Songs of Shailendra::
archives

Sohrab Modi

This tag is associated with 2 posts

१९५६ – राज हठ – चले सिपाही धूल उड़ाते | 1956 – Raj Hath – chale sipahi dhool udaate

चले सिपाही धूल उड़ाते, कहाँ किधर कोई क्या जाने कोई कहे ये जलते दीपक, कोई कहे ये परवाने चले सिपाही जीवन की ये अँधी आँधी अपनी राह न देखे किस झोंके में उजड़ जाएगी किसकी चाह, न देखे चले सिपाही धूल उड़ाते, कहाँ किधर कोई क्या जाने चले सिपाही बढ़ते क़दम जहाँ ले जाएँ, तेरा … Continue reading

१९५६ – राज हठ – प्यारे बाबुल से बिछड़के | 1956 – Raj Hath – pyare babul se bichhadke

प्यारे बाबुल से बिछड़के, घर का आँगन सूना करके गोरी कहाँ चली, घूँघट में चाँद छुपाए सुनो कहती है शहनाई, गोरी हो गई पराई चंचल घोड़े पे सवार, लेने साजना आए सूने महल उदास अटारी, रूठी-रूठी-सी फुलवारी दिल में तड़प चेहरे पे हँसी है, हाय लगी ये कैसी कटारी बाबुल काहे को छुपाए, दर्द होंठों … Continue reading