Songs of Shailendra::
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Roshan

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१९५९ – हीरा मोती – नाच रे धरती के प्यारे | 1959 – Heera Moti – nach re dharti ke pyare

नाच रे धरती के प्यारे, तेरे अरमानों की दुनिया समने है तेरे आज तेरे घर होने को हैं फिर ख़ुशियों के फेरे धान की बाली, ये हरियाली कहती है तुझसे रे जैसे-तैसे कट गई ग़म की रात काली गली-गली शोर है, आएगी दीवाली कड़ी मेहनत की फ़सल, अपने धीरज का ये फल, मीठा लागे रे … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – छम छम छम छम गीत सुनाए | 1959 – Deep Jalta Rahe – chham chham chham chham geet sunaye

छम छम छम छम गीत सुनाए मेरी पायल गाए दिन आए मिलन के, बालमा खींच बुलाए बाहर कोई, आँगन में मेरा जी ना लगे हो जाऊँगी आज मैं उनकी, जिन संग मेरे नैन लगे जिया लहराए, मेरे बस में न आए दिन आए मिलन के, बालमा छम छम छम छम गीत सुनाए ऊदे रे ऊदे … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान | 1959 – Deep Jalta Rahe – dekho ji ras le gayo bhanwra beiman

देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान बेचारी कली क्या करे छोटी-सी जान देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान नई-नवेली, दिन थे बहार के बाग़ में थी वो अकेली, कि हाय राम, बाग़ में थी वो अकेली बाली उमर में कोई क्या जाने क्या है प्रीत पहेली, कि हाय राम, क्या है प्रीत पहेली … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – ना रो भई ना रो भई | 1959 – Deep Jalta Rahe – na ro bhai na ro bhai

ना रो भई ना रो भई ना रो भई ना मैं तेरा बंदर डुग-डुग नाचूँ, ना रो मेरी जाँ ना रो भई ना रो भई ना रो भई ना कहीं चली ना जाए मेरी नौकरी, ना रो मेरी जाँ साहब तो दफ़्तर में हैं अरे नौ सौ झगड़े घर में हैं लो मैं रोया, मुझीं … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – एक दौर नया दुनिया में शुरु हुआ | 1959 – Deep Jalta Rahe – ek daur naya duniya mein shuru hua

एक दौर नया दुनिया में शुरु बच्चों के क़दम से होगा बदनाम हो जिससे देश अपना, वो काम ना हमसे होगा ये राम और श्रीकृष्ण की धरती, धरती बुद्ध महान की युग-युग से इस मिट्टी ने अगवाई की इन्सान की ये देश है अर्जुन-भीम का, राणा प्रताप-से वीर का कुछ करके दिखाएँगे हम भी, कुछ … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – डाली पे बैठी थी दस चिड़ियाँ | 1959 – Deep Jalta Rahe – daali pe baithi thi das chidiyan

डाली पे बैठी थीं दस चिड़ियाँ एक उड़ गई फुर्र से न जाने कहाँ तो रह गई डाली पे कितनी चिड़ियाँ, कितनी चिड़ियाँ नौ चिड़ियाँ, हाँ नौ चिड़ियाँ उड़ते-उड़ते चिड़िया पहुँची कमला नेहरू पार्क में जहाँ पे हँसती थी हर क्यारी फूलोंवाली फ़्राक में कमला नेहरू पार्क की निराली शान-बान बच्चो तुमने देखा है वो … Continue reading

१९५७ – कॉफ़ी हाउस – जवाँ ये ज़िंदगी ये प्यार का समाँ | 1957 – Coffee House – jawan ye zindagi ye pyar ka sama

जवाँ ये ज़िंदगी, ये प्यार का समाँ ओ मेरे दिलबर, कहाँ है तू कहाँ पलकें बिछाए मैं खड़ी हूँ कबसे अरमान जगाए मैं खड़ी हूँ कबसे ये आग-सी लगाए खड़ी हूँ कबसे जवाँ ये ज़िंदगी … ताज के लिए ना तलवार के लिए मेरा दिल है मेरे दिलदार के लिए जान-ए-मन जाँ निसार तेरे प्यार … Continue reading

१९५४ – चाँदनी चौक – बहक चले मेरे नैनवा | 1954 – Chandni Chowk – behak chale more nainwa

बहक चले मेरे नैनवा हाय, न जाने कैसी चली हवा क्यूँ न लगी कल रात को पलक, मुझे ये क्या हो गया हाय, मुझे ये क्या हो गया आँचल से मेरा हाथ हटे ना, नैन रहें मेरे झुके-झुके खड़ी रहूँ दर्पन के आगे, उलझी लट ना सुलझ सके मुझ-ही को मेरे हाल पे शर्माना कोई … Continue reading

१९५४ – चाँदनी चौक – जितने भी हैं ग़म ग़लत कर डाल | 1954 – Chandni Chowk – jitne bhi hain gham ghalat kar daal

ऐ ज़म ऐ ज़म ऐ ज़म ज़ी जितने-भी ग़म हैं, ग़लत कर डाल कि दुनिया है दो दिन की सारे जहाँ की बहारें, प्यार से तेरा ही नाम पुकारें झूमके पी ले मय उल्फ़त के जाम की ऐ ज़म ऐ ज़म … चाँद, हवा, ये सितारे, देखो हमारे हैं आज हमारे प्यार में जी ले, … Continue reading

१९५४ – चाँदनी चौक – दिल की शिकायत नज़र के शिकवे | 1954 – Chandni Chowk – dil ki shikayat nazar ke shikwe

दिल की शिकायत नज़र के शिकवे, एक ज़ुबाँ और लाख बयाँ छुपा सकूँ ना दिखा सकूँ, मेरे दिल के दर्द भी हुए जवाँ चाँद हँसा, तारे चमके, और मस्त हवा जब इठलाई छुपती फिरी न जाने क्यूँ मैं, जाने क्यूँ मैं शरमाई तेरे सिवा है कौन जो समझे क्या गुज़री मुझपे यहाँ छुपा सकूँ ना … Continue reading