Songs of Shailendra::
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१९६७ – हरे काँच की चूड़ियाँ – पँछी रे ओ पँछी | 1967 – Hare Kaanch Ki Choodiyan – panchhi re o panchhi

पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी मत छेड़ तू ये तराने, हो जाएँ ना दो दिल दीवाने पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी हम क़रीब आ गए, मंज़िलों को पा गए भा गया हमें कोई, हम किसीको भा गए पँछी रे ओ पँछी, उड़ जा रे ओ पँछी … … Continue reading →

१९६७ – हरे काँच की चूड़ियाँ – हाय कहाँ चला रे | 1967 – Hare Kaanch Ki Choodiyan – haay kahan chala re

कहाँ चला रे, कहाँ चला रे कहाँ तेरा कौन तेरी राह तके रे हमको इतना बता जा कहाँ चला रे, कहाँ चला रे कौन दूर-नगरी के छोर से, खींचे तोहे जादू के ज़ोर से बाँध लिया किसने जिया तेरा, बड़े-बड़े नैनों की डोर से कहाँ चला रे, कहाँ चला रे … झूम-झूम झोंका बयार का, … Continue reading →

१९६२ – हमराही – दिल तू भी गा | 1962 – Hamrahi – dil tu bhi gaa

दिल, तू भी गा, प्यार में मुस्कुरा सपने में जो आते हैं अक्सर, महफ़िल में उनको बुला कल जो हुआ सो हुआ, भूल जा सपने में जो आते हैं अक्सर, महफ़िल में उनको बुला वो भी न बोले, हम भी न बोले, आँख मिली पहचान हुई कोई चला जब साथ सफ़र में, हमको डगर आसान … Continue reading →

१९६२ – हमराही – करके जिसका इंतज़ार | 1962 – Hamrahi – karke jiska intazar

करके जिसका इंतज़ार, मेरा दिल गया हार वही सपनों की शाम देखो लाई मेरा प्यार मुझसे रूठी थीं बेकार, तुम मेरी जान-ए-बहार पूछो अपने ही दिल से, क्या झूठा था मेरा प्यार सैंया मेरा था क़ुसूर, जो मैं तुमसे थी दूर था यक़ीन, मेरी प्रीत रंग लाएगी ज़रूर दोनों बैंया पसार, थकी जिसको पुकार वही … Continue reading →

१९६५ – गुमनाम – जान-पहचान हो, जीना आसान हो | 1965 – Gumnaam – jaan pehchan ho jeena aasan ho

जान-पहचान हो, जीना आसान हो दिल को चुरानेवालो आँख ना चुराओ, नाम तो बताओ जान-पहचान हो, जीना आसान हो आज की ये शाम जवाँ, यूँ ना चली जाए फिर से ना आएगी ये किसीके बुलाए जान-पहचान हो, जीना आसान हो … बोलो या ना बोलो तुम, हो गए इशारे सीधी-सीधी चोट हुई दिल पे हमारे … Continue reading →

१९६५ – गाइड – वहाँ कौन है तेरा | 1965 – Guide – wahan kaun hai tera

वहाँ कौन है तेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ दम ले-ले घड़ीभर, ये छैंया पाएगा कहाँ वहाँ कौन है तेरा बीत गए दिन, प्यार के पलछिन, सपना बनीं वो रातें भूल गए वो, तू भी भुला दे प्यार की वो मुलाक़ातें सब दूर अँधेरा, मुसाफ़िर, जाएगा कहाँ दम ले-ले घड़ीभर, ये छैंया पाएगा कहाँ वहाँ कौन है … Continue reading →

१९६५ – गुमनाम – आएगा कौन यहाँ | 1965 – Gumnaam – aayega kaun yahan

आएगा कौन यहाँ, किसको सदाएँ देता है दिल अपना है कौन यहाँ, किसको सदाएँ देता है दिल प्यार का धोखा, ख़्वाब सुहाना देखा था जो कभी आज उसीकी याद से लिपटी, रोती है ज़िंदगी दुश्मन है सारा जहाँ, किसको सदाएँ देता है दिल आएगा कौन यहाँ मेरे दिल के एक कोने में जलता था जो … Continue reading →

१९६५ – गाइड – पिया तोसे नैना लागे रे | 1965 – Guide – piya tose naina lage re

पिया तोसे नैना लागे रे, नैना लागे रे जाने क्या हो अब आगे रे, नैना लागे रे पिया तोसे नैना लागे रे जग ने उतारे, धरती पे तारे, पर मन मेरा मुरझाए, हाय उनबिन आली, कैसी दीवाली, मिलने को जिया उकलाए आ सजन पायल पुकारे, झनक झन-झन झनक झन-झन पिया तोसे नैना लागे रे … … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – जिन रातों की भोर नहीं है | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – jin raton ki bhor nahin hai

जिन रातों की भोर नहीं है, आज ऐसी ही रात आई बोझ से ग़म के डूब गया दिल, सागर की है गहराई रात के तारो, तुम ही बता दो, मेरी वो मंज़िल है कहाँ पागल बनकर जिसके लिए मैं खो बैठा हूँ दोनों जहाँ जिन रातों की भोर नहीं है, आज ऐसी ही रात आई … Continue reading →

१९६४ – दूर गगन की छाँव में – ओ जग के रखवाले | 1964 – Door Gagan Ki Chhaon Mein – o jag ke rakhwale

ओ जग के रखवाले, हमें तुझबिन कौन सँभाले ओ जग के रखवाले जित देखूँ, देखूँ अँधियारा, घायल मन घबराए जैसे अँधी रात में पँछी राह भूल दुख पाए चहुं-ओर हैं बादल काले हमें तुझबिन कौन सँभाले, ओ जग के रखवाले एक आस अब तुमसे भगवन, एक ही द्वार तुम्हारा बाँह बढ़ाके हमें उठा लो, तुमही … Continue reading →