Songs of Shailendra::
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Salil Chowdhury

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१९५४ – नौकरी – छोटा-सा घर होगा | 1954 – Naukri – chhota sa ghar hoga

छोटा-सा घर होगा बादलों की छाँव में आशा दीवानी मन में बँसुरी बजाए हम ही हम चमकेंगे तारों के उस गाँव में आँखों की रौशनी हरदम ये समझाए चाँदी की कुर्सी पे बैठे मेरी छोटी बहना सोने के सिंघासन पे बैठे मेरी प्यारी माँ मेरा क्या मैं पड़ा रहूँगा अम्मीजी के पाँव में आ आ … Continue reading →

१९५८ – मुसाफ़िर – लागी नाही छूटे राम चाहे जिया जाए | 1958 – Musafir – laagi naahi chhute raam, chaahe jiya jaye

लागी नाही छूटे राम, चाहे जिया जाए मन अपनी मस्ती का जोगी, कौन इसे समझाए कौन इसे समझाए, रामा लागी नाही छूटे रामा, चाहे जिया जाए तारों में मुस्कान है तेरी, चाँद तेरी परछाँईं उतने गीत हैं जितनी रातें हमने साथ बिताईं कैसे बोलूँ रे साँवरिया, करूँ मैं कौन उपाय चाहे जिया जाए रिमझिम-रिमझिम बुँदियाँ … Continue reading →

१९५८ – मुसाफ़िर – एक आए एक जाए मुसाफ़िर | 1958 – Musafir – ek aaye ek jaye musafir

एक आए, एक जाए मुसाफ़िर, दुनिया एक सराए रे एक आए, एक जाए मुसाफ़िर अलबेले अरमानों के तूफ़ान लेकर आए नादन सौ बरस के सामान लेकर आए और धूल उड़ाता चला जाए एक आए, एक जाए मुसाफ़िर, दुनिया एक सराए रे एक आए, एक जाए मुसाफ़िर दिल की ज़ुबाँ अपनी है, दिल की नज़र भी … Continue reading →

१९५८ – मुसाफ़िर – मुन्ना बड़ा प्यारा अम्मी का दुलारा | 1958 – Musafir – munna bada pyara ammi ka dulara

मुन्ना बड़ा प्यारा, अम्मी का दुलारा कोई कहे चाँद, कोई आँख का तारा हँसे तो भला लगे, रोए तो भला लगे अम्मी को उसके बिना कुछ भी अच्छा न लगे जियो मेरे लाल, जियो मेरे लाल तुमको लगे मेरी उमर, जियो मेरे लाल मुन्ना बड़ा प्यारा, अम्मी का दुलारा कोई कहे चाँद, कोई आँख का … Continue reading →

१९५८ – मुसाफ़िर – मन रे हरि के गुण गा | 1958 – Musafir – man re, hari ke gun gaa

हरि के गुण गा, मन रे, हरि के गुण गा उन संग प्रीत लगा, मन रे मन रे, हरि के गुण गा जिनके जपे अहल्या तर गई, भवसागर के पार उतर गई सन्मुख शीश झुका, मन रे मन रे, हरि के गुण गा जिनके जपे अमर भई मीरा, नाम उजागर कर गई मीरा लौ उनसे … Continue reading →

१९६४ – मेम दीदी – बेटा वाओ वाओ वाओ, मेरे कान मत खाओ | 1964 – Mem Didi – beta wow wow, mere kaan mat khao

बेटा वाओ वाओ वाओ, मेरे कान मत खाओ सोने की कटोरी में चलके दूध-भात खाओ बेटा वाओ वाओ वाओ आज मैं छुईमुई लड़की, बहू बनूँगी बड़े घर की होगा तू दरबान मेरा, रानी मैं रूपनगर की बेटा वाओ वाओ वाओ … लंच-डिनर पे हरदिन रहेगा आना-जाना खाएँगे हम बिर्यानी, और तू बिस्कुट खाना बेटा वाओ … Continue reading →

१९६४ – मेम दीदी – हु तू तू तू | 1964 – Mem Didi – hu tu tu tu

हु तू तू तू, तू तू, हु तू तू तू, तू हम तो घर में चूल्हा फूँकें, मज़े करे तू हु तू तू तू, तू तू, हु तू तू तू, तू हम तो लड़ें ज़िंदगी से, हमसे लड़े तू हु तू तू तू, तू ढोल बाजे, ताशे बाजे और बाजी शहनाई बाबुल की मैं लाडली … Continue reading →

१९६४ – मेम दीदी – भुला दे ज़िंदगी के ग़म | 1964 – Mem Didi – bhula de zindagi ke gham

भुला दो ज़िंदगी के ग़म, तराना छेड़ो प्यार का कि आ रहा है, आ रहा है कारवाँ बहार का कली-कली से कह दो, हमसे मुस्कुराना सीख ले कहाँ है भँवरा, आके हमसे गुनगुनाना सीख ले ये दिन है सारी ज़िंदगी में सिर्फ़ एक बार का कि आ रहा है, आ रहा है कारवाँ बहार का … Continue reading →

१९६४ – मेम दीदी – रातों को जब नींद उड़ जाए | 1964 – Mem Didi – raton ko jab neend ud jaye

रातों को जब नींद उड़ जाए, घड़ी-घड़ी याद कोई आए किसी भी सूरत से बहले ना दिल तब क्या किया जाए, बोलो क्या किया जाए ये तो प्यार का रोग है, रोग बुरा जिसे एक दफ़ा ये लगा सो लगा चँदा को देख आग लग जाए, तन्हाई में चाँदनी न भाए ठण्डी हवाओं में काँपे … Continue reading →

१९६४ – मेम दीदी – मैं जानती हूँ | 1964 – Mem Didi – main janati hoon

मैं जानती हूँ, तुम झूठ बोलते हो फिर भी कहो अजी फिर से कहो, तुमको मुझसे प्यार है तुम जानती हो, मैं सच बोलता हूँ फिर भी सुनो लो फिर से सुनो, मुझको तुमसे प्यार है मैं जानती हूँ आँखों में झाँको मेरे सपनों की रानी पढ़के तो देखो मेरे दिल की कहानी मैं जानती … Continue reading →