Songs of Shailendra::
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1960

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१९६० – उसने कहा था – आहा रिमझिम के ये प्यारे-प्यारे गीत लिए | 1960 – Usne Kaha Tha – aha rimjhim ke ye pyare pyare geet liye

आहा, रिमझिम के ये प्यारे-प्यारे गीत लिए आई रात सुहानी देखो प्रीत लिए मीत मेरे सुनो ज़रा, हवा कहे क्या सुनो तो ज़रा, झिंगुर बोले चिकी-मिकी चिकी-मिकी रिमझिम के ये प्यारे-प्यारे गीत लिए खोई-सी भीगी-भीगी रात झूमे आँखों में सपनों की बारात झूमे दिल की ये दुनिया आज बादलों के साथ झूमे आहा, रिमझिम के … Continue reading →

१९६० – उसने कहा था – चलते ही जाना | 1960 – Usne Kaha Tha – chalte hi jaana

चलते ही जाना, हो चलते ही जाना जहाँ तक आज ये राह चले कहो कि जग सारा, हमारा है हमारा ये प्यारे-प्यारे नीलगगन के तले चलते ही जाना … न बँधके रहेंगे, न दबके रहेंगे जहाँ भी रहेंगे ये मतवाले हिम्मतवाले, ज़माने से निराले दिलों के शहज़ादे, ये दिलवाले हमीं से उजियारा, है ये जग … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – हम भी हैं तुम भी हो | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – hum bhi hain tum bhi ho

है आग हमारे सीने में, हम आग से खेलते आते हैं टकराते हैं जो इस ताक़त से, वो मिट्टी में मिल जाते हैं तुमसे तो पतंगा अच्छा है, जो हँसते हुए जल जाता है वो प्यार में मिट तो जाता है, पर नाम अमर कर जाता है हम भी हैं, तुम भी हो, दोनों हैं … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – होंठों पे सच्चाई रहती है | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – honthon pe sachchai rehti hai

होंठों पे सच्चाई रहती है, जहँ दिल में सफ़ाई रहती है हम उस देश के वासी हैं, जिस देश में गंगा बहती है मेहमाँ जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है ज़्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े में गुज़ारा होता है बच्चों के लिए जो धरती माँ, सदियों से सभी कुछ सहती … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – ओ बसंती पवन पागल | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – o basanti pawan pagal

ओ बसंती पवन पागल, ना जा रे ना जा रोको कोई ओ बसंती पवन पागल बनके पत्थर हम पड़े थे, सूनी-सूनी राह में जी उठे हम जबसे तेरी बाँह आई बाँह में छीनकर नैनों से काजल, ना जा रे ना जा रोको कोई ओ बसंती पवन पागल… याद कर, तूने कहा था, प्यार से संसार … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – begani shaadi mein abdulla deewana

बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना है ना! दुल्हन बनूँगी मैं, डोली चढ़ूँगी मैं दूर कहीं बालम के दिल रहूँगी मैं तुम तो पराए हो, यूँ ही ललचाए हो जाने किस दुनिया से, जाने क्यूँ आए हो बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना ऐसे मनमौजी को मुश्किल है समझाना लहराती आऊँ … Continue reading →

१९६० – जिस देश में गंगा बहती है – आ अब लौट चलें | 1960 – Jis Desh Mein Ganga Behti Hai – aa ab laut chalein

आ अब लौट चलें नैन बिछाए, बाँहें पसारे, तुझको पुकारे देश तेरा आ जा रे, आ जा रे सहज है सीधी राह पे चलना, देखके उलझन बचके निकलना कोई ये चाहे माने न माने, बहुत है मुश्किल गिरके सँभलना आ अब लौट चलें… आँख हमारी मंज़िल पर है, दिल में ख़ुशी की मस्त लहर है … Continue reading →

१९६० – एक फूल चार काँटे – मतवाली नार ठुमक-ठुमक | 1960 – Ek Phool Char Kaante – matwali naar thumak thumak chali jaye

मतवाली नार ठुमक-ठुमक चली जाए इन क़दमों पे किसका जिया ना झुक जाए मतवाली नार ठुमक-ठुमक चली जाए फूल बदन मुखड़ा यूँ दमके बादल में ज्यूँ बिजली चमके गीत सुनाके तू छम-छम के ललचाए, छुप जाए, हाय हाय मतवाली नार ठुमक-ठुमक … ये चंचल कजरारी आँखें ये चितचोर शिकारी आँखें गई दिल चीर कटारी आँखें … Continue reading →

१९६० – एक फूल चार काँटे – सोच रही थी कहूँ ना कहूँ | 1960 – Ek Phool Char Kaante – soch rahi thi kahoon na kahoon

सोच रही थी कहूँ ना कहूँ, पर आज कहूँगी मेरे सनम तूने ले तो लिया दिल याद रहे मेरा जीना है मुश्किल तेरे बिना, तेरे बिना क्या मैं कहूँ सजना, मुझको हुआ क्या है मुझमें बसे हो तुम, तुमसे छुपा क्या है तुम ही सुनो अब कहता है क्या दिल याद रहे मेरा जीना है … Continue reading →

१९६० – एक फूल चार काँटे – सँभल के करना जो भी करना | 1960 – Ek Phool Char Kaante – sambhal ke karna jo bhi karna

सँभलके करना, जो भी करना, नाज़ुक हाथोंवाले नाज़ुक हाथोंवाले लचक ना जाए नरम कलाई, पड़ ना जाएँ छाले पड़ ना जाएँ छाले सँभलके करना, जो भी करना हटाके पर्दे निकल पड़े हो, मुक़ाबला क्या तुम्हीं बड़े हो मगर ऐ जानाँ इधर तो देखो, हम भी हैं दिलवाले हम भी हैं दिलवाले सँभलके करना, जो भी … Continue reading →