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Shyamal Mitra

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१९५८ – मुसाफ़िर – एक आए एक जाए मुसाफ़िर | 1958 – Musafir – ek aaye ek jaye musafir

एक आए, एक जाए मुसाफ़िर, दुनिया एक सराए रे एक आए, एक जाए मुसाफ़िर अलबेले अरमानों के तूफ़ान लेकर आए नादन सौ बरस के सामान लेकर आए और धूल उड़ाता चला जाए एक आए, एक जाए मुसाफ़िर, दुनिया एक सराए रे एक आए, एक जाए मुसाफ़िर दिल की ज़ुबाँ अपनी है, दिल की नज़र भी … Continue reading