Songs of Shailendra::
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१९५४ – बूट पालिश – तुम्हारे हैं तुमसे दया | 1954 – Boot Polish – tumhare hain tum se daya mangte hain

तुम्हारे हैं तुमसे दया माँगते हैं तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं यतीमों की दुनिया में हरदम अँधेरा इधर भूलकर भी न आया सवेरा किसी शाम को एक पलभर जले जो हम आशा का ऐसा दिया माँगते हैं तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं थे हम जिनकी आँखों के चंचल सितारे हमें छोड़ वो इस … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – कर गया रे कर गया मुझपे जादू | 1955 – Basant Bahar – kar gaya re kar gaya mujhpe jadoo

कर गया रे, कर गया मुझपे जादू साँवरिया कर गया मुझपे जादू ये क्या किया रे, ग़ज़ब किया रे चोर को समझी मैं साधु साँवरिया कर गया मुझपे जादू भोली सुरतिया मगर है सयाना सीखे कोई वो से दामन बचाना वादा करके मुकर गया कर गया रे … तुम जो कहो तो मैं नाम बता … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – नैन मिले चैन कहाँ | 1955 – Basant Bahar – nain mile chain kahan

नैन मिले चैन कहाँ दिल है वहीं तू है जहाँ ये क्या किया सैंया साँवरे तूने ये क्या किया सैंया साँवरे चुप-चुप रहके लुटाया दिल तुझपे एक सुख पाया मैंने सौ दुख सहके, सौ दुख सहके दूर-दूर गली-गली अब तो बात फैल चली ये क्या किया सैंया साँवरे तूने ये क्या किया सैंया साँवरे कौनसे … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – बड़ी देर भई, कब लोगे ख़बर मोरे राम | 1955 – Basant Bahar – badi der bhayi, kab loge khabar more raam

बड़ी देर भई, बड़ी देर भई बड़ी देर भई, कब लोगे ख़बर मोरे राम चलते-चलते मेरे पग हारे, आई जीवन की शाम कब लोगे ख़बर मोरे राम बड़ी देर भई, बड़ी देर भई कहते हैं तुम हो दया के सागर, फिर क्यूँ ख़ाली मेरी गागर झूमे-झुके कभी ना बरसे, कैसे हो तुम घनश्याम हे राम, … Continue reading →

१९५४ – भाई साहब – घेरता है गर अँधेरा | 1954 – Bhai Saheb – gherta hai gar andhera

घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर दो घड़ी में मुस्कराएगी सहर, तू ग़म न कर घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर ढल गया एक और दिन, अच्छा हुआ समझो ज़िंदगी जितनी कटी ग़म कम हुआ समझो शुक्र कर कुछ कम हुआ ज़िंदगानी का सफ़र घेरता है गर … Continue reading →

१९५४ – भाई साहब – मंज़िल तो है बड़ी दूर | 1954 – Bhai Saheb – manzil to hai badi door

ऊँची-नीची ऊँची-नीची डगर जीवन की चलना सँभलके प्यारे, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर मंज़िल तो है बड़ी दूर, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर सूने सफ़र में लाखों चोर मिलेंगे तोहे, करनी करेंगे ज़रूर धर्म-कर्म की झोली कहाँ पे गँवाई तूने, पूछेंगे तेरे हुज़ूर संभलके चलना, मंज़िल तो है बड़ी दूर ऊँची-नीची … Continue reading →

१९५४ – बादशाह – रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे | 1954 – Badshah – rulakar chal diye ek din hansi bankar jo aaye the

रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे चमन रो-रोके कहता है, कभी गुल मुस्कुराए थे रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे अगर दिल के ज़ुबाँ होती, ये ग़म कुछ कम तो हो जाता उधर वो चुप, इधर सीने में हम तूफ़ाँ छुपाए थे ये अच्छा था न हम … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – दुनिया न भाए मोहे अब तो बुला ले | 1955 – Basant Bahar – duniya na bhaye mohe ab to bula le

दुनिया ना भाए मोहे, अब तो बुला ले चरणों में, चरणों में तेरे चरणों में, चरणों में मेरे गीत मेरे संग-सहारे कोई ना मेरा संसार में दिल के ये टुकड़े कैसे बेच दूँ दुनिया के बाज़ार में मन के ये मोती रखियो तू सँभाले चरणों में, चरणों में तेरे चरणों में, चरणों में सात सुरों … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – सुर ना सजे क्या गाऊँ मैं | 1955 – Basant Bahar – sur na saje kya gaaoon main

सुर ना सजे, क्या गाऊँ मैं सुर के बिना जीवन सूना सुर ना सजे, क्या गाऊँ मैं दोनों जहाँ मुझसे रूठे तेरे बिना ये गीत भी झूठे सुर ना सजे … जलते गया जीवन मेरा इस रात का न होगा सवेरा सुर ना सजे … संगीत मन को पंख लगाए गीतों से रिमझिम रस बरसाए … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – भयभंजना वंदना सुन हमारी | 1955 – Basant Bahar – bhaybhanjana vandana sun hamari

भय-भंजना वंदना सुन हमारी दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी भय-भंजना गीतों के फूलों की माला बनाकर लाया हूँ दिल आरती में सजाकर ये साँसों की सरगम करूँ तेरे अर्पण तुझे और क्या दूँ, मैं ठहरा भिखारी दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी भय-भंजना आजा मधुर स्वप्न-सी मुस्कुराती मन के बुझे दीप हँसकर जलाती जपे … Continue reading →