Songs of Shailendra::
archives

Lata

This category contains 265 posts

१९५३ – शिकस्त – बदले रंग जहान के | 1953 – Shikast – badle rang jahan ke

बुझ गए आशा के दिये, मन अँधियारा होए लुट गए मोती लाज के, सीप बिचारी रोए सब दुश्मन इस जान के, बदले रंग जहान के बदले रंग जहान के देख अँधेरी रात, जियरवा काँपे डर से घूमे संकट का बादरवा, गरजे बरसे जाल बिछे तूफ़ान के, बदले रंग जहान के बदले रंग जहान के होंठ … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – जब-जब फूल खिले | 1953 – Shikast – jab jab phool khile

जब-जब फूल खिले, तुझे याद किया हमने जब-जब फूल खिले देख अकेला हमें, हमें घेर लिया ग़म ने जब-जब फूल खिले मन को मैंने लाख मनाया पर अब तो है वो भी पराया ज़ख्म किए नासूर, तेरी याद के मरहम ने जब-जब फूल खिले मिलने के हैं लाख बहाने लेकिन मन का मीत न माने … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – कारे बदरा तू न ज न जा | 1953 – Shikast – kare badra tu na ja na ja

कारे बदरा तू न जा, न जा बैरी तू बिदेस न जा घननन मेघ-मल्हार सुना रिमझिम रस बरसा जा सनन-सनन हाय पवन झकोरा बुझती आग जलाए मन की बात नयन में आए, मुख से कही न जाए कारे बदरा तू न जा … माथे क सिंदूर रुलावे, लट नागिन बन जाए लाख रचाऊँ उन बिन … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – नई ज़िंदगी से प्यार करके देख १ | 1953 – Shikast – nayi zindagi se pyar karke dekh 1

नई ज़िंदगी से प्यार करके देख इसके रूप का सिंगार करके देख इसपे जो भी है निसार करके देख नई ज़िंदगी से प्यार करके देख सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल कब तलक रहेंगे बेकसी के जाल, दिल पे बेकसी के जाल वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल, … Continue reading →

१९५३ – शिकस्त – नई ज़िंदगी से प्यार करके देख २ | 1953 – Shikast – nayi zindagi se pyar karke dekh 2

नई ज़िंदगी से प्यार करके देख इसके रूप का सिंगार करके देख इसपे जो भी है निसार करके देख नई ज़िंदगी से प्यार करके देख नींद से धरती को जो जगाएगा, ज़मीं को जो जगाएगा बीज आँसुओं के जो बिछाएगा, जो मेहनतें लुटाएगा फूल उसके आँगन में मुस्कुराएगा, मुस्कुराएगा और चार दिन गुज़ार करके देख … Continue reading →

१९५२ – संस्कार – दो नैनों ने जाल बिछाया | 1952 – Sanskaar – do naino ne jaal bichhaya

दो नैनों ने जाल बिछाया, और दो नैना उलझ गए एक वही बेदर्द ना समझा, दुनियावाले समझ गए दिल था एक बचपन का साथी, वो भी मुझको छोड़ गया निपट अनाड़ी अनजाने से मेरा नाता जोड़ गया मैं बिरहन प्यासी की प्यासी, सावन आए बरस गाए बैठे हैं वो तन-मन घेरे, फिर-भी कितनी दूर हैं … Continue reading →

१९६२ – संगीत सम्राट तानसेन – बदली-बदली दुनिया है मेरी | 1962 – Sangeet Samrat Tansen – badali badali duniya hai meri

परदेसी घर आयके, रह-रह करे विचार पहले किसका नाम लूँ, किसकी करूँ पुकार बदली-बदली दुनिया है मेरी जादू है ये क्या तेरे नैनन का बनके कजरा अँखियों में रहा एक सुंदर सपना बचपन का बदली-बदली दुनिया है मेरी मेरे गीतों के चंचल स्वर आए होंगे बादल बनकर बरसे होंगे इस आँगन पर लेके संदेस मेरे … Continue reading →

१९६२ – संगीत सम्राट तानसेन – सखी कैसे धरूँ मैं धीर | 1962 – Sangeet Samrat Tansen – sakhi kaise dharoon main dheer

सखी कैसे धरूँ मैं धीर हाय रे मेरे अब लो श्याम ना आए री बहे नैनों से निसदिन नीर हाय रे मेरे अब लो श्याम ना आए री सखी कैसे धरूँ मैं धीर घिर-घिर श्याम घटा लहराए बेदर्दी की याद दिलाए उनबिन मुरली कौन सुनाए ठाड़ी रोऊँ मैं जमुना के तीर हाय रे मेरे अब … Continue reading →

१९५२ – संस्कार – जीनेवाले ओ मतवाले ज़िंदगी से प्यार कर | 1952 – Sanskaar – jeenewale o matwale zindagi se pyar kar

जीनेवाले ओ मतवाले, ज़िंदगी से प्यार कर, प्यार कर यूँ न बैठ ज़िंदगी में ज़िंदगी से हार कर, प्यार कर जीनेवाले मूरख ना डर, देख अँधेरा होगा कभी तो सवेरा रंज-ओ-ग़म से ज़िंदगी के रूप का सिंगार कर, प्यार कर जीनेवाले ओ मतवाले, ज़िंदगी से प्यार कर, प्यार कर जीनेवाले जो दुख भी आए तो … Continue reading →

१९५२ – संस्कार – अँधी क़िस्मत किसे ले चलेगी कहाँ | 1952 – Sanskaar – andhi qismat kise le chalegi kahan

अँधी क़िस्मत किसे ले चलेगी कहाँ, हाय, कोई जाने ना ग़म के हाथों किसे बेच देगी कहाँ, हाय, कोई जाने ना हाय, कोई जाने ना, किस गड़ी घेर ले ग़म की काली बदली किसके सर जाने कब फट पड़े आसमाँ, हाय, कोई जाने ना बचके चलते हैं सब, ज़िंदगी की डगर फिर भी मुश्किल हैं … Continue reading →