Songs of Shailendra::
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C H Atma

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१९५१ – नगीना – एक सितारा है आकाश में | 1951 – Nagina – ek sitara hai akash mein

एक सितारा है आकाश में, एक सितारा, एक सितारा दो थे कुछ दिन, आज अकेला एक वही पथहारा एक सितारा धुँधला-सा एक दीप जलाए, फिर अँधेरा बढ़ता जाए बड़े जतन से दिल में छुपाए, आग का एक अँगारा एक सितारा रात जो देखे उसक ग़म तो, ओस के आंसू रोए दुनिया अपने मीठे सपने गले … Continue reading

१९५१ – नगीना – रोऊँ मैं सागर के किनारे | 1951 – Nagina – rouun main sagar kinare

रोऊँ मैं सागर के किनारे, सागर हँसी उड़ाए क्या जानें ये चंचल लहरें, मैं हूँ आग छुपाए मैं भी इतना डूब चुका हूँ, क्या तेरी गहराई काहे होड़ लगाए मोसे, काहे होड़ लगाए रोऊँ मैं सागर के किनारे … तुझमें डूबे चाँद मगर, एक चाँद ने मुझे डुबाया मेरा सबकुछ लूटके छिप गई, चाँदनी रात … Continue reading

१९५४ – भाई साहब – रात फागुन की चाँद पूनम का | 1954 – Bhai Saheb – raat phagun ki chand poonam ka

रात फागुन की, चाँद पूनम का, फैली शीतल आग बड़ी मुश्किल से सोई बिरहन, पिया की याद में जाग आधी रात खुल गई पलक, सखी, कौन आया चौंक-चमक कामिनी उठ बैठी, कौन आया ये सच है या कोई सपना, मोहे नींद से आन जगाया मुख से न बोले, अँखियन मुस्काए साँवरिया मन भाया रे, कौन … Continue reading

१९५४ – भाई साहब – मंज़िल तो है बड़ी दूर | 1954 – Bhai Saheb – manzil to hai badi door

ऊँची-नीची ऊँची-नीची डगर जीवन की चलना सँभलके प्यारे, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर मंज़िल तो है बड़ी दूर, सँभलके चलना मंज़िल तो है बड़ी दूर सूने सफ़र में लाखों चोर मिलेंगे तोहे, करनी करेंगे ज़रूर धर्म-कर्म की झोली कहाँ पे गँवाई तूने, पूछेंगे तेरे हुज़ूर संभलके चलना, मंज़िल तो है बड़ी दूर ऊँची-नीची … Continue reading

१९५४ – भाई साहब – घेरता है गर अँधेरा | 1954 – Bhai Saheb – gherta hai gar andhera

घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर दो घड़ी में मुस्कराएगी सहर, तू ग़म न कर घेरता है गर अँधेरा, ग़म न कर, ग़म न कर ढल गया एक और दिन, अच्छा हुआ समझो ज़िंदगी जितनी कटी ग़म कम हुआ समझो शुक्र कर कुछ कम हुआ ज़िंदगानी का सफ़र घेरता है गर … Continue reading