Songs of Shailendra::
archives

Chorus

This tag is associated with 54 posts

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – ओ जग के रखवाले | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – o jag ke rakhwale

ओ जग के रखवाले, हमें तुझबिन कौन सँभाले ओ जग के रखवाले जित देखूँ, देखूँ अँधियारा, घायल मन घबराए जैसे अँधी रात में पँछी राह भूल दुख पाए चहुं-ओर हैं बादल काले हमें तुझबिन कौन सँभाले, ओ जग के रखवाले एक आस अब तुमसे भगवन, एक ही द्वार तुम्हारा बाँह बढ़ाके हमें उठा लो, तुमही … Continue reading →

१९६० – दिल अपना और प्रीत पराई – मेरा दिल अब तेरा ओ साजना | 1960 – Dil Apna Aur Preet Parai – mera dil ab tera o saajna

मेरा दिल अब तेरा, ओ साजना कैसा जादू फेरा, ओ साजना मेरा दिल अब तेरा, ओ साजना नैन हमारे तुम संग लागे, तुम संग प्रीत हमारी मन भाए तुम जानो न जानो, जाने है दुनिया सारी कोई और न मेरा, ओ साजना मेरा दिल अब तेरा … मोरनी बनके राह तकूँ मैं, तुम बादल बन … Continue reading →

१९६० – दिल अपना और प्रीत पराई – अंदाज़ मेरा मस्ताना | 1960 – Dil Apna Aur Preet Parai – andaz mera mastana

अंदाज़ मेरा मस्ताना, माँगे दिल का नज़राना ज़रा सोच के आँख मिलाना, हो जाए न तू दीवाना कि हम भी जवाँ हैं, समाँ भी जवाँ है न फिर हमसे कहना, मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है प्यार की किताब हूँ मैं, सच हूँ फिर भी ख़्वाब हूँ मैं देखकर सुरूर आए, वो अजब … Continue reading →

१९६१ – चार दीवारी – गोरी बाबुल का घरवा | 1961 – Char Diwari – gori babul ka gharwa

गोरी, बाबुल का घरवा अब है बिदेसवा साजन के चरणों में घर है तेरा ओ गोरी, चार दीवारी, अंगना, अटारी यही तेरी दुनिया, ये जग है तेरा गोरी, बाबुल का घरवा आई है तू, बगिया में जैसे बहार आई रे आँचल में प्यार, अँखियों में सपने हज़ार लाई रे बड़ी गहरी नदिया के पार आई … Continue reading →

१९५९ – छोटी बहन – बाग़ों में बहारों में इठलाता गाता | 1959 – Chhoti Bahen – bagon mein baharon mein ithlata gata

बाग़ों में बहारों में, इठलाता गाता आया कोई नाज़ुक-नाज़ुक कलियों के दिल को धड़काता आया कोई आया कोई, आया कोई, आया कोई, होय बाग़ों में बहारों में … भीनी हवा ऊदी घटा, कहे तेरे आँगन में बरसेगा प्यार फूलों के हार लेके बहार, करने को आई मेरे सोलह-सिंगार रंगों की उमंगों की गागर छलकाता आया … Continue reading →

१९६५ – छोटी छोटी बातें – मोरी बाली रे उमरिया अब कैसे बीते | 1965 – Chhoti Chhoti Baten – mori bali umariya re ab kaise beete

लकडी जल कोयला भई, कोयला जल भयो राख मैं पापन ऐसी जली, न कोयला भई न राख मोरी बाली रे उमरिया, अब कैसे बीते राम रो-रोके बोली राधा, मोहे तजके गयो श्याम मोरी बाली रे उमरिया जो छोड़के ही जना था, तूने काहे को प्रीत लगाई मेरे मीत तेरा क्या बिगड़ा, मेरी हो गई जगत-हँसाई … Continue reading →

१९६८ – ब्रह्मचारी – चक्के में चक्का चक्के पे गाड़ी | 1968 – Brahmachari – chakke mein chakka chakke pe gadi

चक्के में चक्का, चक्के पे गाड़ी गाड़ी में निकली अपनी सवारी थोड़े अगाड़ी, थोड़े पिछाड़ी थोड़े अगाड़ी, थोड़े पिछाड़ी चुन्नू छबीले, मुन्नु हठीले मखमल की टोपी, छोटू रंगीले लल्लू बटाटा, लल्ली टमाटा गामा बनेंगे गट्टू गठीले पेट में इनके लंबी-सी दाढ़ी चक्के में चक्का … उमर में कच्चे, ये छोटे बच्चे हैं भोले-भाले, हैं सीधे-सछे … Continue reading →

१९५८ – बाग़ी सिपाही – चिंचना पापुल छुई-मुई मुझे छू न लेना | 1958 – Baaghi Sipahi – chinchana papul chhui mui mujhe chhoo na lena

चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल छुईमुई मैं, छू न लेना, मुझे छू न लेना आँख से आँख मिली, जाम पे जाम चले, मुफ़्त बदनाम हुए हम तेरी ये शोख़ नज़र, ठण्डी आहों का असर, तुझे पहचान गए हम चिंचना पपुल, चिंचना पपुल, चिंचना पपुल लेके मेरा दिल जाँ न लेना, मुझे छू न लेना … Continue reading →

१९५८ – बाग़ी सिपाही – ओ बेरहम, तेरे सितम हम पे होंगे कब तक | 1958 – Baaghi Sipahi – o beraham tere sitam hum pe honge kab tak

ओ बेरहम, तेरे सितम हमपे होंगे कब तक, देखेंगे हम ये रौशनी जलती रहे, जान भी जाए तो हमें होगा ना ग़म वो देख आँसुओं से ज़ख़्म धो रही है ज़िंदगी वो ख़ाक होके बीज नए बो रही ज़िंदगी सिवा ख़ुदाके और की ना होगी हमसे बंदगी ये कहके देख ज़ार-ज़ार रो रही है ज़िंदगी … Continue reading →

१९५४ – बादशाह – गुल मुस्कुरा उठा बुलबुल ये गा उठा | 1954 – Badshah – gul muskura utha bulbul ye gaa utha

गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ गई बहार दुल्हन के जैसी नई ज़िंदगी का आज ये पहला दिन है ख़ुशीका मौसम ये प्यार का, साज़-ओ-सिंगार का बाग़ों में आ गई बहार गुल मुस्कुरा उठा, बुलबुल ये गा उठा बाग़ों में आ गई बहार, बाग़ों में आ … Continue reading →