कभी आज, कभी कल, कभी परसों ऐसे ही बीते बरसों हमारी सुनते ही नहीं साजना देखो जी, सुनते ही नहीं साजना डाल पे फूल और फूलों पे भँवरे, दिनभर सौ-सौ खेल करें तड़पें-तरसें हमीं अकेले, छुप-छुप ठण्डी आह भरें बीती जाए देखो हाय ये जवानी, ये दिलों की कहानी हमारी सुनते ही नहीं साजना देखो … Continue reading