Songs of Shailendra::
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Lyrics

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१९५९ – मैं नशे में हूँ – मैंने तो नहीं पी | 1959 – Main Nashe Mein Hoon – main ne to nahin pi

मैंने तो नहीं पी, मैं साक़ी बनी थी पीने को तूने पी, क्यूँ नशा मुझे आया क्यूँ नशा मुझे आया दिखाकर सपनों की झलकी, भुला बैठे बातें कल की हमीं से अब कतराते हो, बड़े भोले बनते हो जी तुम्हारी जो कहानी है, हमारी भी कहानी है ये कैसी बेज़ुबानी है, ना बोले कुछ भी … Continue reading →

१९५५ – मदभरे नैन – आ पलकों में आ | 1955 – Madbhare Nain – aa palkon mein aa

आ, पलकों में आ, सपने सजा बेहोश रातों की निंदिया चुरा आ, पलकों में आ जिस रागिनी को भीगी हुई चाँदनी गा रही है मेरे धड़कते दिल से उसीकी सदा आ रही है आ, पलकों में आ … ये प्यास कैसी है, आकर ये जलते सितारों से पूछ ले बेचैनियाँ मेरी, हर पल मचलती बहारों … Continue reading →

१९५५ – मदभरे नैन – मन पंछी अलबेला | 1955 – Madbhare Nain – man panchhi albela

मन पंछी अलबेला, तारों की नगरी में जाए मत पूछो किसकी लाए खबरिया, मन पंछी अलबेला नई-नई पहचान है, उसका नाम ना जाना मैंने मैं कैसे कहूँ मेरा कौन साँवरिया मन पंछी अलबेला पाँव मेरे धरती पे, मेरी नज़र चाँद को चूमे मेरा आँचल उड़े हवाओं में, मेरा तन झूमे मन झूमे कैसी उलझी नजरिया … Continue reading →

१९५५ – मदभरे नैन – पहली ना दूसरी तीसरी पसंद है | 1955 – Madbhare Nain – pehli na doosri teesri pasand hai

पहली न दूसरी, तीसरी पसंद है शादी का कर दो इंतज़ाम, मेरी शादी का कर दो इंतज़ाम पूरबी न पश्चिमी, लछ्मी पसंद है शादी का कर दो इंतज़ाम, मेरी शादी का कर दो इंतज़ाम पहली न दूसरी, तीसरी पसंद है शादी का कर दो इंतज़ाम घर में तुम हँसो तो दिये के बिना हो रौशनी … Continue reading →

१९५९ – मधु – किसीको ना बताऊँगी | 1959 – Madhu – kisi ko na bataoongi

किसीको ना बताऊँगी, हो चोरी-चोरी जो दिल में समाया, वो कौन है जिसके बिन सूनी मेरी अँखियाँ जैसे चँदा के बिन रतियाँ जिसकी मैं बनी हूँ रे छाया, वो कौन है किसीको ना बताऊँगी … मीठी बतियों से जो भरमाए मोहे जग से दूर बुलाए गीत जिसका पपीहे ने गाया, वो कौन है किसीको ना … Continue reading →

१९५९ – मधु – बता दो कोई कौन गली गयो श्याम १ | 1959 – Madhu – bata do koi kaun gali gayo shyam 1

बता दो कोई, कौन गली गए श्याम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम झूठा धीरज आस दिलाकर, अचक-अचानक बाँह छुड़ाकर गए वो, हम रह गए यहाँ, दो टूक कलेजा थाम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम पलछिन-मात ज़माने बीते, शरद-बसंत सुहाने बीते बार-बार झुक पड़े … Continue reading →

१९५९ – मधु – काहे बनो जी अनजान जादू डारके | 1959 – Madhu – kahe bano ji anjan jadoo daarke

काहे बनो जी अनजान, जादू डारके जागूँ मैं सारी-सारी रात, जिया हारके काहे बनो जी अनजान, जादू डारके कोई तो बताए मोहे, किसका क़सूर है अँखियाँ दीवानी, मेरा दिल मजबूर है कैसे सहूँ मैं ये सलोने दुख प्यार के काहे बनो जी अनजान … सपनों में आके मिले नए-नए भेस में नदिया-किनारे कभी तारों के … Continue reading →

१९५९ – मधु – बता दो कोई कौन गली गयो श्याम २ | 1959 – Madhu – bata do koi kaun gali gayo shyam 2

बता दो कोई, कौन गली गए श्याम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम झूठा धीरज आस दिलाकर, अचक-अचानक बाँह छुड़ाकर वो तो गए, हाय, रह गए यहाँ हम, हाय, कलेजा थाम कौन गली गए श्याम बता दो कोई, कौन गली गए श्याम वो छलिया निकले हरजाई, जिन संग हमने प्रीत … Continue reading →

१९५८ – मधुमती – सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं | 1958 – Madhumati – suhana safar aur ye mausam haseen

सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं हमें डर है हम खो न जाएँ कहीं सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं ये कौन हँसता है फूलों में छुपकर बहार बेचैन है किसकी धुन पर कहीं गुनगुन, कहीं रुनझुन, कि जैसे नाचे ज़मीं सुहाना सफ़र और ये मौसम हसीं … ये गोरी नदियों का चलना उछलकर कि … Continue reading →

१९५८ – मधुमती – हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे | 1958 – Madhumati – hum haal-e-dil sunayenge

तुम्हारा दिल मेरे दिल के बराबर हो नहीं सकता वो शीशा हो नहीं सकता, ये पत्थर हो नहीं सकता हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे, सुनिए कि न सुनिए सौ बार इसे दोहराएँगे, सुनिए कि न सुनिए हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे रहेगा इश्क़ तेरा ख़ाक में मिलाके मुझे हुए हैं इब्तिदा में रंज इंतेहा के मुझे हम हाल-ए-दिल सुनाएँगे … Continue reading →