Songs of Shailendra::
archives

Shakeela

This tag is associated with 1 post

१९५३ – आग़ोश – आग छिड़क गई चाँदनी | 1953 – Aagosh – aag chhidak gai chandani

आग छिड़क गई चाँदनी मेरे गोरे बदन पे, मेरे कोमल मन पे हाय, आज मैं जर गई, जर गई, जर गई रे लहरों के संग छम-छम नाचे किरनों की जोड़ियाँ धीरे-से कोई खींचे दिल के पर्दों की डोरियाँ झूमके क्या कहता है आसमाँ, न समझे मेरे साजना हाय, आज मैं जर गई, जर गई, जर … Continue reading