Songs of Shailendra::
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1961

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१९६१ – सपन सुहाने – घूँघट हटा न देना गोरिये | 1961 – Sapan Suhane – ghunghat hata na dena goriye

घूँघट हटा ना देना गोरिये, चँदा शरम से डूबेगा कहीं मुस्कुरा ना देना बलिये, चँदा शरम से डूबेगा कजरारी मतवारी रसभरी अँखियों से घूँघट हटा ना देना गोरिये, चँदा शरम से डूबेगा देखके तेरे गाल गुलाबी भँवरा धोखा खाए तेरे तीर का मारा मुख से पानी माँग न पाए घूँघट हटा ना देना गोरिये … … Continue reading

१९६१ – सपन सुहाने – नाम मेरा निम्मो, मुकाम लुधियाना | 1961 – Sapan Suhane – naam mera nimmo, mukaam ludhiyana

नाम मेरा निम्मो, मुकाम लुधियाना संग लिए डोलूँ मैं प्यार का खज़ाना हो रहूँगी तेरी, ला दिल नज़राना यूँही रे यूँही तू मत ललचाना आहा रे, आह झूमती नवेली, आहा रे, आहा नार अलबेली आहा रे, आहा प्यार की पहेली, आहा रे, आहा नार अलबेली आहा आहा आहा आहा आहा नाम मेरा निम्मो, मुकाम लुधियाना … Continue reading

१९६१ – ससुराल – एक सवाल मैं करूँ | 1961 – Sasural – ek sawal main karun, ek sawal tum karo

एक सवाल मैं करूँ, एक सवाल तुम करो हर सवाल का सवाल ही जवाब हो एक सवाल मैं करूँ, एक सवाल तुम करो प्यार की बेला, साथ सजन का, फिर क्यूँ दिल घबराए? नैहर से घर जाती दुल्हन क्यूँ नैना छलकाए? है मालूम कि जाना होगा, दुनिया एक सराए फिर क्यूँ जाते वक़्त मुसाफ़िर रोए … Continue reading

१९६१ – ससुराल – क्या मिल गया क्या खो गया | 1961 – Sasural – kya mil gaya kya kho gaya

क्या मिल गया, हाय, क्या खो गया मुझे मेरे बालम ये क्या हो गया हम खो गए, हाय, तुम खो गए मोहब्बत की राहों में दिल खो गया ये ख़ुशियों के प्याले छलकते चलेंगे हवाओं के आँचल महकते चलेंगे नए रास्ते ख़ुद-ब-ख़ुद खुल चलेंगे जिधर से भी हम-तुम बहकते चलेंगे क्या मिल गया … सफ़र … Continue reading

१९६१ – ससुराल – सुन ले मेरी पायलों के गीत साजना | 1961 – Sasural – sun le meri payalon ke geet saajana

सुन ले मेरी पायलों के गीत, साजना आ बुला रही है मेरी प्रीत, साजना आजा रे, आजा रे वो हसीन चाँदरात याद कर तूने जो कही थी बात याद कर वादा वो प्यार का, कैसे दूँ मैं भुला तू भी पहली मुलाक़ात याद कर सुन ले मेरी पायलों के गीत, साजना … जो भी शाम … Continue reading

१९६१ – ससुराल – सता ले ऐ जहाँ | 1961 – Sasural – sata le ae jahan

सता ले ऐ जहाँ, न खोलेंगे ज़ुबाँ सितम तेरे कभी तो बेअसर हो जाएँगे पुकारो लाख तुम, न फिर लौटेंगे हम कि हम भी राह की इस धूल में खो जाएँगे सता ले ऐ जहाँ जलन दिल की तो कहती है, कि मैं उठ जाऊँ महफ़िल से मगर उम्मीद दामन को मेरे छोड़ेगी मुश्किल से … Continue reading

१९६१ – ससुराल – ये अलबेला तौर ना | 1961 – Sasural – ye albela taur na dekha

ये अलबेला तौर न देखा तुमसा कोई और ना देखा हुस्न का ये जौर ना देखा वल्लाह, यार लुट गए हम तो नज़र मिलाके तुम हमको अगर इस हाल में पहचानते तो हम आपकी बाँकी नज़र को मानते मेरा फ़साना, पता या ठिकाना, अगर पूछते जानते ये अलबेला तौर न देखा … है जीवन का … Continue reading

१९६१ – सपन सुहाने – चाँद कभी था बाँहों में | 1961 – Sapan Suhane – chand kabhi tha baanhon mein

चाँद कभी था बाँहों में, फूल बिछे थे राहों में अब तो वो सपने गए बिखर, डूब गए हम आहों में चाँद कभी था बाँहों में दूर-दूर-दूर जहाँ उठ रहा है अब धुँआ मेरा वहींपर था आशियाँ, तारों की झिलमिल छाँव में चाँद कभी था बाँहों में … हाय मेरी बेकसी, बेज़ुबाँ है ज़िंदगी मैं … Continue reading

१९६१ – सपन सुहाने – नज़र से मिल गई नज़र | 1961 – Sapan Suhane – nazar se mil gayi nazar

नज़र से मिल गई नज़र, और पल में दिल तेरा हुआ फिर मैं क्या जानूँ क्या हुआ नज़र से लड़ गई नज़र, और घायल दिल मेरा हुआ फिर मुझसे पूछो क्या हुआ दिल सोचता है, चँदा दिन में कहाँ से आया कैसे नहीं आते हम, जब तुमने था बुलाया नज़र से मिल गई नज़र … … Continue reading

१९६१ – रूप की रानी चोरों का राजा – ऐसी ही है अगर मर्ज़ी तेरी | 1961 – Roop Ki Rani Choron Ka Raja – aisi hi agar marzi hai teri

ऐसी ही अगर मर्ज़ी है तेरी, अरमानों में आग लगा देंगे हम अपना आप मिटा देंगे ऐसी ही अगर मर्ज़ी है तेरी, तेरे प्यार में जान गँवा देंगे उनमें से नहीं हम ऐ हमदम, है जिनके लबोंपर झूठी क़सम इस दिल में बसे हो तुम ही तुम, हम चीरके दिल दिखला देंगे ऐसी ही अगर … Continue reading