Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९५४ – बूट पालिश – चली कौनसे देश गुजरिया | 1954 – Boot Polish – chali kaun se deh gujariya

चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके जाऊँ पिया के देश, ओ रसिया मैं सज-धजके चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके छलके मात-पिता की अँखियाँ रोवे तेरे बचपन की सखियाँ भैया करे पुकार भैया करे पुकार, न जा घर-आँगन तजके जाऊँ पिया के देश, ओ रसिया मैं सज-धजके चली कौनसे देश, गुजरिया तू सज-धजके दूर देश … Continue reading

१९५४ – बूट पालिश – नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी | 1954 – Boot Polish – nanhe munne bachche teri

नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है मुट्ठी में है तक़्दीर हमारी हमने क़िस्मत को बस में किया है भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है भोली-भाली मतवाली आँखों में क्या है आँखों में झूमे उम्मीदों की दीवाली आनेवाली दुनिया का सपना सजा है नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में … Continue reading

१९५४ – बूट पालिश – ठहर ज़रा ओ जानेवाले | 1954 – Boot Polish – thaher zara o janewale

ठहर ज़रा ओ जानेवाले ठहर ज़रा ओ जानेवाले, बाबू मिस्टर गोरे काले कबसे बैठे आस लगाए, हम मतवाले पालिशवाले ये काली पालिश एक आना ये ब्राउन पालिश एक आना जूते की मालिश एक आना हर माल मिलेगा है एक आना ना है ना है ना पगड़ी है ना चोरी है छोटी-सी दूकान लगाए, हम मतवाले … Continue reading

१९५४ – बूट पालिश – तुम्हारे हैं तुमसे दया | 1954 – Boot Polish – tumhare hain tum se daya mangte hain

तुम्हारे हैं तुमसे दया माँगते हैं तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं यतीमों की दुनिया में हरदम अँधेरा इधर भूलकर भी न आया सवेरा किसी शाम को एक पलभर जले जो हम आशा का ऐसा दिया माँगते हैं तेरे लाडलों की दुआ माँगते हैं थे हम जिनकी आँखों के चंचल सितारे हमें छोड़ वो इस … Continue reading

१९५४ – भाई साहब – मंज़िल तो है बड़ी दूर | 1954 – Bhai Saheb – manzil to hai badi door

ऊँची-नीची ऊँची-नीची डगर जीवन की चलना सँभलके प्यारे, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर मंज़िल तो है बड़ी दूर, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर सूने सफ़र में लाखों चोर मिलेंगे तोहे, करनी करेंगे ज़रूर धर्म-कर्म की झोली कहाँ पे गँवाई तूने, पूछेंगे तेरे हुज़ूर संभलके चलना, मंज़िल तो है बड़ी दूर ऊँची-नीची … Continue reading

१९५५ – बसंत बहार – कर गया रे कर गया मुझपे जादू | 1955 – Basant Bahar – kar gaya re kar gaya mujhpe jadoo

कर गया रे, कर गया मुझपे जादू साँवरिया कर गया मुझपे जादू ये क्या किया रे, ग़ज़ब किया रे चोर को समझी मैं साधु साँवरिया कर गया मुझपे जादू भोली सुरतिया मगर है सयाना सीखे कोई वो से दामन बचाना वादा करके मुकर गया कर गया रे … तुम जो कहो तो मैं नाम बता … Continue reading

१९५५ – बसंत बहार – नैन मिले चैन कहाँ | 1955 – Basant Bahar – nain mile chain kahan

नैन मिले चैन कहाँ दिल है वहीं तू है जहाँ ये क्या किया सैंया साँवरे तूने ये क्या किया सैंया साँवरे चुप-चुप रहके लुटाया दिल तुझपे एक सुख पाया मैंने सौ दुख सहके, सौ दुख सहके दूर-दूर गली-गली अब तो बात फैल चली ये क्या किया सैंया साँवरे तूने ये क्या किया सैंया साँवरे कौनसे … Continue reading

१९५५ – बसंत बहार – बड़ी देर भई, कब लोगे ख़बर मोरे राम | 1955 – Basant Bahar – badi der bhayi, kab loge khabar more raam

बड़ी देर भई, बड़ी देर भई बड़ी देर भई, कब लोगे ख़बर मोरे राम चलते-चलते मेरे पग हारे, आई जीवन की शाम कब लोगे ख़बर मोरे राम बड़ी देर भई, बड़ी देर भई कहते हैं तुम हो दया के सागर, फिर क्यूँ ख़ाली मेरी गागर झूमे-झुके कभी ना बरसे, कैसे हो तुम घनश्याम हे राम, … Continue reading

१९५४ – भाई साहब – घेरता है गर अँधेरा | 1954 – Bhai Saheb – gherta hai gar andhera

घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर दो घड़ी में मुस्कराएगी सहर, तू ग़म न कर घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर ढल गया एक और दिन, अच्छा हुआ समझो ज़िंदगी जितनी कटी ग़म कम हुआ समझो शुक्र कर कुछ कम हुआ ज़िंदगानी का सफ़र घेरता है गर … Continue reading

१९५४ – बादशाह – रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे | 1954 – Badshah – rulakar chal diye ek din hansi bankar jo aaye the

रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे चमन रो-रोके कहता है, कभी गुल मुस्कुराए थे रुलाकर चल दिए एक दिन हँसी बनकर जो आए थे अगर दिल के ज़ुबाँ होती, ये ग़म कुछ कम तो हो जाता उधर वो चुप, इधर सीने में हम तूफ़ाँ छुपाए थे ये अच्छा था न हम … Continue reading