ज़ुल्म-ओ-सितम को भी, हम तो अदा समझे पर मेरी चाहत को, जाने वो क्या समझे ख़ुद को भला जाना, मुझको बुरा समझे पर मेरी चाहत को, जाने वो क्या समझे लाया था दिल को नज़र करने, क़ुर्बाँ ये जान-ओ-जिगर करने उनके बिना मेरा हाल है क्या, आया था उनको ख़बर करने टाल दिया लेकिन, मुझको … Continue reading
एक दिन और गया, हाय रोके न रुका छाया अँधियारा आज भी नाव न आई, आया ना खेवनहारा एक दिन और गया काली नागिन-सी घिरी रैना कजरारी सहमी-सहमी-सी है ये नगरी हमारी देके आवाज़ थका मन दुखियारा आज भी नाव न आई, आया ना खेवनहारा एक दिन और गया … फिर वही रात कठिन, छुप … Continue reading