Songs of Shailendra::
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Amarendra R N

Amarendra R N has written 570 posts for शैलेंद्र के गीत | Songs of Shailendra

१९६५ – गाइड – वहाँ कौन है तेरा | 1965 – Guide – wahan kaun hai tera

वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ दम ले-ले घड़ीभर, ये छैंया पाएगा कहाँ वहाँ कौन है तेरा बीत गए दिन, प्यार के पलछिन, सपना बनीं वो रातें भूल गए वो, तू भी भुला दे प्यार की वो मुलाक़ातें सब दूर अँधेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ दम ले-ले घड़ीभर, ये छैंया पाएगा कहाँ वहाँ कौन है … Continue reading →

१९६५ – गुमनाम – आएगा कौन यहाँ | 1965 – Gumnaam – aayega kaun yahan

आएगा कौन यहाँ, किसको सदाएँ देता है दिल अपना है कौन यहाँ, किसको सदाएँ देता है दिल प्यार का धोखा, ख़्वाब सुहाना देखा था जो कभी आज उसीकी याद से लिपटी, रोती है ज़िंदगी दुश्मन है सारा जहाँ, किसको सदाएँ देता है दिल आएगा कौन यहाँ मेरे दिल के एक कोने में जलता था जो … Continue reading →

१९६५ – गाइड – पिया तोसे नैना लागे रे | 1965 – Guide – piya tose naina lage re

पिया तोसे नैना लागे रे, नैना लागे रे जाने क्या हो अब आगे रे, नैना लागे रे पिया तोसे नैना लागे रे जग ने उतारे, धरती पे तारे, पर मन मेरा मुरझाए, हाय उनबिन आली, कैसी दीवाली, मिलने को जिया उकलाए आ सजन पायल पुकारे, झनक झन-झन झनक झन-झन पिया तोसे नैना लागे रे … … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – जिन रातों की भोर नहीं है | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – jin raton ki bhor nahin hai

जिन रातों की भोर नहीं है, आज ऐसी ही रात आई बोझ से ग़म के डूब गया दिल, सागर की है गहराई रात के तारो, तुम ही बता दो, मेरी वो मंज़िल है कहाँ पागल बनकर जिसके लिए मैं खो बैठा हूँ दोनों जहाँ जिन रातों की भोर नहीं है, आज ऐसी ही रात आई … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – छोड़ मेरी बैंया बलम | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – chhod meri bainya balam

आह! छोड़ मेरी बैंया, बलम बेईमान आते-जाते देख लेगा कोई छुईमुई जैसी नन्ही-सी मेरी जान आते-जाते देख लेगा कोई छोड़ मेरी बैंया आहा! निकली थी लेने बलम बगिया से फूल बातों-बातों में तेरी, राह गई भूल हाय रे, मैं आई कहाँ, छूटा घर मेरा वहाँ उड़ती है दूर जहाँ, भेदभरी धूल लागे डर मुझको यहाँ, … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – ओ जग के रखवाले | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – o jag ke rakhwale

ओ जग के रखवाले, हमें तुझबिन कौन सँभाले ओ जग के रखवाले जित देखूँ, देखूँ अँधियारा, घायल मन घबराए जैसे अँधी रात में पँछी राह भूल दुख पाए चहुं-ओर हैं बादल काले हमें तुझबिन कौन सँभाले, ओ जग के रखवाले एक आस अब तुमसे भगवन, एक ही द्वार तुम्हारा बाँह बढ़ाके हमें उठा लो, तुमही … Continue reading →

१९६२ – एक दिल सौ अफ़्साने – सुनो जी सुनो हमारी भी सुनो | 1962 – Ek Dil Sau Afsane – suno ji suno hamari bhi suno

सुनो जी सुनो, हमारी भी सुनो अजी मेहरबान, हमारी भी सुनो ना टप्पा ना ठुमरी, ग़ज़ल है ना कजरी ये रागिनी है प्यार की सुनो जी सुनो, हमारी भी सुनो तराना हमारा, ज़माने से न्यारा हर एक सुर में दिल है धड़कता हुआ हर एक बोल प्यारा, कि जैसे सितारा अकेला गगन में चमकता हुआ … Continue reading →

१९६२ – एक दिल सौ अफ़्साने – मस्त नज़र देख इधर हम हैं वही दिलवाले | 1962 – Ek Dil Sau Afsane – mast nazar dekh idhar hum hain wohi dilwale

मस्त नज़र, देख इधर, हम हैं वही दिलवाले इश्क़ में जो देते हैं जाँ, हम हैं वही मतवाले देखा ये हुस्न जबसे, मेरा दिल ही खो गया है मेरे दोस्त पूछते हैं, क्या तुमको हो गया है मस्त नज़र, देख इधर … ग़ैरों से हँसके बातें, हमसे नज़र चुराना मुझे मार ही न डाले, तेरा … Continue reading →

१९६२ – एक दिल सौ अफ़्साने – तुम ही तुम हो मेरे जीवन में | 1962 – Ek Dil Sau Afsane – tum hi tum ho mere jeewan mein

तुम-ही-तुम हो मेरे जीवन में फूल-ही-फूल हैं जैसे चमन में एक हो मेरे तुम इस जहाँ में एक है चँदा जैसे गगन में तुम ही तुम हो तुम मिले मुझे नया जहान मिल गया झूमती ज़मीं को आसमान मिल गया तुम ही तुम हो … तुमसे दिल का चैन है, तुम्हीं से है क़रार तुम … Continue reading →

१९६२ – एक दिल सौ अफ़्साने – दूर के ओ चँदा, आ मेरी बाँहों में आ | 1962 – Ek Dil Sau Afsane – door ke o chanda, aa meri banhon mein aa

दूर के ओ चँदा, आ मेरी बाँहों में आ दिल में रौशनी कर, आँखों में तू मुस्कुरा दूर के ओ चँदा, आ मेरी बाँहों में आ घर-घर सावन बरसे है प्यासी ममता तरसे है बिन तेरे, मेरा आँगन सूना-सूना दूर के ओ चँदा … बोली-भाली आँखों में इन मतवाली आँखों में झिलमिल रे जीवन का … Continue reading →