एक दिन और गया, हाय रोके न रुका छाया अँधियारा आज भी नाव न आई, आया ना खेवनहारा एक दिन और गया काली नागिन-सी घिरी रैना कजरारी सहमी-सहमी-सी है ये नगरी हमारी देके आवाज़ थका मन दुखियारा आज भी नाव न आई, आया ना खेवनहारा एक दिन और गया … फिर वही रात कठिन, छुप … Continue reading