Songs of Shailendra::
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१९५९ – कन्हैया – नी बलिये, रुत है बहार की | 1959 – Kanhaiya – ni baliye rut hai bahar ki

नी बलिये, रुत है बहार की सुन चन वे, रुत है बहार की देखो आए वो, लेके डोली प्यार की कुछ मत पूछो कैसे बीतीं घड़ियाँ इंतज़ार की नी बलिये, रुत है बहार की सुन चन वे, रुत है बहार की आख़िर सुन ली मनमोहन ने, मेरे मन की बोली अब जाकर हमको पहचानी उनकी … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – हम भी हैं तुम भी हो | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – hum bhi hain tum bhi ho

है आग हमारे सीने में, हम आग से खेलते आते हैं टकराते हैं जो इस ताक़त से, वो मिट्टी में मिल जाते हैं तुमसे तो पतंगा अच्छा है, जो हँसते हुए जल जाता है वो प्यार में मिट तो जाता है, पर नाम अमर कर जाता है हम भी हैं, तुम भी हो, दोनों हैं … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – ओ बसंती पवन पागल | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – o basanti pawan pagal

ओ बसंती पवन पागल, ना जा रे ना जा रोको कोई ओ बसंती पवन पागल बनके पत्थर हम पड़े थे, सूनी-सूनी राह में जी उठे हम जबसे तेरी बाँह आई बाँह में छीनकर नैनों से काजल, ना जा रे ना जा रोको कोई ओ बसंती पवन पागल… याद कर, तूने कहा था, प्यार से संसार … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – begani shaadi mein abdulla deewana

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना है ना! दुल्हन बनूँगी मैं, डोली चढ़ूँगी मैं दूर कहीं बालम के दिल रहूँगी मैं तुम तो पराए हो, यूँ ही ललचाए हो जाने किस दुनिया से, जाने क्यूँ आए हो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना लहराती आऊँ … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – आ अब लौट चलें | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – aa ab laut chalein

आ अब लौट चलें नैन बिछाए, बाँहें पसारे, तुझको पुकारे देश तेरा आ जा रे, आ जा रे सहज है सीधी राह पे चलना, देखके उलझन बचके निकलना कोई ये चाहे माने न माने, बहुत है मुश्किल गिरके सँभलना आ अब लौट चलें… आँख हमारी मंज़िल पर है, दिल में ख़ुशी की मस्त लहर है … Continue reading →

१९६२ – हरियाली और रास्ता – बोल मेरी तक़्दीर में क्या है मेरे हमसफ़र | 1962 – Hariyali Aur Rasta – bol meri taqdeer mein kya hai mere humsafar

बोल मेरी तक़्दीर में क्या है, मेरे हमसफ़र अब तो बता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता कहाँ है मेरे प्यार की मंज़िल, तू बतला, तुझको है पता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता जहाँ हम आके पहुँचे हैं, वहाँ से लौटकर जाना नहीं मुमकिन, मगर मुश्किल है दुनिया से भी … Continue reading →

१९६२ – हरियाली और रास्ता – लाखों तारे आसमान में | 1962 – Hariyali Aur Rasta – laakhon taare aasman mein

लाखों तारे आसमान में, एक मगर ढूँढ़े ना मिला देखके दुनिया की दीवाली, दिल मेरा चुपचाप जला लाखों तारे आसमान में, एक मगर ढूँढ़े ना मिला क़िस्मत का है नाम मगर, है काम ये दुनियावालों का फूँक दिया है चमन हमारे ख़्वाबों और ख़यालों का जी करता है, ख़ुद ही घोंट दें अपने अरमानों का … Continue reading →

१९६२ – हरियाली और रास्ता – एक था राजा एक थी रानी, आओ सुनाऊँ | 1962 – Hariyali Aur Rasta – ek tha raja ek thi rani, aao sunaoon

एक था राजा, एक थी रानी आओ सुनाऊँ उनकी कहानी थे वो बचपन के साथी, एक दूजे के दीवाने खेला करते थे मिलकर, मिलकर गाते थे गाने दिन थे वो उजले, रातें सुहानी, आओ सुनाऊँ उनकी कहानी एक था राजा, एक थी रानी आओ सुनाऊँ उनकी कहानी वो उड़े बादलों के संग, वो इंद्रधनुष पे … Continue reading →

१९६२ – हरियाली और रास्ता – बोल मेरी तक़्दीर में क्या है | 1962 – Hariyali Aur Rasta – bol meri taqdeer mein kya hai

बोल मेरी तक़्दीर में क्या है, मेरे हमसफ़र अब तो बता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता कहाँ है मेरे प्यार की मंज़िल, तू बतला, तुझको है पता जीवन के दो पहलू हैं, हरियाली और रास्ता जहाँ हम आके पहुँचे हैं, वहाँ से लौटकर जाना नहीं मुमकिन, मगर मुश्किल है दुनिया से भी … Continue reading →

१९५६ – हलाकू – अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया | 1956 – Halaku – aji chale aao, tumhein aankhon ne dil mein bulaya

अजी चले आओ अजी चले आओ, तुम्हें आँखों ने दिल में बुलाया अब तो समझ जाओ अब तो समझ जाओ, क्यूँ निगाहों ने पर्दा गिराया अजी चले आओ दिल में उठती हैं कैसी उमंगें, तुमसे कानों में कहना पड़ेगा शर्त सुन लो मगर मेरे दिलबर, आके दिल में ही रहना पड़ेगा ज़रा मुस्कुराओ ज़रा मुस्कुराओ, … Continue reading →