Songs of Shailendra::
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Manna

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१९६१ – सपन सुहाने – नाम मेरा निम्मो, मुकाम लुधियाना | 1961 – Sapan Suhane – naam mera nimmo, mukaam ludhiyana

नाम मेरा निम्मो, मुकाम लुधियाना संग लिए डोलूँ मैं प्यार का खज़ाना हो रहूँगी तेरी, ला दिल नज़राना यूँही रे यूँही तू मत ललचाना आहा रे, आह झूमती नवेली, आहा रे, आहा नार अलबेली आहा रे, आहा प्यार की पहेली, आहा रे, आहा नार अलबेली आहा आहा आहा आहा आहा नाम मेरा निम्मो, मुकाम लुधियाना … Continue reading →

१९५९ – अनाड़ी – 1956 1957 1958 1959 | 1959 – Anari – 1956 1957 1958 1959

१९५६, १९५७, १९५८, १९५९ दुनिया का ढांचा बदला, क़िस्मत का सांचा बदला आँखें तो खोलो ज़रा, लाला हो कहाँ ताज निराले, राज निराले, जीवन के सारे साज़ निराले महफ़िल-महफ़िल घूम धरतीके जाएँ, अंबर पे छाएँ फैलाके बाँहें चँदा बुलाए आ तारों को चूम 1959, 1959, 1959 1956, 1957, 1958, 1959 कल की कहानी हो गई … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले | 1955 – Basant Bahar – ketki gulab juhi champak ban phuule

केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले रितु बसंत, अपनो कंत गोरी गरवा लगाए झुलना में बैठ आज पी के संग झूले केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले गल-गल कुंज-कुंज, गुन-गुन भँवरों की गुंज राग-रंग अंग-अंग, छेड़त रसिया अनंग कोयल की पंचम सुन दुनिया दुख भूले केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले मधुर-मधुर थोरी-थोरी, मीठी बतियों … Continue reading →

१९६० – उसने कहा था – चलते ही जाना | 1960 – Usne Kaha Tha – chalte hi jaana

चलते ही जाना, हो चलते ही जाना जहाँ तक आज ये राह चले कहो कि जग सारा, हमारा है हमारा ये प्यारे-प्यारे नीलगगन के तले चलते ही जाना … न बँधके रहेंगे, न दबके रहेंगे जहाँ भी रहेंगे ये मतवाले हिम्मतवाले, ज़माने से निराले दिलों के शहज़ादे, ये दिलवाले हमीं से उजियारा, है ये जग … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – हम भी हैं तुम भी हो | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – hum bhi hain tum bhi ho

है आग हमारे सीने में, हम आग से खेलते आते हैं टकराते हैं जो इस ताक़त से, वो मिट्टी में मिल जाते हैं तुमसे तो पतंगा अच्छा है, जो हँसते हुए जल जाता है वो प्यार में मिट तो जाता है, पर नाम अमर कर जाता है हम भी हैं, तुम भी हो, दोनों हैं … Continue reading →

१९६६ – तीसरी क़सम – चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे | 1966 – Teesri Kasam – chalat musafir moh liya re

चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया उड़-उड़ बैठी हलवैया दोकनिया बर्फ़ी के सब रस ले लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया उड़-उड़ बैठी बजजवा दोकनिया कपड़ा के सब रस ले लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया उड़-उड़ बैठी पनवडिया दोकनिया बीडा के सब रस ले लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया chalat musaafir … Continue reading →

१९५५ – श्री ४२० – दिल का हाल सुने दिलवाला | 1955 – Shree 420 – dil ka haal sune dilwala

दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी-सी बात, न मिर्च-मसाला कहके रहेगा कहनेवाला दिल का हाल सुने दिलवाला छोटे-से घर में ग़रीब का बेटा मैं भी हूँ माँ के नसीब का बेटा रंज-ओ-ग़म बचपन के साथी आँधियों में जली जीवनबाती धूप ने है बड़े प्यार से पाला दिल का हाल सुने दिलवाला … हाय करूँ क्या … Continue reading →

१९५५ – श्री ४२० – प्यार हुआ इक़रार हुआ है | 1955 – Shree 420 – pyar hua iqrar hua hai

प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहता है दिल, रस्ता मुश्किल, मालूम नहीं है कहाँ मंज़िल प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहो कि अपनी प्रीत का गीत न बदलेगा कभी तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी प्यार जो … Continue reading →

१९६२ – संगीत सम्राट तानसेन – मितवा लौट आए री | 1962 – Sangeet Samrat Tansen – mitwa laut aaye ri

मितवा लौट आए री आज मेरो जियरा क्यूँ न गाए शुभ दिन दर्शन पाए मितवा लौट आए री नैना जो थे नीर भरे पिया को देख फिर से मुस्काए आए री, आए री, आए मितवा लौट आए री दिवला दे बुझाए कोई जादू प्रीत की ज्योत जगाए आए री, आए री, आए मितवा लौट आए … Continue reading →

१९६२ – संगीत सम्राट तानसेन – सुध बिसर गई आज | 1962 – Sangeet Samrat Tansen – sudh bisar gayi aaj

सुध बिसर गई आज अपने गुणन की आई गई बात बीते दिनन की बिखरे सपन सारे, विधना से हम हारे अँसुओं में डूबी हैं पलकें नयन की सुध बिसर गई आज अपने गुणन की जियरा के दो टूक, गई प्रेरणा रूठ घुट-घुट गई सूख सरिता सुरन की सुध बिसर गई आज अपने गुणन की … … Continue reading →