Songs of Shailendra::
archives

Shankar-Jaikishan

This tag is associated with 239 posts

१९५४ – बादशाह – रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे | 1954 – Badshah – rulakar chal diye ek din hansi bankar jo aaye the

रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे चमन रो-रोके कहता है, कभी गुल मुस्कुराए थे रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे अगर दिल के ज़ुबाँ होती, ये ग़म कुछ कम तो हो जाता उधर वो चुप, इधर सीने में हम तूफ़ाँ छुपाए थे ये अच्छा था न हम … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – दुनिया न भाए मोहे अब तो बुला ले | 1955 – Basant Bahar – duniya na bhaye mohe ab to bula le

दुनिया ना भाए मोहे, अब तो बुला ले चरणों में, चरणों में तेरे चरणों में, चरणों में मेरे गीत मेरे संग-सहारे कोई ना मेरा संसार में दिल के ये टुकड़े कैसे बेच दूँ दुनिया के बाज़ार में मन के ये मोती रखियो तू सँभाले चरणों में, चरणों में तेरे चरणों में, चरणों में सात सुरों … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – सुर ना सजे क्या गाऊँ मैं | 1955 – Basant Bahar – sur na saje kya gaaoon main

सुर ना सजे, क्या गाऊँ मैं सुर के बिना जीवन सूना सुर ना सजे, क्या गाऊँ मैं दोनों जहाँ मुझसे रूठे तेरे बिना ये गीत भी झूठे सुर ना सजे … जलते गया जीवन मेरा इस रात का न होगा सवेरा सुर ना सजे … संगीत मन को पंख लगाए गीतों से रिमझिम रस बरसाए … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – भयभंजना वंदना सुन हमारी | 1955 – Basant Bahar – bhaybhanjana vandana sun hamari

भय-भंजना वंदना सुन हमारी दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी भय-भंजना गीतों के फूलों की माला बनाकर लाया हूँ दिल आरती में सजाकर ये साँसों की सरगम करूँ तेरे अर्पण तुझे और क्या दूँ, मैं ठहरा भिखारी दरस तेरे माँगे ये तेरा पुजारी भय-भंजना आजा मधुर स्वप्न-सी मुस्कुराती मन के बुझे दीप हँसकर जलाती जपे … Continue reading →

१९५५ – बसंत बहार – जा-जा रे जा बालमवा | 1955 – Basant Bahar – ja ja re ja balamawa

जा जा रे जा बालमवा सौतन के संग रात बिताई काहे करत अब झूठी बतियाँ जा जा रे जा बालमवा ग़ैर के घर करी रात-जगाई मोसे कहे तेरे बिना नींद ना आई कैसो हरजाई दैय्या जा जा रे जा बालमवा … काँधे लगा लाई बिंदिया किसीकी जानूँ मैं चुराई तूने निंदिया किसीकी लाज ना आई … Continue reading →

१९५४ – बादशाह – गुल मुस्कुरा उठा बुलबुल ये गा उठा | 1954 – Badshah – gul muskura utha bulbul ye gaa utha

गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ गई बहार दुल्हन के जैसी नई ज़िंदगी का आज ये पहला दिन है ख़ुशीका मौसम ये प्यार का, साज़-ओ-सिंगार का बाग़ों में आ गई बहार गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ … Continue reading →

१९५८ – बाग़ी सिपाही – चिंचना पापुल छुई-मुई मुझे छू न लेना | 1958 – Baaghi Sipahi – chinchana papul chhui mui mujhe chhoo na lena

चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल छुईमुई मैं, छू न लेना, मुझे छू न लेना आँख से आँख मिली, जाम पे जाम चले, मुफ़्त बदनाम हुए हम तेरी ये शोख़ नज़र, ठण्डी आहों का असर, तुझे पहचान गए हम चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल लेके मेरा दिल जाँ न लेना, मुझे छू न लेना … Continue reading →

१९५८ – बाग़ी सिपाही – मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार | 1958 – Baaghi Sipahi – maan bhi le ae dil too apni ye haar

मान भी ले ऐ दिल तू अपनी ये हार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले ऐ दिल नए रंग लेके उतरती है शाम, जाने क्यूँ बनती-सँवरती है शाम आ हम भी सपनों की दुनिया सँवार लें झूम-झूम गाए ये पागल बहार किया नहीं जाता, हो जाता है प्यार मान भी ले … Continue reading →

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ओ बेरहम, तेरे सितम हम पे होंगे कब तक | 1958 – Baaghi Sipahi – o beraham tere sitam hum pe honge kab tak

ओ बेरहम, तेरे सितम हमपे होंगे कब तक, देखेंगे हम ये रौशनी जलती रहे, जान भी जाए तो हमें होगा ना ग़म वो देख आँसुओं से ज़ख़्म धो रही है ज़िंदगी वो ख़ाक होके बीज नए बो रही ज़िंदगी सिवा ख़ुदाके और की ना होगी हमसे बंदगी ये कहके देख ज़ार-ज़ार रो रही है ज़िंदगी … Continue reading →

१९५८ – बाग़ी सिपाही – समाँ ये प्यार का बहार के ये मेले | 1958 – Baaghi Sipahi – sama ye pyar ka bahar ke ye mele

समाँ ये प्यार का, बहार के ये मेले, ऐसे में निकलो ना झूमके अकेले दिन में भी आजकल डर है दिलों के चोर का दिल को जी हम तो उछालते चलेंगे, बहके निगाह तो सँभालते चलेंगे हमपे चलता नहीं जादू नज़र की डोर का समाँ ये प्यार का, बहार के ये मेले आप हमारे लिए … Continue reading →