Songs of Shailendra::
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Aurat

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१९५३ – औरत – दर्द-ए-उल्फ़त हाय दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ | 1953 – Aurat – dard-e-ulfat chhupaun kahan

दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ दिल की दुनिया बसाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ चुपके-से वो मेरे दिल में समाए उन्हें लेके जाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ चाहत है नाज़ुक, ज़ालिम है ज़माना मैं बचके भी जाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ उन्हें देख शर्माके पूछा नज़र ने वो आए, बिठाऊँ कहाँ दर्द-ए-उल्फ़त छुपाऊँ कहाँ dard-e-ulfat chhupaa_uu.N kahaa.N dil … Continue reading

१९५३ – औरत – दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा | 1953 – Aurat – dard-e-jigar thehar zara

दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा, दम तो मुझे लेने दे जिसने मिटाया है मुझे, उसको दुआ देने दे दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा दिल की लगी क्या है जान लूँ तो बहुत अच्छा हो मैं जो घुट-घुटके जान दूँ तो बहुत अच्छा हो कल जहाँ बसाया था, आज मिटा लेने दे दर्द-ए-जिगर ठहर ज़रा मेरी बर्बाद मोहब्बत न कर … Continue reading