Songs of Shailendra::
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1956

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१९५६ – नई दिल्ली – तुम संग प्रीत लगाई रसिया | 1956 – New Delhi – tum sang preet lagayi rasiya

तुम संग प्रीत लगाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं मर गई, बेदर्दी तेरे प्यार में गोरी-गोरी रात के गोरे-गोरे चाँद की तुझको क़सम राजा, लौटके आजा पहले मिलन की रंगभरी शाम को कैसे भुलाऊँ सैंया, तू ही बता जा मौसम ले अंगड़ाई रसिया मैंने जानके जान गँवाई रसिया ओ हाय मैं … Continue reading →

१९५६ – नई दिल्ली – ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से | 1956 – New Delhi – zindagi bahar hai mohabbat ki bahar se

ज़िंदगी बहार है मोहब्बत की बहार से दिल से दिल को प्यार है, फिर क्यूँ डरना संसार से।। मैं गुमसुम, तुम भी चुप थे पर आँखों ने सब कह डाला मेरे प्यार में पहनी वरमाला ज़िंदगी बहार है … मैं नाचूँ मेरा मन नाचे मेरे संग-संग सारा जग नाचे मची धूम, ख़ुशी की धुन बाजे … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – तू माने या न माने बलम अनजाने | 1956 – Kismat Ka Khel – tu mane ya na mane balam anjane

तू माने या न माने, बलम अनजाने बेदर्द तेरे लिए नाचे मेरी ज़िंदगी नाचे मेरी ज़िंदगी जब भी हो तेरा-मेरा सामना मुश्किल हो जाए दिल को थामना तू माने या न माने … मेरा तन-मन घेरे खड़े हो फिर क्यूँ नज़रें फेरे खड़े हो तू माने या न माने … ले चले कहाँ दिल को … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – अर्ज़ है आपसे | 1956 – Kismat Ka Khel – arz hai aap se

अर्ज़ है आपसे, आपसे, और आपसे भी भेद की बात है, अपनों से कही जाती है बालम आएगा, आएगा चिट्ठी आई, ऐतवार की शाम तलक आ जाएगा, आएगा चाहे ग़ैरों को इसका यक़ीं हो न हो मेरा दिल कह रहा था कि आएँगे वो पहली-पहली मुलाक़ात की वो क़सम भूलकर भी नहीं भूल पाएँगे वो … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – चलो ले चलूँ मैं तारों में | 1956 – Kismat Ka Khel – chalo le chaloon main taaron mein

चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में चाँद से उतरी प्यार की पुतली, मैं तुम्हारी गुलबदन बिखरे सपने, खोए नग़्मे, लाई तुम्हारी गुलबदन चलो ले चलूँ मैं तारों में रंग-रंगीले गुलज़ारों में ना ऐसे ग़म हैं, ना ये सितम हैं, नीलम के उस देश में सब के साथ प्यार की बात होती है … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले | 1956 – Kismat Ka Khel – na bure na bhale ham gareeb gham ke pale

ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले तुम क्या जानो हस्ती हमारी, राजा, तुम क्या जानो हस्ती हमारी लाडली ज़िंदगी अपने आँसुओं में ढली तुम क्या जानो ना बुरे ना भले, हम ग़रीब ग़म के पले तुम क्या जानो हस्ती हमारी, राजा, तुम क्या जानो हस्ती हमारी हमारी भी गली में मुस्कुराए चाँदनी … Continue reading →

१९५६ – क़िस्मत का खेल – क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली | 1956 – Kismat Ka Khel – qismat ka khel hai janab-e-aali

क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली आपके पास हैं मोती-ख़ज़ाने और अपनी जेब ख़ाली, जेब ख़ाली, जेब ख़ाली निकले बाज़ार से वो मुस्कुराते, बढ़के हर चीज़ पे बोली लगाते हमने गर्दन झुका ली, हाँ झुका ली, लो झुका ली क़िस्मत का खेल है जनाब-ए-आली हमको भी ढूँढ़ती क़िस्मत हमारे घर पे आई लेकिन हम सोए थे … Continue reading →

१९५६ – जागते रहो – जागो मोहन प्यारे | 1956 – Jagte Raho – jago mohan pyare

जागो जागो जागो जग उजियारा छाए, मन का अँधेरा जाए किरनों की रानी गाए, जागो हे मेरे मनमोहन प्यारे जाग रे जाग रे जाग, कलियाँ जागीं नगर-नगर सब गलियाँ जागीं जाग रे जाग रे जाग रे, जाग रे जाग रे जाग जाग जागो मोहन प्यारे, जागो नवयुग चूमे नैन तिहारे जागो, जागो, जागो मोहन प्यारे … Continue reading →

१९५६ – जागते रहो – ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार | 1956 – Jagte Raho – thandi thandi sawan ki phuahr

ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार, पिया आज खिड़की खुली मत छोड़ो आवे झोंके से पगली बयार, पिया आज बाती जली मत छोड़ो ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार दिये की ज्योति अँखियों में लागे, पलकों पे निंदिया सवार पिया आज बाती जली मत छोड़ो ठण्डी-ठण्डी सावन की फुहार पपीहे ने मन की अग्नि बुझा ली, प्यासा रहा मेरा … Continue reading →

१९५६ – हलाकू – दिल का ना करना ऐतबार कोई | 1956 – Halaku – dil ka na karna aitbar koi

दिल का ना करना ऐतबार कोई भूले-से भी ना करना प्यार कोई लाख मनाया दिल ना माना जानके धोखे में आया दीवाना किसका हुआ है दिल-ए-ज़ार कोई दिल का ना करना … क्यूँ कहते हो प्यार किया था कह दो किसीसे दर्द लिया था बदले में ले गया क़रार कोई दिल का ना करना … … Continue reading →