Songs of Shailendra::
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Shankar-Jaikishan

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१९५३ – शिकस्त – जब-जब फूल खिले | 1953 – Shikast – jab jab phool khile

जब-जब फूल खिले, तुझे याद किया हमने जब-जब फूल खिले देख अकेला हमें, हमें घेर लिया ग़म ने जब-जब फूल खिले मन को मैंने लाख मनाया पर अब तो है वो भी पराया ज़ख्म किए नासूर, तेरी याद के मरहम ने जब-जब फूल खिले मिलने के हैं लाख बहाने लेकिन मन का मीत न माने … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – कारे बदरा तू न ज न जा | 1953 – Shikast – kare badra tu na ja na ja

कारे बदरा तू न जा, न जा बैरी तू बिदेस न जा घननन मेघ-मल्हार सुना रिमझिम रस बरसा जा सनन-सनन हाय पवन झकोरा बुझती आग जलाए मन की बात नयन में आए, मुख से कही न जाए कारे बदरा तू न जा … माथे क सिंदूर रुलावे, लट नागिन बन जाए लाख रचाऊँ उन बिन … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – नई ज़िंदगी से प्यार करके देख १ | 1953 – Shikast – nayi zindagi se pyar karke dekh 1

नई ज़िंदगी से प्यार करके देख इसके रूप का सिंगार करके देख इसपे जो भी है निसार करके देख नई ज़िंदगी से प्यार करके देख सच कभी तो होंगे ख़्वाब और ख़याल, तेरे ख़्वाब और ख़याल कब तलक रहेंगे बेकसी के जाल, दिल पे बेकसी के जाल वक़्त सुन चुका है तेरे दिल का हाल, … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – नई ज़िंदगी से प्यार करके देख २ | 1953 – Shikast – nayi zindagi se pyar karke dekh 2

नई ज़िंदगी से प्यार करके देख इसके रूप का सिंगार करके देख इसपे जो भी है निसार करके देख नई ज़िंदगी से प्यार करके देख नींद से धरती को जो जगाएगा, ज़मीं को जो जगाएगा बीज आँसुओं के जो बिछाएगा, जो मेहनतें लुटाएगा फूल उसके आँगन में मुस्कुराएगा, मुस्कुराएगा और चार दिन गुज़ार करके देख … Continue reading

१९५३ – शिकस्त – सपनों की सुहानी दुनिया को | 1953 – Shikast – sapnon ki suhani duniya ko

सपनों की सुहानी दुनिया को आँखों में बसाना मुश्किल है अपनों पे जताना मुश्किल है, ग़ैरों से छुपाना मुश्किल है मेरा बचपन बीत गया है, दिल का लड़कपन बाक़ी है मैं अपने-आप को समझा लूँ, पर दिल को मनाना मुश्किल है अहसान तेरा कैसे भूलूँ, तेरे ग़म के सहारे ज़िंदा हूँ वरना इन जाती सांसों … Continue reading

१९६१ – रूप की रानी चोरों का राजा – ऐसी ही है अगर मर्ज़ी तेरी | 1961 – Roop Ki Rani Choron Ka Raja – aisi hi agar marzi hai teri

ऐसी ही अगर मर्ज़ी है तेरी, अरमानों में आग लगा देंगे हम अपना आप मिटा देंगे ऐसी ही अगर मर्ज़ी है तेरी, तेरे प्यार में जान गँवा देंगे उनमें से नहीं हम ऐ हमदम, है जिनके लबोंपर झूठी क़सम इस दिल में बसे हो तुम ही तुम, हम चीरके दिल दिखला देंगे ऐसी ही अगर … Continue reading

१९६१ – रूप की रानी चोरों का राजा – जाओ ना सताओ रसिया | 1961 – Roop Ki Rani Choron Ka Raja – jao na satao rasiya

चाँद गया, तारे गए, गई मिलन की रात पाँव पड़ूँ, जाओ पिया, छोड़ो हमरा हाथ जाओ ना सताओ रसिया तुम संग जागी सारी रैना जाओ ना सताओ रसिया कभी दिल में बलखाऊँ मैं, घड़ीभर फिर पछताऊँ मैं कि छल गए तेरे मीठे बैना जाओ ना सताओ रसिया सजन मैं सोचूँ खड़ी-खड़ी, कहाँ मोरी बिंदिया जाए … Continue reading

१९६१ – रूप की रानी चोरों का राजा – तोमार-आमार प्रेमेरी जोवा | 1961 – Roop Ki Rani Choron Ka Raja – tomar aamar premeri jowa

तोमार-आमार प्रेम जोवा, उथाली-पाथाली रे, शीमा जाने ना कहाँ जाते हैं वो, कहाँ जाते हैं बहकी नज़र किसको ख़बर, प्यार के राही कहाँ जाते हैं नया सफ़र नई डगर, जाने क्यूँ क़दम डगमगाते हैं कहाँ जाते हैं वो, कहाँ जाते हैं तोमार-आमार प्रेम जोवा, उथाली-पाथाली रे, शीमा जाने ना मदभरी निगाह ने लूट लिया दिल … Continue reading

१९६४ – संगम – ओ मेरे सनम | 1964 – Sangam – o mere sanam

ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम दो जिस्म मगर एक जान हैं हम, एक दिल के दो अरमान हैं हम ओ मेरे सनम, ओ मेरे सनम तन सौंप दिया, मन सौंप दिया, कुछ और तो मेरे पास नहीं जो तुमसे है मेरे हमदम, भगवान से भी वो आस नहीं जिस दिन से हुए एक दूजे … Continue reading

१९६१ – रूप की रानी चोरों का राजा – तुम तो दिल के तार छेड़कर | 1961 – Roop Ki Rani Choron Ka Raja – tum to dil ke taar chhedkar

तुम तो दिल के तार छेड़कर, हो गए बेख़बर चाँद के तले जलेंगे हम, ऐ सनम, रातभर तुम तो दिल के तार छेड़कर, हो गए बेख़बर तुमको नींद आएगी, तुम तो सो ही जाओगे किसका ले लिया है दिल, ये भी भूल जाओगे ये तो कह दो एक बार, ख़्वाब में तो आओगे तुम तो … Continue reading