Songs of Shailendra::
archives

1958

This tag is associated with 32 posts

१९५८ – डिटेक्टिव – राही चल सँभलके | 1958 – Detective – rahi chal sambhal ke

राही चल सँभल-सँभलके है बड़ा कठिन ये रास्ता बड़ा कठिन है रस्ता ये प्यार का राही चल सँभल-सँभलके है बड़ा कठिन ये रास्ता ये गली लागे भली, दिल तेरा चुराए रे आगे जाकर किसीकी समझ में ना आए रे खो ना जाना, तू कहीं खो ना जाना राही चल सँभल-सँभलके … जो नज़र तुझको उधर … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – छोड़िये ग़ुस्सा हुज़ूर | 1964 – Detective – chhodiye gussa huzoor

छोड़िए ग़ुस्सा हुज़ूर, ऐसी नाराज़ी भी क्या हमने तो जो कुछ किया, दिल के कहने पर किया आपकी मर्ज़ी है, अब जो चाहे दीजिए सज़ा छोड़िए ग़ुस्सा हुज़ूर, ऐसी नाराज़ी भी क्या सीने के पार कर दो, तिरछी नज़र का तीर हम चुप हैं लो पहना भी दो ज़ुल्फ़ों की ये ज़ंजीर यूँ भी घायल … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – आ जा कर ले मुक़ाबला | 1958 – Detective – aa ja kar le muqabla

आजा कर ले मुक़ाबला, ये बाज़ी प्यार की हो जाए आज फ़ैसला, ये बाज़ी प्यार की कहती हूँ मान जा, ऐ नादाँ मान जा उल्फ़त के खेल में ख़तरा है जान का, हो हो जा जा जा जा जा जा जा आजा कर ले मुक़ाबला … चाल मेरी मस्तानी, हर क़दम मेरा तूफ़ानी यहाँ भी … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – दो चमकती आँखों में | 1958 – Detective – do chamakti ankhon mein

दो चमकती आँखों में कल ख़्वाब सुनहरा था जितना हाय, ज़िंदगी तेरी राहों में आज अँधेरा है उतना हमने सोचा था जीवन में फूल चाँद और तारे हैं क्या ख़बर थी साथ में इनके काँटे और अंगारे हैं हमपे क़िस्मत हँस रही है, कल हँसे थे हम जितना दो चमकती आँखों में … इतने आँसू … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – मुझको तुम जो मिले ये जहाँ मिल गया | 1958 – Detective – mujhko tum jo mile ye jahan mil gaya

मुझको तुम जो मिले, ये जहाँ मिल गया तुम जो मेरे दिल में हँसे, दिल का कमल देखो खिल गया मुझको तुम जो मिले, ये जहाँ मिल गया ये भीगती हुई फ़िज़ा, बरस रही है चाँदनी तारों ने मिलके छेड़ दी, मधुर मिलन की रागिनी लेके क़रार आया है प्यार, क्या है अगर मेरा दिल … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – आँखों पे भरोसा मत कर | 1958 – Detective – ankhon pe bharosa mat kar

आँखों पे भरोसा मत कर, दुनिया जादू का खेल है हर चीज़ यहाँ एक धोखा, हर बात यहाँ बेमेल है ओ मतवाले, हँस ले गा ले, ले जीने का मज़ा इस दुनिया की भीड़ में तू, मेरी तरह नन्हा बन जा आँखों पे भरोसा मत कर, दुनिया जादू का खेल है हर चीज़ यहाँ एक … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – चिंचना पापुल छुई-मुई मुझे छू न लेना | 1958 – Baaghi Sipahi – chinchana papul chhui mui mujhe chhoo na lena

चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल छुईमुई मैं, छू न लेना, मुझे छू न लेना आँख से आँख मिली, जाम पे जाम चले, मुफ़्त बदनाम हुए हम तेरी ये शोख़ नज़र, ठण्डी आहों का असर, तुझे पहचान गए हम चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल लेके मेरा दिल जाँ न लेना, मुझे छू न लेना … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार | 1958 – Baaghi Sipahi – maan bhi le ae dil too apni ye haar

मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले ऐ दिल नए रंग लेके उतरती है शाम, जाने क्यूँ बनती-सँवरती है शाम आ हम भी सपनों की दुनिया सँवार लें झूम-झूम गाए ये पागल बहार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ओ बेरहम, तेरे सितम हम पे होंगे कब तक | 1958 – Baaghi Sipahi – o beraham tere sitam hum pe honge kab tak

ओ बेरहम, तेरे सितम हमपे होंगे कब तक, देखेंगे हम ये रौशनी जलती रहे, जान भी जाए तो हमें होगा ना ग़म वो देख आँसुओं से ज़ख़्म धो रही है ज़िंदगी वो ख़ाक होके बीज नए बो रही ज़िंदगी सिवा ख़ुदाके और की ना होगी हमसे बंदगी ये कहके देख ज़ार-ज़ार रो रही है ज़िंदगी … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – समाँ ये प्यार का बहार के ये मेले | 1958 – Baaghi Sipahi – sama ye pyar ka bahar ke ye mele

समाँ ये प्यार का, बहार के ये मेले, ऐसे में निकलो ना झूमके अकेले दिन में भी आजकल डर है दिलों के चोर का दिल को जी हम तो उछालते चलेंगे, बहके निगाह तो सँभालते चलेंगे हमपे चलता नहीं जादू नज़र की डोर का समाँ ये प्यार का, बहार के ये मेले आप हमारे लिए … Continue reading