Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९५४ – अमानत – मेरी वफ़ाएँ तुम्हारी जफ़ाएँ | 1954 – Amaanat – meri vafayein tumhari jafayein

मेरी वफ़ाएँ, तुम्हारी जफ़ाएँ आँसू लिखेंगे फ़साना मेरे प्यार का हाय रे हाय रे, जान क्यूँ ना जाए रे क्या रखा है जीने में, जलते आँसू पीने में हाय रे हाय रे, जान क्यूँ ना जाए रे मेरी वफ़ाएँ हमें क्या ख़बर थी, बदल जाओगे तुम किसी और के होके तड़पाओगे तुम मेरा तड़पना, तेरा … Continue reading →

१९५२ – अनहोनी – मेरे दिल की धड़कन क्या बोले क्या बोले | 1952 – Anhonee – mere dil ki dhadkan kya bole

मेरे दिल की धड़कन क्या बोले? क्या बोले? मैं जानूँ और तू जाने, मैं जानूँ और तू जाने मेरा प्यारभरा मन क्यूँ डोले? क्यूँ डोले? मैं जानूँ और तू जाने, मैं जानूँ और तू जाने चली गई रात मदभरी हवाओं की डोली पे होके सवार दे गई चाँद की परी निगाहों को सपनों का पागल … Continue reading →

१९६० – अनुराधा – हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए | 1960 – Anuradha – haay re wo din kyun na aaye

हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए जा-जाके ऋतु लौट आए हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए झिलमिल वो तारे, कहाँ गए सारे मन-बाती जले, बुझ जाए हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए … सूनी मेरी बीना संगीत बिना सपनों की माला मुरझाए हाय रे वो दिन क्यूँ ना आए … haay re … Continue reading →

१९६० – अनुराधा – जाने कैसे सपनों में खो गईं | 1960 – Anuradha – jane kaise sapnon mein kho gayin

जाने कैसे सपनों में खो गईं अँखियाँ मैं तो हूँ जागी, मोरी सो गईं अँखियाँ अजब दीवानी भईं, मोसे अनजानी भईं पल में पराई देखो हो गईं अँखियाँ मैं तो हूँ जागी, मोरी सो गईं अँखियाँ जाने कैसे सपनों में … बरसी ये कैसी धारा, काँपे तन-मन सारा रंग से अंग भिगो गईं अँखियाँ मैं … Continue reading →

१९५३ – आग़ोश – मिल-जुल के काटो लोगो ग़रीबी के फंदे | 1953 – Aagosh – miljul ke kaato logo garibi ke phande

मिलजुलके काटो ग़रीबी के फंदे मिलजुलके काटो रे लोगो, दुख-सुख बाँटो रे बड़ी दयावान भाई बड़ी मेहेरबान है हम सब पे ये धरतीमाता, धरतीमाता सोने की खान कहीं गेहूं कहीं धान रे हम सबकी ये अन्नदाता, धरतीमाता फिर भी आसमाँ के तले, काहे भूख-प्यास पले दुख-सुख बाँटो रे मिलजुलके काटो … जीवन के सागर में … Continue reading →

१९५३ – आग़ोश – बाँसुरिया काहे बजाई | 1953 – Aagosh – baansuriya kaahe bajaai

बाँसुरिया काहे बजाई, बिन सुने रहा नहीं जाए रे मीठी नज़र काहे मिलाई, बिन देखे रहा नहीं जाए रे बाँसुरिया काहे बजाई, बिन सुने रहा नहीं जाए रे जाने-अनजाने जब मुख पे किसीके आए तेरा नाम सरसे सरक जाए चुनरी, सहेली करे बदनाम होवे रे हमरी जगतहँसाई, रे कान्हा बाँसुरिया काहे बजाई … हँस-हँस जादू … Continue reading →

१९५३ – आग़ोश – हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी | 1953 – Aagosh – ho dheere dheere chadh gaya nadiya mein paani

हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी हो धीरे-धीरे कोई कहे तूफ़ान उठा, कोई कहे रे आई जवानी हो धीरे-धीरे चढ़ गया नदी में पानी हो धीरे-धीरे दिल में बैठा कोई दिल की धड़कन गिनता जाए मेरे मन के भेद चुराकर अपने भेद छुपाए जो-जो मेरी प्रीत बढ़े, मैं होती जाऊँ दीवानी हो धीरे-धीरे चढ़ … Continue reading →

१९५३ – आग़ोश – आग छिड़क गई चाँदनी | 1953 – Aagosh – aag chhidak gai chandani

आग छिड़क गई चाँदनी मेरे गोरे बदन पे, मेरे कोमल मन पे हाय, आज मैं जर गई, जर गई, जर गई रे लहरों के संग छम-छम नाचे किरनों की जोड़ियाँ धीरे-से कोई खींचे दिल के पर्दों की डोरियाँ झूमके क्या कहता है आसमाँ, न समझे मेरे साजना हाय, आज मैं जर गई, जर गई, जर … Continue reading →

१९५७ – अब दिल्ली दूर नहीं – राम लीला | 1957 – Ab Dilli Door Nahin – raam leela

हमरे मनोरथ पूरे करना रघुपति राघव राजाराम रघुपति राघव राजाराम तुम चाहो तो पलभर में बन जाएँ अपने बिगड़े काम रघुपति राघव राजाराम रघुवर के गुण गावे रे, हम रघुवर के गुण गावे रे बोलो सियापति रामचंद्र की जय सोने के हिरन के पीछे गए, क्यूँ राम अभी तक आए नहीं नारी का मन कोमल … Continue reading →

१९५७ – अब दिल्ली दूर नहीं – मालिक तेरे जहान में इतने बड़े जहान में | 1957 – Ab Dilli Door Nahin – maalik tere jahan mein itne bade jahan mein

मालिक तेरे जहाँ में, इतने बड़े जहाँ में कोई नहीं हमारा, कोई नहीं हमारा अब किसके द्वार जाऊँ, दुख में किसे बुलाऊँ सब कर गए किनारा, कोई नहीं हमारा मलिक तेरे जहाँ में इस हाल में भी देखो ठुकरा रही है दुनिया हम पर बनी तो हामसे कतरा रही है दुनिया ना आस ना दिलासा, … Continue reading →