Songs of Shailendra::
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१९६७ – बदतमीज़ – हसीन हो तुम ख़ुदा नहीं हो | 1967 – Budtameez – haseen ho tum khuda nahin ho

हसीन हो तुम, ख़ुदा नहीं हो, तुम्हारा सिजदा नहीं करेंगे मगर मोहब्बत में हुक़्म दोगे, तो हँसते-हँसते ये जान भी देंगे हसीन हो तुम, ख़ुदा नहीं हो समझते हो ख़ुद को न जाने क्या तुम, कि सारी दुनिया को ख़ाक जाना ग़ुरूर का सर झुकेगा एक दिन, हँसेगा तुम पर भी ये ज़माना हमेशा ये … Continue reading

१९५९ – चाँद – आजा री चाँदनी हमारी गली चाँद लेके | 1959 – Chaand – aa ja ri chandani hamari gali chand leke

आजा री चाँदनी आजा री चाँदनी हमारी गली चाँद लेके आजा हमने नैन बिछाए, आजा बैठे लगन लगाए, आजा अब तो रहा न जाए, आजा आजा री चाँदनी हमारी गली चाँद लेके आजा जब-जब मौसम ले अंगड़ाई, बिजली चमकी, बदली छाई राम ही जाने क्या है बात, नींद न आए सारी रात आजा री चाँदनी … Continue reading

१९५९ – चाँद – ऐ बादलो, रिमझिम के रंग लिए कहाँ चले | 1959 – Chaand – ae badalo, rimjhin ke rang liye jahan chale

ऐ बादलो, ऐ बादलो रिमझिम के रंग लिए कहाँ चले झूमती उमंग लिए, प्यार की पतंग लिए जिया मोरा संग लिए, कहाँ चले ऐ बादलो सनन-सनन पवन घूम-घूमके बाँसुरी बजाए झूम-झूमके कानों-कानों में कहे प्यार करो, देखो ना इनकार करो अजी सुनो, कहाँ चले ऐ बादलो, रिमझिम के रंग लिए कहाँ चले ऐ बादलो थिरक-थिरक … Continue reading

१९५९ – चाँद – कभी आज कभी कल कभी परसों | 1959 – Chaand – kabhi aaj kabhi kal kabhi parson

कभी आज, कभी कल, कभी परसों ऐसे ही बीते बरसों हमारी सुनते ही नहीं साजना देखो जी, सुनते ही नहीं साजना डाल पे फूल और फूलों पे भँवरे, दिनभर सौ-सौ खेल करें तड़पें-तरसें हमीं अकेले, छुप-छुप ठण्डी आह भरें बीती जाए देखो हाय ये जवानी, ये दिलों की कहानी हमारी सुनते ही नहीं साजना देखो … Continue reading

१९६८ – ब्रह्मचारी – आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर | 1968 – Brahmachari – aaj kal tere mere pyar ke charche har zaban par

आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर सबको मालूम है और सबको ख़बर हो गई तो क्या! आजकल तेरे-मेरे प्यार के चर्चे हर ज़बान पर सबको मालूम है और सबको ख़बर हो गई हमने तो प्यार में ऐसा काम कर लिया प्यार की राह में अपना नाम कर लिया आजकल तेरे-मेरे … दो बदन … Continue reading

१९६७ – बदतमीज़ – दिल को ना मेरे तड़पाओ | 1967 – Budtameez – dil ko na mere tadpao

दिल को न मेरे तड़पाओ, प्यार को मत ठुकराओ अब तो हमारे हो जाओ दिल को न मेरे तड़पाओ यूँ न रहेगा हरदम, हुस्न है आख़िर फ़ानी बँधके कहाँ रहता है, दरिया का बहता पानी चाँद से मत टकराओ, धरती पे वापस आओ अब तो हमारे हो जाओ दिल को न मेरे तड़पाओ छोड़ो चलन … Continue reading

१९५४ – भाई साहब – रात फागुन की चाँद पूनम का | 1954 – Bhai Saheb – raat phagun ki chand poonam ka

रात फागुन की, चाँद पूनम का, फैली शीतल आग बड़ी मुश्किल से सोई बिरहन, पिया की याद में जाग आधी रात खुल गई पलक, सखी, कौन आया चौंक-चमक कामिनी उठ बैठी, कौन आया ये सच है या कोई सपना, मोहे नींद से आन जगाया मुख से न बोले, अँखियन मुस्काए साँवरिया मन भाया रे, कौन … Continue reading

१९५४ – बूट पालिश – चली कौनसे देश गुजरिया | 1954 – Boot Polish – chali kaun se deh gujariya

चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके जाऊँ पिया के देश, ओ रसिया मैं सज-धजके चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके छलके मात-पिता की अँखियाँ रोवे तेरे बचपन की सखियाँ भैया करे पुकार भैया करे पुकार, न जा घर-आँगन तजके जाऊँ पिया के देश, ओ रसिया मैं सज-धजके चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके दूर देश … Continue reading

१९५४ – बूट पालिश – नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी | 1954 – Boot Polish – nanhe munne bachche teri

नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है मुट्ठी में है तक़्दीर हमारी हमने क़िस्मत को बस में किया है भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है आँखों में झूमे उम्मीदों की दीवाली आनेवाली दुनिया का सपना सजा है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में … Continue reading

१९५४ – बूट पालिश – ठहर ज़रा ओ जानेवाले | 1954 – Boot Polish – thaher zara o janewale

ठहर ज़रा ओ जानेवाले ठहर ज़रा ओ जानेवाले, बाबू मिस्टर गोरे काले कबसे बैठे आस लगाए, हम मतवाले पालिशवाले ये काली पालिश एक आना ये ब्राउन पालिश एक आना जूते की मालिश एक आना हर माल मिलेगा है एक आना ना है ना है ना पगड़ी है ना चोरी है छोटी-सी दूकान लगाए, हम मतवाले … Continue reading