मिल गई, मिल गई, मिल गई रे, मुझको मोहब्बत मिल गई आख़िर दुखते दिल को मेरे, दर्द से फ़ुरसत मिल गई मिल गई, मिल गई, मिल गई रे, मुझको मोहब्बत मिल गई गुलशन के अनगिन फूलों में, फूल-सा ये … Continue reading →

१९६६ – प्यार मोहब्बत – तेरे सिवा | 1966 – Pyar Mohabbat – tere siwa

तेरे सिवा कौन है मेरा मैंने अपना जानके दिल तुझे दिया तेरे सिवा तू कहे तो चीरके अपना दिल दिखाऊँ मैं तुझसे क्या छुपा सकी, तुझसे क्या छुपाऊँ मैं जो था मेरा हो चुका तेरा मैंने अपना जानके दिल तुझे दिया तेरे सिवा आज इस तरह न देख, मुझको बेदिली से तू खेल मत ओ … Continue reading →

१९६६ – प्यार मोहब्बत – हाय आप नाराज़ ख़ुदा ख़ैर करे | 1966 – Pyar Mohabbat – haay aap naaraz khuda khair kare

आप नाराज़, ख़ुदा ख़ैर करे नाज़-ओ-अंदाज़, ख़ुदा ख़ैर करे अपनी तो जान पे बन आई है दिल की आवाज़, ख़ुदा ख़ैर करे हमने बुलाया तो न आए आप, मेरे साए से भी कतराए आप आख़िर तो कोई बात है मुझमें, आज जो पास चले आए आप आप नाराज़, ख़ुदा ख़ैर करे … आप अच्छे लगे … Continue reading →

१९६२ – प्रोफ़ेसर – मैं चली मैं चली पीछे-पीछे जहाँ | 1962 – Professor – main chali main chali peechhe peechhe jahan

मैं चली मैं चली, पीछे-पीछे जहाँ ये न पूछो किधर, ये न पूछो कहाँ सजदे में हुस्न के झुक गया आसमाँ लो शुरु हो गई, प्यार की दास्ताँ मैं चली मैं चली जाओ जहाँ कहीं आँखों से दूर, दिल से न जाओगे मेरे हुज़ूर जादू फ़िज़ाओं का छाया सुरूर, ऐसे में बहके तो किसका क़ुसूर … Continue reading →

१९६२ – प्रोफ़ेसर – खुली पलक में झूठा ग़ुस्सा | 1962 – Professor – khuli palak mein jhootha gussa

ज़रा ठहरो सदा मेरे दिल की ज़रा सुनते जाना खुली पलक में झूठा ग़ुस्सा, बंद पलक में प्यार जीना भी मुश्किल, मरना भी मुश्किल आँखों में इक़रार की झलकी, होंठों पे इनकार जीना भी मुश्किल, मरना भी मुश्किल जिस दिन से देखा तुमको, तुम लगे मुझे अपने-से और आके रहे आँखों में, एक मनचाहे सपने-से … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – भोले पिया | 1965 – Poonam Ki Raat – bhole piya

भोले पिया, जाने क्या तुमने किया खो गया मोरा जिया मिलता नहीं मेरा नन्हा-सा जिया हर कहीं ढूँढ़ लिया भोले पिया लाज की मारी मैं चुप-चुप हूँ कहूँ तो जाके कासे कहूँ राह में देखा एक अलबेला और अलबेले ने धोखा दिया भोले पिया … दिन ना बीते अँधेरा ना हो रात आए तो सवेरा … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – सपनों में मेरे | 1965 – Poonam Ki Raat – sapnon mein mere

सपनों में मेरे कोई आए-जाए झलकी दिखाए और छुप जाए कुछ ना बोले देखो मेरा मन, हाय रे हाय, वो लेके चला जाए रे जाए सपनों में मेरे कोई आए-जाए मन के नगर में आया है कोई ख़ुशियाँ-ही-ख़ुशियाँ लाया है कोई वो मेरा दिल, हाय रे हाय, लुभाता चला जाए रे जाए सपनों में मेरे … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – ता दीम ताना दीम | 1965 – Poonam Ki Raat – ta deem tana deem

ता दीम ताना दीम, ता दीम दीम दीम कह दो कोई बेदर्दी से जाके कहता है जो आज का मौसम ता दीम ताना दीम, ता दीम दीम दीम ज़िंदगी है दो दिन की, पलछिन की जवानी तू तो न होगा, तेरी रह जाएगी कहानी तेरी एक नज़र में था क्या असर तुझे क्या पता, तुझे … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – दिल तड़पे तड़पाए | 1965 – Poonam Ki Raat – dil tadpe tadpaye

दिल तड़पे, तड़पाए जिनके मिलन को तरसे, वो तो न आए मौसम आए-जाए दिल तड़पे, तड़पाए सपने तो खो गए करके दीवाना मुझे करनी पे अपने दिल की पड़ा पछताना मुझे ख़ुद को मना लूँ, दुखड़े छुपा लूँ दिल की लगी हाय कौन बुझाए दिल तड़पे, तड़पाए सपनों के साथी मेरे दमभर को आजा घायल … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – साथी रे, तुझबिन जिया उदास रे | 1965 – Poonam Ki Raat – saathi re, tujh bin jiya udaas re

साथी रे, साथी रे तुझबिन जिया उदास रे, ये कैसी अनबुझ प्यास रे आजा, आ आ, आ आ, आ आ दोनों जहाँ से दूर यहाँ मैं भटक रही हूँ जाने कहाँ मैं साथी रे … ना मैं काया ना मैं छाया फिर क्यूँ डोले मन भरमाया साथी रे … प्यार की मैं अनबूझ कहानी कुछ … Continue reading →