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Insaan Jaag Utha

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१९५९ – इन्सान जाग उठा – जानूँ-जानूँ री काहे खनके है | 1959 – Insaan Jaag Utha – jaanu jaanu ri kahe khanke hai

जानूँ जानूँ री, काहे खनके है तोरा कंगना जानूँ जानूँ री, काहे खनके है तोरा कंगना मैं भी जानूँ री, छुपके कौन आया तोरे अंगना अरी जानूँ री, छुपके कौन आया तोरे अंगना मैं भी जानूँ री पीपल की छैंया तले बतियाँ बनायके भोले-भाले दिल को ले गया उड़ायके सखी जानूँ री, झूमे है काहे … Continue reading