ज़िंदगी ख़्वाब है था हमें भी पता पर हमें ज़िंदगी से बहुत प्यार था सुख भी थे, दुख भी थे दिल को घेरे हुए चाहे जैसा था रंगीन संसार था आ गई थी शिकायत लबों तक मगर किससे कहते तो क्या, कहना बेकार था चल पड़े दर्द पीकर तो चलते रहे हारकर बैठ जाने से … Continue reading
लकडी जल कोयला भई, कोयला जल भयो राख मैं पापन ऐसी जली, न कोयला भई न राख मोरी बाली रे उमरिया, अब कैसे बीते राम रो-रोके बोली राधा, मोहे तजके गयो श्याम मोरी बाली रे उमरिया जो छोड़के ही जना था, तूने काहे को प्रीत लगाई मेरे मीत तेरा क्या बिगड़ा, मेरी हो गई जगत-हँसाई … Continue reading