Songs of Shailendra::
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1960s

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१९६८ – कहीं और चल – पानी पे बरसे जब पानी | 1968 – Kahin Aur Chal – pani pe barse jab pani

पानी पे बरसे जब पानी, जब हों फ़िज़ाएँ दीवानी फिर तो ऐसे मौसम में, करता है दिल भी नादानी कुछ ढूँढ़ती हैं दो आँखें, कुछ खोजता है मन मेरा वो कौन है कहाँ पर है, जिसके ख़याल ने घेरा पानी पे बरसे जब पानी … बिजली चमक-चमककर क्यूँ हमें मुँह-चिढ़ाए जाती है नटखट इशारे कर-करके … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – परवानों की राह में दीवानों की चाह में | 1962 – Hariyali Aur Rasta – parwanon ki raah mein deewanon ki chaah mein

परवानों की राह में, दीवानों की चाह में जलूँ और जलाऊँ, मोहब्बत निभाऊँ मेरा बस यही काम है लाख कहूँ मैं दिलवालो इधर ना आना पास से गुज़रो तो दामन बचाके जाना मैं मीठी तपन हूँ, मचलती अगन हूँ नहीं है ये दिन, शाम है परवानों की राह में … शाम से ही मेरी दुनिया … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – बोल मेरी तक़्दीर में क्या है मेरे हमसफ़र | 1962 – Hariyali Aur Rasta – bol meri taqdeer mein kya hai mere humsafar

बोल मेरी तक़्दीर में क्या है, मेरे हमसफ़र अब तो बता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता कहाँ है मेरे प्यार की मंज़िल, तू बतला, तुझको है पता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता जहाँ हम आके पहुँचे हैं, वहाँ से लौटकर जाना नहीं मुमकिन, मगर मुश्किल है दुनिया से भी … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – लाखों तारे आसमान में | 1962 – Hariyali Aur Rasta – laakhon taare aasman mein

लाखों तारे आसमान में, एक मगर ढूँढ़े ना मिला देखके दुनिया की दीवाली, दिल मेरा चुपचाप जला लाखों तारे आसमान में, एक मगर ढूँढ़े ना मिला क़िस्मत का है नाम मगर, है काम ये दुनियावालों का फूँक दिया है चमन हमारे ख़्वाबों और ख़यालों का जी करता है, ख़ुद ही घोंट दें अपने अरमानों का … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – एक था राजा एक थी रानी, आओ सुनाऊँ | 1962 – Hariyali Aur Rasta – ek tha raja ek thi rani, aao sunaoon

एक था राजा, एक थी रानी आओ सुनाऊँ उनकी कहानी थे वो बचपन के साथी, एक दूजे के दीवाने खेला करते थे मिलकर, मिलकर गाते थे गाने दिन थे वो उजले, रातें सुहानी, आओ सुनाऊँ उनकी कहानी एक था राजा, एक थी रानी आओ सुनाऊँ उनकी कहानी वो उड़े बादलों के संग, वो इंद्रधनुष पे … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – बोल मेरी तक़्दीर में क्या है | 1962 – Hariyali Aur Rasta – bol meri taqdeer mein kya hai

बोल मेरी तक़्दीर में क्या है, मेरे हमसफ़र अब तो बता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता कहाँ है मेरे प्यार की मंज़िल, तू बतला, तुझको है पता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता जहाँ हम आके पहुँचे हैं, वहाँ से लौटकर जाना नहीं मुमकिन, मगर मुश्किल है दुनिया से भी … Continue reading

१९६२ – हरियाली और रास्ता – तेरी याद दिलसे भुलाने चला हूँ | 1962 – Hariyali Aur Rasta – teri yaad dil se bhulane chala hoon

तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ कि ख़ुद अपनी हस्ती मिटाने चला हूँ तेरी याद दिल से भुलाने चला हूँ घटाओ तुम्हें साथ देना पड़ेगा मैं फिर आज आँसू बहाने चला हूँ तेरी याद दिल से … कभी जिस जगह ख़्वाब देखे थे मैंने वहीं ख़ाक अपनी उड़ाने चला हूँ तेरी याद दिल से … Continue reading

१९६६ – गबन – तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए | 1966 – Gaban – tumhari qasam tum bahut yaad aaye

मैं हर रात जागी कि इस बार शायद मोहब्बत तुम्हें इस तरफ़ खींच लाए तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए न पूछो, ये दिन हमने कैसे बिताए तुम्हारी क़सम तुम बहुत याद आए बरसने लगे शब तो क्या नींद आए उधर कडके बिजली, इधर जान जाए न पूछो, ये दिन हमने … ज़रा एक नज़र … Continue reading

१९६६ – गबन – आए रे दिन सावन के | 1966 – Gaban – aaye re din sawan ke

आए रे दिन सावन के, सावन के बलम तेरे आवन के, आवन के आए रे दिन सावन के तेरे प्यार का जोग लिया, मोहे लोग कहें दीवानी घर-घर की इस कहा-सुनी में, मैं बन गई कहानी आए रे दिन सावन के … दो नैनों के दीप जलाए, जागूँ सारी रैना कैसे लागे नैन पिया जब, … Continue reading

१९६६ – तीसरी क़सम – चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे | 1966 – Teesri Kasam – chalat musafir moh liya re

चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया उड़-उड़ बैठी हलवैया दोकनिया बर्फ़ी के सब रस ले लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया उड़-उड़ बैठी बजजवा दोकनिया कपड़ा के सब रस ले लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया उड़-उड़ बैठी पनवडिया दोकनिया बीडा के सब रस ले लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया चलत मुसाफ़िर मोह लिया रे पिंजड़ेवाली मुनिया chalat musaafir … Continue reading