Songs of Shailendra::
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Rafi

This category contains 89 posts

१९६५ – गुमनाम – जान-पहचान हो, जीना आसान हो | 1965 – Gumnaam – jaan pehchan ho jeena aasan ho

जान-पहचान हो, जीना आसान हो दिल को चुरानेवालो आँख ना चुराओ, नाम तो बताओ जान-पहचान हो, जीना आसान हो आज की ये शाम जवाँ, यूँ ना चली जाए फिर से ना आएगी ये किसीके बुलाए जान-पहचान हो, जीना आसान हो … बोलो या ना बोलो तुम, हो गए इशारे सीधी-सीधी चोट हुई दिल पे हमारे … Continue reading →

१९६२ – एक दिल सौ अफ़्साने – तुम ही तुम हो मेरे जीवन में | 1962 – Ek Dil Sau Afsane – tum hi tum ho mere jeewan mein

तुम-ही-तुम हो मेरे जीवन में फूल-ही-फूल हैं जैसे चमन में एक हो मेरे तुम इस जहाँ में एक है चँदा जैसे गगन में तुम ही तुम हो तुम मिले मुझे नया जहान मिल गया झूमती ज़मीं को आसमान मिल गया तुम ही तुम हो … तुमसे दिल का चैन है, तुम्हीं से है क़रार तुम … Continue reading →

१९६२ – दिल तेरा दीवाना – दिल तेरा दीवाना है सनम | 1962 – Dil Tera Diwana – dil tera deewana hai sanam

बिजली गिराके आप ख़ुद बिजली से डर गए हम सादगी पे आपकी, लिल्लाह मर गए हाय, हाय, हाय दिल तेरा दीवाना है सनम, दिल तेरा दीवाना है सनम जानते हो तुम, कुछ ना कहेंगे हम जानते हो तुम, कुछ ना कहेंगे हम मोहब्बत की क़सम? मोहब्बत की क़सम प्यार के अलबेले ये हमसफ़र, चल देंगे … Continue reading →

१९६२ – दिल तेरा दीवाना – जान-ए-वफ़ा जान-ए-जहाँ जान-ए-तमन्ना | 1962 – Dil Tera Diwana – jaan-e-wafa jaan-e-jahan jaan-e-tamanna

जान-ए-वफ़ा, जान-ए-जहाँ, जान-ए-तमन्न कहूँ तू ही बता ऐ अजनबी, आख़िर तुझे क्या कहूँ मैं प्यार की नन्ही कली, तुम चाहे जो नाम दो तुम कौन हो क्या नाम है, तुम भी ज़रा कुछ कहो मेरा नाम प्यार है, मैंने दुनिया को दी ज़िंदगी जीनेवाले मेरे नाम पर रहते हैं ज़िंदा मरके भी मैं प्यार की … Continue reading →

१९६२ – दिल तेरा दीवाना – मुझे कितना प्यार है तुमसे | 1962 – Dil Tera Diwana – mujhe kitna pyar hai tumse

मुझे कितना प्यार है तुमसे, अपने-ही दिल से पूछो तुम जिसे दिल दिया है वो तुम हो, मेरी ज़िंदगी तुम्हारी है चाहत ने तेरी मुझको कुछ इस तरह से घेरा दिन को हैं तेरे चर्चे, रातों को ख़्वाब तेरा तुम हो जहाँ वहींपर रहता है दिल भी मेरा बस एक ख़याल तेरा, क्या शाम क्या … Continue reading →

१९६२ – दिल तेरा दीवाना – रिक्शे पे मेरे तुम आ बैठे | 1962 – Dil Tera Diwana – riskhe pe mere tum aa baithe

रिक्शे पे मेरे तुम आ बैठे, अब मेरा हुनर देखो देता है मज़े कैसे-कैसे अपना ये सफ़र देखो रिक्शे पे तुम्हारे आ बैठी, ख़ुशियाँ हैं जिधर देखो ले पहुँची मुझे किस दुनिया में, चाहत की लहर देखो रिक्शे पे मेरे तुम आ बैठे … दुलकी चलूँ मैं, सरपट चलूँ मैं, हर चाल है निराली निकलूँ … Continue reading →

१९५८ – डिटेक्टिव – कल तलक हम ठीक था | 1958 – Detective – kal talak hum theek tha

कल तलक हम ठीक था, आज हमें क्या हो गया दिल भी हमको छोड़के, क्या पराया हो गया कल तलक हम ठीक था, आज हमें क्या हो गया ये मचलती रात आधी, मौसम बेक़रार छुप गया क्यूँ छेड़कर तू मेरे दिल के तार हम इधर है जागता, तुम उधर क्या सो गया दिल भी हमको … Continue reading →

१९५८ – डिटेक्टिव – छोड़िये ग़ुस्सा हुज़ूर | 1964 – Detective – chhodiye gussa huzoor

छोड़िए ग़ुस्सा हुज़ूर, ऐसी नाराज़ी भी क्या हमने तो जो कुछ किया, दिल के कहने पर किया आपकी मर्ज़ी है, अब जो चाहे दीजिए सज़ा छोड़िए ग़ुस्सा हुज़ूर, ऐसी नाराज़ी भी क्या सीने के पार कर दो, तिरछी नज़र का तीर हम चुप हैं लो पहना भी दो ज़ुल्फ़ों की ये ज़ंजीर यूँ भी घायल … Continue reading →

१९५८ – डिटेक्टिव – आ जा कर ले मुक़ाबला | 1958 – Detective – aa ja kar le muqabla

आजा कर ले मुक़ाबला, ये बाज़ी प्यार की हो जाए आज फ़ैसला, ये बाज़ी प्यार की कहती हूँ मान जा, ऐ नादाँ मान जा उल्फ़त के खेल में ख़तरा है जान का, हो हो जा जा जा जा जा जा जा आजा कर ले मुक़ाबला … चाल मेरी मस्तानी, हर क़दम मेरा तूफ़ानी यहाँ भी … Continue reading →

१९५८ – डिटेक्टिव – आँखों पे भरोसा मत कर | 1958 – Detective – ankhon pe bharosa mat kar

आँखों पे भरोसा मत कर, दुनिया जादू का खेल है हर चीज़ यहाँ एक धोखा, हर बात यहाँ बेमेल है ओ मतवाले, हँस ले गा ले, ले जीने का मज़ा इस दुनिया की भीड़ में तू, मेरी तरह नन्हा बन जा आँखों पे भरोसा मत कर, दुनिया जादू का खेल है हर चीज़ यहाँ एक … Continue reading →