Songs of Shailendra::
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1950s

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१९५३ – माशूक़ा – ये समाँ हम-तुम जवाँ | 1953 – Maashuqa – ye sama hum tum jawan

ये समाँ, हम-तुम जवाँ, पहलू से दिल सरक जाए ये प्यार की टेढ़ी गली, अब छोड़ी न जाए, हाय रे हाय मिल जाए गर तुझसे नज़र, नन्हा-सा दिल धड़क जाए ये प्यार की टेढ़ी गली, अब छोड़ी न जाए, हाय रे हाय भीगी-भीगी ये चाँदनी रात आँखों-ही-आँखों में जाए रे मैं कुछ कहूँ दिल कुछ … Continue reading

१९५३ – माशूक़ा – झिलमिल तारे करें इशारे | 1953 – Maashuqa – jhilmil tare karen ishare

झिलमिल तारे करें इशारे, सो जा, सो जा, सो जा राजदुलारे बन अलबेली नार नवेली निंदिया, निंदिया आई नैन-दुवारे मतलब की अँधी ये दुनिया, कैसे हमें पहचाने दिल के टुकड़े मेरे, दिल के दर्द को तू ही जाने सब कोई सोवे, पर हम रोवें, जागें जागें, जागें ग़म के मारे सुंदर सपने देख मगर, तू … Continue reading

१९५३ – माशूक़ा – मेरा बचपन वापस आया | 1953 – Maashuqa – mera bachpan wapas aaya

मेरा बचपन वापस आया, बलैयां लूँ मैं बार-बार हो गल-बैय्यां डार मुस्काया, बलैयां लूँ मैं बार-बार, हो अपना सबकुछ देके, लाल मैं तेरी ख़ैर मनाऊँ नज़र ना लागे दुनिया की, तुझे पलकों में मैं छुपाऊँ मेरी गोदी में सब जग आया, बलैयां लूँ मैं बार-बार, हो तू में दिन का सूरज, रात को चँदा की … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – तू माने या न माने बलम अनजाने | 1956 – Kismat Ka Khel – tu mane ya na mane balam anjane

तू माने या न माने, बलम अनजाने बेदर्द तेरे लिए नाचे मेरी ज़िंदगी नाचे मेरी ज़िंदगी जब भी हो तेरा-मेरा सामना मुश्किल हो जाए दिल को थामना तू माने या न माने … मेरा तन-मन घेरे खड़े हो फिर क्यूँ नज़रें फेरे खड़े हो तू माने या न माने … ले चले कहाँ दिल को … Continue reading

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – प्यार कर ले नहीं तो फाँसी चढ़ जाएगा | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – pyar kar le nahin to phansi chadh jayega

प्यार कर ले, नहीं तो फाँसी चढ़ जाएगा यार कर ले, नहीं तो यूँ-ही मर जाएगा प्यार कर ले जीते-हारे सैंकडों, तीर से तलवार से मेरे साथ मुस्कुरा, दिल को जीत प्यार से विचार कर ले, नहीं तो पीछे पछताएगा प्यार कर ले … चोरी करी, चोर बना, रोज़ नई घात है आज तेरी ज़िंदगी … Continue reading

१९५७ – कठपुतली – हाय तू ही गया मोहे भूल रे | 1957 – Kathputli – haay tu hi gaya mohe bhool re

हाय तू ही गया मोहे भूल रे मैं हूँ तेरे जीवन की रागिनी हाय तू ही गया मोहे भूल रे तेरे नग़्मे तारे बनकर चमके सबके प्यारे बनकर हाय तू ही गया … फिर से ऐसा राग सुना रे झूम उठें ये ग़म के मारे हाय तू ही गया … haay tuu hii gayaa mohe … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – अर्ज़ है आपसे | 1956 – Kismat Ka Khel – arz hai aap se

अर्ज़ है आपसे, आपसे, और आपसे भी भेद की बात है, अपनों से कही जाती है बालम आएगा, आएगा चिट्ठी आई, ऐतवार की शाम तलक आ जाएगा, आएगा चाहे ग़ैरों को इसका यक़ीं हो न हो मेरा दिल कह रहा था कि आएँगे वो पहली-पहली मुलाक़ात की वो क़सम भूलकर भी नहीं भूल पाएँगे वो … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – चलो ले चलूँ मैं तारों में | 1956 – Kismat Ka Khel – chalo le chaloon main taaron mein

चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में चाँद से उतरी प्यार की पुतली, मैं तुम्हारी गुलबदन बिखरे सपने, खोए नग़्मे, लाई तुम्हारी गुलबदन चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में ना ऐसे ग़म हैं, ना ये सितम हैं, नीलम के उस देश में सब के साथ प्यार की बात होती है … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले | 1956 – Kismat Ka Khel – na bure na bhale ham gareeb gham ke pale

ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले तुम क्या जानो हस्ती हमारी, राजा, तुम क्या जानो हस्ती हमारी लाडली ज़िंदगी अपने आँसुओं में ढली तुम क्या जानो ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले तुम क्या जानो हस्ती हमारी, राजा, तुम क्या जानो हस्ती हमारी हमारी भी गली में मुस्कुराए चाँदनी … Continue reading

१९५६ – क़िस्मत का खेल – क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली | 1956 – Kismat Ka Khel – qismat ka khel hai janab-e-aali

क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली आपके पास हैं मोती-ख़ज़ाने और अपनी जेब ख़ाली, जेब ख़ाली, जेब ख़ाली निकले बाज़ार से वो मुस्कुराते, बढ़के हर चीज़ पे बोली लगाते हमने गर्दन झुका ली, हाँ झुका ली, लो झुका ली क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली हमको भी ढूँढ़ती क़िस्मत हमारे घर पे आई लेकिन हम सोए थे … Continue reading