Songs of Shailendra::
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Shankar-Jaikishan

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१९६७ – अराउंड द वर्ल्ड – जोश-ए-जवानी हाय रे हाय निकले जिधर से | 1967 – Around The World – josh-e-jawani haay re haay nikale jidhar se

जोश-ए-जवानी हाय रे हाय निकले जिधर से धूम मचाए दुनिया का मेला, मैं हूँ अकेला कितना अकेला हूँ मैं शाम का रंगीं शोख़ नज़ारा और बेचारा ये दिल ढूँढके हारा कोई सहारा पर ना मिली मंज़िल जोश-ए-जवानी हाय रे हाय … कोई तो हमसे दो बात करता कोई तो कहता हलो घर ना बुलाता, पर … Continue reading

१९६२ – असली नक़ली – कल की दौलत आज की ख़ुशियाँ | 1962 – Asli Naqli – kal ki daulat aaj ki khushiyan

कल की दौलत आज की ख़ुशियाँ उनकी महफ़िल अपनी गलियाँ असली क्या नक़्ली क्या है, पूछो दिल से मेरे तोड़के झूठे नाते-रिश्ते आया मैं दिलवालों में सच कहता हूँ, चोर थे ज़्यादा दौलत के रखवालों में कल की दौलत आज की ख़ुशियाँ … उस दुनिया ने बात न पूछी, इस दुनिया ने प्यार दिया बैठा … Continue reading

१९६२ – असली नक़ली – तेरा मेरा प्यार अमर | 1962 – Asli Naqli – tera mera pyar amar

तेरा-मेरा प्यार अमर फिर क्यूँ मुझको लगता है डर मेरे जीवनसाथी बता क्यूँ दिल धड़के रह-रहकर क्या कहा है चाँद ने, जिसको सुनके चाँदनी हर लहर पे झूमके, क्यूँ ये नाचने लगी चाहत का है हरसू असर फिर क्यूँ मुझको लगता है डर तेरा-मेरा प्यार अमर … कह रहा है मेरा दिल, अब ये रात … Continue reading

१९६४ – आई मिलन की बेला – आहा आई मिलन की बेला देखो आई | 1964 – Ayee Milan Ki Bela – aha aayi milan ki bela dekho aayi

आहा आई मिलन की बेला देखो आई बनके फूल हर कली मुस्कुराई अहा आई मिलन की बेला देखो आई उनसे नैन मिले मैं शरमाई आहा आई मिलन की बेला जाने क्यूँ तेज़ हुई जाती है दिल की धड़कन चुटकियाँ लेती है क्यूँ सीने में मीठी-सी चुभन प्यार जो करते हैं होता है यही हाल उनका … Continue reading

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ऐ दिलबर दिलवाले प्यार पे मरनेवाले | 1958 – Baaghi Sipahi – ae dilbar dilwale pyar pe marnewale

ऐ दिलबर दिलवाले, प्यार पे मरनेवाले दिल की लगी यूँ न बुझी, आग से आग बुझा ले ऐ दिलबर दिलवाले दूर-दूर-दूर से ये खेल किस काम के देख-देख-देख जानाँ, दामन को थामके छेड़के साज़-ए-दिल को, फिर वो तराना गा ले दिल की लगी यूँ न बुझी, आग से आग बुझा ले ऐ दिलबर दिलवाले झूम-झूम-झूमके … Continue reading

१९६३ – अपने हुए पराए – अपने हुए पराए क़िस्मत ने क्या दिन दिखलाए | 1963 – Apne Huye Paraye – apne huye paraye qismat ne kya din dikhlaye

अपने हुए पराए क़िस्मत ने क्या दिन दिखलाए कुछ सोचो और कुछ हो जाए हाय रे धीरज कौन बँधाए अपने हुए पराए अँधी जो तक़्दीर न होती, तो इतनी बेपीर न होती दिल पर इतना बोझ न होता, पैरों में ज़ंजीर न होती अपने हुए पराए … जिन राहों से कोई न आए, बैठे उनपे … Continue reading

१९६३ – अपने हुए पराए – बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में | 1963 – Apne Huye Paraye – bahar banke vo muskuraye hamare gulshan mein

बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में बाद-ए-सबा तू न आए तो क्या, काली घटा तू न छाए तो क्या बहार बनके वो मुस्कुराए हमारे गुलशन में मेरे दिल की राहों पे मेरे संग-संग आ तुझको दिखला दूँ मैं हमदम अपना रंगोंभरी दुनिया मेरी, मेरा प्यार पहला बाद-ए-सबा तू न आए तो क्या, काली घटा … Continue reading

१९६३ – अपने हुए पराए – गगन के चँदा न पूछ हमसे | 1963 – Apne Huye Paraye – gagan ke chanda na poochh hum se

गगन के चँदा न पूछ हमसे, कहाँ हूँ मैं दिल मेरा कहाँ है किसीके चाहत में खो गए हम, ना अपना दिल है, ना अपनी जाँ है गगन के चँदा नज़र से नज़र मिलके शरमा रही है, हर एक राज़ झुककर कहे जा रही है घड़ी ये मोहब्बत के इक़रार की है, रुत प्यार की … Continue reading

१९६२ – आशिक़ – झनन झनझनाके अपनी पायल | 1962 – Aashiq – jhanan jhanjhanake apni paayal

झनन झनझनाके अपनी पायल, चली मैं आज मत पूछो कहाँ छम-छम अपनी डगर चलूँगी, जो भी रोके मैं ना रुकूँगी मैं सावन की चंचल नदिया, बँधके रही ना बंधके रहूँगी झनन झनझनाके अपनी पायल, चली मैं आज मत पूछो कहाँ अपनी उमंगों में लहराऊँ, गीत किसीके गाती जाऊँ धरती को बाँहों में भर लूँ, झूमके … Continue reading