Songs of Shailendra::
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१९६६ – तीसरी क़सम – पान खाए सैंया हमारो | 1966 – Teesri Kasam – paan khaye sainya hamaro

पान खाए सैंया हमारो साँवरी सुरतिया होंठ लाल-लाल हाय हाय मलमल का कुर्ता मलमल के कुर्ते पे छींट लाल-लाल पान खाए सैंया हमारो हमने मँगाई सुरमेदानी, ले आया ज़ालिम बनारस का ज़र्दा अपनी ही दुनिया में खोया रहे वो, हमरे दिल की न पूछे बेदर्दा पान खाए सैंया हमारो … बगिया गुन-गुन, पायल छुन-छुन, चुपके-से … Continue reading →

१९६६ – तीसरी क़सम – सजन रे झूठ मत बोलो | 1966 – Teesri Kasam – sajan re jhooth mat bolo

सजन रे झूठ मत बोलो, ख़ुदा के पास जाना है न हाथी है न घोड़ा है, वहाँ पैदल ही जाना है सजन रे झूठ मत बोलो तुम्हारे महल-चौबारे यहीं रह जाएँगे सारे अकड़ किस बात प्यारे, ये सर फिर भी झुकाना है सजन रे झूठ मत बोलो … भला कीजे भला होगा, बुरा कीजे बुरा … Continue reading →

१९६६ – तीसरी क़सम – सजनवा बैरी हो गए हमार | 1966 – Teesri Kasam – sajanwa bairi ho gaye hamar

सजनवा बैरी हो गए हमार चिठिया हो तो हर कोई बाँचे, भाग ना बाँचे कोय करमवा बैरी हो गए हमार जाए बसे परदेस सजनवा सौतन के, भरमाए ना संदेस न कोई ख़बरिया, रुत आए रुत जाए डूब गए हम बीच भंवर में करके सोलह पार सजनवा बैरी हो गए हमार सूनी सेज गोद मोरी सूनी, … Continue reading →

१९६७ – दीवाना – तुम्हारी भी जय-जय हमारी भी जय-जय | 1967 – Diwana – tumhari bhi jay jay, hamari bhi jay jay

तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय न तुम हारे, न हम हारे सफ़र साथ जितना था, हो ही गया तय न तुम हारे, न हम हारे तुम्हारी भी जय-जय, हमारी भी जय-जय याद के फूल को हम तो, अपने दिल से रहेंगे लगाए और तुम भी हँस लेना जब ये दीवाना याद आए मिलेंगे जो … Continue reading →

१९६६ – तीसरी क़सम – लाली लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया | 1966 – Teesri Kasam – lali lali doliya mein lali re dulhaniya

लाली-लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया पिया की पियारी भोली-भाली रे दुल्हनिया मीठे बैन, तीखे नैनोंवाली रे दुल्हनिया पिया की पियारी भोली-भाली रे दुल्हनिया लौटेगी जो गोदी भर, हमें ना भुलाना लड्डू-पेड़े लाना, अपने हाथों से खिलाना तेरी सब रातें हों दीवाली रे दुल्हनिया लाली-लाली डोलिया में लाली रे दुल्हनिया पिया की पियारी भोली-भाली रे … Continue reading →

१९६१ – ससुराल – सता ले ऐ जहाँ | 1961 – Sasural – sata le ae jahan

सता ले ऐ जहाँ, न खोलेंगे ज़ुबाँ सितम तेरे कभी तो बेअसर हो जाएँगे पुकारो लाख तुम, न फिर लौटेंगे हम कि हम भी राह की इस धूल में खो जाएँगे सता ले ऐ जहाँ जलन दिल की तो कहती है, कि मैं उठ जाऊँ महफ़िल से मगर उम्मीद दामन को मेरे छोड़ेगी मुश्किल से … Continue reading →

१९६१ – ससुराल – ये अलबेला तौर ना | 1961 – Sasural – ye albela taur na dekha

ये अलबेला तौर न देखा तुमसा कोई और ना देखा हुस्न का ये जौर ना देखा वल्लाह, यार लुट गए हम तो नज़र मिलाके तुम हमको अगर इस हाल में पहचानते तो हम आपकी बाँकी नज़र को मानते मेरा फ़साना, पता या ठिकाना, अगर पूछते जानते ये अलबेला तौर न देखा … है जीवन का … Continue reading →

१९६१ – सपन सुहाने – चाँद कभी था बाँहों में | 1961 – Sapan Suhane – chand kabhi tha baanhon mein

चाँद कभी था बाँहों में, फूल बिछे थे राहों में अब तो वो सपने गए बिखर, डूब गए हम आहों में चाँद कभी था बाँहों में दूर-दूर-दूर जहाँ उठ रहा है अब धुँआ मेरा वहींपर था आशियाँ, तारों की झिलमिल छाँव में चाँद कभी था बाँहों में … हाय मेरी बेकसी, बेज़ुबाँ है ज़िंदगी मैं … Continue reading →

१९६१ – सपन सुहाने – नज़र से मिल गई नज़र | 1961 – Sapan Suhane – nazar se mil gayi nazar

नज़र से मिल गई नज़र, और पल में दिल तेरा हुआ फिर मैं क्या जानूँ क्या हुआ नज़र से लड़ गई नज़र, और घायल दिल मेरा हुआ फिर मुझसे पूछो क्या हुआ दिल सोचता है, चँदा दिन में कहाँ से आया कैसे नहीं आते हम, जब तुमने था बुलाया नज़र से मिल गई नज़र … … Continue reading →

१९६२ – संगीत सम्राट तानसेन – झूमती चली हवा याद आ गया कोई | 1962 – Sangeet Samrat Tansen – jhoomati chali hawa yaad aa gaya koi

झूमती चली हवा, याद आ गया कोई बुझती-बुझती आग को फिर जला गया कोई झूमती चली हवा खो गईं हैं मंज़िलें, मिट गए हैं रास्ते गर्दिशें ही गर्दिशें अब हैं मेरे वास्ते और ऐसे में मुझे, फिर बुला गया कोई झूमती चली हवा … एक हूक-सी उठी, मैं सिहरके रह गया दिल को अपने थामके, … Continue reading →