Songs of Shailendra::
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Salil Chowdhury

This category contains 78 posts

१९६५ – पूनम की रात – तुम कहाँ ले चले हो | 1965 – Poonam Ki Raat – tum kahan le chale ho

तुम कहाँ ले चले हो, सजन अलबेले ये कौनसा जहाँ है बताओ तो, बताओ तो ये सफ़र अनजाना, ये प्यार की हैं राहें ज़रा संग मेरे तुम आओ तो, तुम आओ तो तुम कहाँ ले चले हो तुमने आँखों से क्या जादू डाला मन मेरा हुआ मतवाला, सजन तुमने आँखों से क्या जादू डाला मन … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – सपनों में मेरे | 1965 – Poonam Ki Raat – sapnon mein mere

सपनों में मेरे कोई आए-जाए झलकी दिखाए और छुप जाए कुछ ना बोले देखो मेरा मन, हाय रे हाय, वो लेके चला जाए रे जाए सपनों में मेरे कोई आए-जाए मन के नगर में आया है कोई ख़ुशियाँ-ही-ख़ुशियाँ लाया है कोई वो मेरा दिल, हाय रे हाय, लुभाता चला जाए रे जाए सपनों में मेरे … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – भोले पिया | 1965 – Poonam Ki Raat – bhole piya

भोले पिया, जाने क्या तुमने किया खो गया मोरा जिया मिलता नहीं मेरा नन्हा-सा जिया हर कहीं ढूँढ़ लिया भोले पिया लाज की मारी मैं चुप-चुप हूँ कहूँ तो जाके कासे कहूँ राह में देखा एक अलबेला और अलबेले ने धोखा दिया भोले पिया … दिन ना बीते अँधेरा ना हो रात आए तो सवेरा … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – ता दीम ताना दीम | 1965 – Poonam Ki Raat – ta deem tana deem

ता दीम ताना दीम, ता दीम दीम दीम कह दो कोई बेदर्दी से जाके कहता है जो आज का मौसम ता दीम ताना दीम, ता दीम दीम दीम ज़िंदगी है दो दिन की, पलछिन की जवानी तू तो न होगा, तेरी रह जाएगी कहानी तेरी एक नज़र में था क्या असर तुझे क्या पता, तुझे … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – दिल तड़पे तड़पाए | 1965 – Poonam Ki Raat – dil tadpe tadpaye

दिल तड़पे, तड़पाए जिनके मिलन को तरसे, वो तो न आए मौसम आए-जाए दिल तड़पे, तड़पाए सपने तो खो गए करके दीवाना मुझे करनी पे अपने दिल की पड़ा पछताना मुझे ख़ुद को मना लूँ, दुखड़े छुपा लूँ दिल की लगी हाय कौन बुझाए दिल तड़पे, तड़पाए सपनों के साथी मेरे दमभर को आजा घायल … Continue reading →

१९६५ – पूनम की रात – साथी रे, तुझबिन जिया उदास रे | 1965 – Poonam Ki Raat – saathi re, tujh bin jiya udaas re

साथी रे, साथी रे तुझबिन जिया उदास रे, ये कैसी अनबुझ प्यास रे आजा, आ आ, आ आ, आ आ दोनों जहाँ से दूर यहाँ मैं भटक रही हूँ जाने कहाँ मैं साथी रे … ना मैं काया ना मैं छाया फिर क्यूँ डोले मन भरमाया साथी रे … प्यार की मैं अनबूझ कहानी कुछ … Continue reading →

१९५४ – नौकरी – अर्ज़ी हमारी ये मर्ज़ी हमारी | 1954 – Naukri – arzi hamari ye marzi hamari

अर्ज़ी हमारी, ये मर्ज़ी हमारी जो सोचे बिना ठुकराओगे, देखो बड़े पछताओगे दिल ही हमारा बचा न बेचारा, तो किस पे ये तीर चलाओगे देखे हैं तुम्हारे सपने, सोची हैं तुम्हारी बातें देखा है वो चँदा जबसे, आँखों में गुज़ारी रातें रुनझुन मन में धूम मचाके, हौले-हौले आके ये आग लगाके जो और कहीं चले … Continue reading →

१९६० – परख – मेरे मन के दिये | 1960 – Parakh – mere man ke diye

मेरे मन के दिये, मेरे मन के दिये यूँही घुट-घुटके जल तू, मेरे लाडले, ओ मेरे लाडले ख़ाक हो जाएँ हम प्यार के नाम पर प्यार की राह में रौशनी तो रहे मेरे मन के दिये … आग के फूल आँचल में डाले हुए कबसे जलता है वो आसमाँ देख ले मेरे मन के दिये … Continue reading →

१९६० – परख – ये बँसी क्यूँ गाए | 1960 – Parakh – ye bansi kyun gaye

ये बंसी क्यूँ गाए, मुझे क्यूँ सताए ये क्या धुन सुनाए, दूर न जाने काहे मुझको बुलाए, हाय बंसी क्यूँ गाए ये बंसी नदिया के तीर मोहे देखके अकेली मुझको सिखाने आई प्रीत-पहेली जिया उलझाए, मोहे ललचाए, कित जाऊँ, हाय बंसी क्यूँ गाए … हो बंसी बस में ना दिल ना ये नैन हमारे बचपन … Continue reading →

१९६० – परख – क्या हवा चली बाबा रुत बदली | 1960 – Parakh – kya hawa chali baba rut badli

क्या हवा चली, बाबा, रुत बदली क्या हवा चली, रे बाबा, रुत बदली शोर है गली-गली, सौ-सौ चूहे खायके बिल्ली हज को चली क्या हवा चली … पहले लोग मर रहे थे भूख से अभाव से अब कहीं ये मर न जाएँ अपनी खाव-खाव से मीठी बात कडवी लगे, गालियाँ भली क्या हवा चली … … Continue reading →