Songs of Shailendra::
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This category contains 265 posts

१९६२ – हरियाली और रास्ता – बोल मेरी तक़्दीर में क्या है | 1962 – Hariyali Aur Rasta – bol meri taqdeer mein kya hai

बोल मेरी तक़्दीर में क्या है, मेरे हमसफ़र अब तो बता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता कहाँ है मेरे प्यार की मंज़िल, तू बतला, तुझको है पता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता जहाँ हम आके पहुँचे हैं, वहाँ से लौटकर जाना नहीं मुमकिन, मगर मुश्किल है दुनिया से भी … Continue reading

१९५६ – हलाकू – अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया | 1956 – Halaku – aji chale aao, tumhein aankhon ne dil mein bulaya

अजी चले आओ अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया अब तो समझ जाओ अब तो समझ जाओ, क्यूँ निगाहों ने पर्दा गिराया अजी चले आओ दिल में उठती हैं कैसी उमंगें, तुमसे कानों में कहना पड़ेगा शर्त सुन लो मगर मेरे दिलबर, आके दिल में ही रहना पड़ेगा ज़रा मुस्कुराओ ज़रा मुस्कुराओ, … Continue reading

१९५६ – हलाकू – आजा कि इंतज़ार में | 1956 – Halaku – aa ja ki intezar mein

आजा कि इंतज़ार में, जाने को है बहार भी तेरे बग़ैर ज़िंदगी, दर्द बनके रह गई अरमाँ लिए बैठे हैं हम, सीने में है तेरा-ही ग़म तेरे दिल से प्यार की वो तड़प किधर गई आजा कि इंतज़ार में… दिल की सदा पे ऐ सनम, बढ़ते गए मेरे क़दम अब तो चाहे जो भी हो, … Continue reading

१९६६ – गबन – तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए | 1966 – Gaban – tumhari qasam tum bahut yaad aaye

मैं हर रात जागी कि इस बार शायद मोहब्बत तुम्हें इस तरफ़ खींच लाए तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए न पूछो, ये दिन हमने कैसे बिताए तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए बरसने लगे शब तो क्या नींद आए उधर कडके बिजली, इधर जान जाए न पूछो, ये दिन हमने … ज़रा एक नज़र … Continue reading

१९६६ – गबन – आए रे दिन सावन के | 1966 – Gaban – aaye re din sawan ke

आए रे दिन सावन के, सावन के बलम तेरे आवन के, आवन के आए रे दिन सावन के तेरे प्यार का जोग लिया, मोहे लोग कहें दीवानी घर-घर की इस कहा-सुनी में, मैं बन गई कहानी आए रे दिन सावन के … दो नैनों के दीप जलाए, जागूँ सारी रैना कैसे लागे नैन पिया जब, … Continue reading

१९६० – एक फूल चार काँटे – सोच रही थी कहूँ ना कहूँ | 1960 – Ek Phool Char Kaante – soch rahi thi kahoon na kahoon

सोच रही थी कहूँ ना कहूँ, पर आज कहूँगी मेरे सनम तूने ले तो लिया दिल याद रहे मेरा जीना है मुश्किल तेरे बिना, तेरे बिना क्या मैं कहूँ सजना, मुझको हुआ क्या है मुझमें बसे हो तुम, तुमसे छुपा क्या है तुम ही सुनो अब कहता है क्या दिल याद रहे मेरा जीना है … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – शाम गई रात आई कि बलम आ जा | 1955 – Shree 420 – sham gayi raat aayi ki balam aa ja

शाम गई रात आई, कि बलम आजा तारों की बरात आई, कि बलम आजा ओ बलम आजा, अब तो सनम आजा शाम गई रात आई, कि बलम आजा रात और दिन के मिलन की घड़ी में, ठण्डी-ठण्डी सावन की झड़ी में दो दिलों ने जो बाँधे थे बँधन, उनमें खोई खड़ी मैं, खड़ी मैं याद … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – प्यार हुआ इक़रार हुआ है | 1955 – Shree 420 – pyar hua iqrar hua hai

प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहता है दिल, रस्ता मुश्किल, मालूम नहीं है कहाँ मंज़िल प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहो कि अपनी प्रीत का गीत न बदलेगा कभी तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी प्यार जो … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – रमैया वस्तावैया | 1955 – Shree 420 – ramaiyya vastavaiyya

रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया मैंने दिल तुझको दिया, मैंने दिल तुझको दिया ओ रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया नैनों में थी प्यार की रौशनी तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी तू और था, तेरा दिल और था तेरे मन में ये मीठी कटारी न थी मैं जो दुख पाऊँ तो क्या, आज पछताऊँ तो क्या … Continue reading

१९५५ – सीमा – मनमोहना बड़े झूठे | 1955 – Seema – manmohana bade jhoothe

मनमोहना बड़े झूठे हारके हार नहीं मानें मनमोहना बने थे खिलाड़ी पिया, निकले अनाड़ी मोसे बेईमानी करी, मुझसे ही रूठे मनमोहना बड़े झूठे तुम्हरी ये बांसी कान्हा, बनी गलफाँसी तान सुनाके मेरा तन-मन लूटे मनमोहना बड़े झूठे manamohanaa ba.De jhuuThe haarake haar nahii.n maane.n manamohanaa bane the khilaa.Dii piyaa, nikale anaa.Dii mose be_iimaanii karii, mujhase … Continue reading