ना रो भई ना रो भई ना रो भई ना मैं तेरा बंदर डुग-डुग नाचूँ, ना रो मेरी जाँ ना रो भई ना रो भई ना रो भई ना कहीं चली ना जाए मेरी नौकरी, ना रो मेरी जाँ साहब तो दफ़्तर में हैं अरे नौ सौ झगड़े घर में हैं लो मैं रोया, मुझीं … Continue reading →
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