Songs of Shailendra::
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१९५५ – मुनीमजी – घायल हिरनिया मैं बन-बन डोलूँ | 1955 – Munimji – ghayal hiraniya main ban ban doloon

घायल हिरनिया मैं बन-बन डोलूँ किसका लगा बाण, मुख-से न बोलूँ घायल हिरनिया मुड़के जो देखूँ तो बचपन बुलाए पलकों में लेकिन कोई मुस्कुराए जी को दुखाऊँ कि पी संग हो लूँ घायल हिरनिया मैं बन-बन डोलूँ जबसे ये नैना बलम संग लागे दुख-सुख मेरे मन में एक संग जागे पल में हँसूँ, पल में … Continue reading

१९५५ – बसंत बहार – केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले | 1955 – Basant Bahar – ketki gulab juhi champak ban phuule

केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले रितु बसंत, अपनो कंत गोरी गरवा लगाए झुलना में बैठ आज पी के संग झूले केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले गल-गल कुंज-कुंज, गुन-गुन भँवरों की गुंज राग-रंग अंग-अंग, छेड़त रसिया अनंग कोयल की पंचम सुन दुनिया दुख भूले केतकी, गुलाब, जूही, चम्पक बन फूले मधुर-मधुर थोरी-थोरी, मीठी बतियों … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – शाम गई रात आई कि बलम आ जा | 1955 – Shree 420 – sham gayi raat aayi ki balam aa ja

शाम गई रात आई, कि बलम आजा तारों की बरात आई, कि बलम आजा ओ बलम आजा, अब तो सनम आजा शाम गई रात आई, कि बलम आजा रात और दिन के मिलन की घड़ी में, ठण्डी-ठण्डी सावन की झड़ी में दो दिलों ने जो बाँधे थे बँधन, उनमें खोई खड़ी मैं, खड़ी मैं याद … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – दिल का हाल सुने दिलवाला | 1955 – Shree 420 – dil ka haal sune dilwala

दिल का हाल सुने दिलवाला सीधी-सी बात, न मिर्च-मसाला कहके रहेगा कहनेवाला दिल का हाल सुने दिलवाला छोटे-से घर में ग़रीब का बेटा मैं भी हूँ माँ के नसीब का बेटा रंज-ओ-ग़म बचपन के साथी आँधियों में जली जीवनबाती धूप ने है बड़े प्यार से पाला दिल का हाल सुने दिलवाला … हाय करूँ क्या … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – मेरा जूता है जापानी १ | 1955 – Shree 420 – mera joota hai japani

मेरा जूता है जापानी, ये पतलून इंग्लिस्तानी सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी मेरा जूता है जापानी निकल पड़े हैं खुल्ली सड़क पर, अपना सीना ताने मंज़िल कहाँ, कहाँ रुकना है, उपरवाला जाने बढ़ते जाएँ हम सैलानी, जैसे एक दरिया तूफ़ानी सर पे लाल टोपी रूसी, फिर भी दिल है हिंदुस्तानी … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – प्यार हुआ इक़रार हुआ है | 1955 – Shree 420 – pyar hua iqrar hua hai

प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहता है दिल, रस्ता मुश्किल, मालूम नहीं है कहाँ मंज़िल प्यार हुआ इक़रार हुआ है, प्यार से फिर क्यूँ डरता है दिल कहो कि अपनी प्रीत का गीत न बदलेगा कभी तुम भी कहो इस राह का मीत न बदलेगा कभी प्यार जो … Continue reading

१९५५ – श्री ४२० – रमैया वस्तावैया | 1955 – Shree 420 – ramaiyya vastavaiyya

रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया मैंने दिल तुझको दिया, मैंने दिल तुझको दिया ओ रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया नैनों में थी प्यार की रौशनी तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी तू और था, तेरा दिल और था तेरे मन में ये मीठी कटारी न थी मैं जो दुख पाऊँ तो क्या, आज पछताऊँ तो क्या … Continue reading

१९५५ – सीमा – कहाँ जा रहा तू ऐ जानेवाले | 1955 – Seema – kahan ja raha hai tu ae janewale

कहाँ जा रहा है तू, ऐ जानेवाले अँधेरा है मन का, दिया तो जला ले कहाँ जा रहा है तू, ऐ जानेवाले कहाँ जा रहा है ये जीवन-सफ़र एक अँधा सफ़र है बहकना है मुमकिन, भटकने का डर है सँभलता नहीं दिल किसीके सँभाले कहाँ जा रहा है तू, ऐ जानेवाले कहाँ जा रहा है … Continue reading

१९५५ – सीमा – मनमोहना बड़े झूठे | 1955 – Seema – manmohana bade jhoothe

मनमोहना बड़े झूठे हारके हार नहीं मानें मनमोहना बने थे खिलाड़ी पिया, निकले अनाड़ी मोसे बेईमानी करी, मुझसे ही रूठे मनमोहना बड़े झूठे तुम्हरी ये बांसी कान्हा, बनी गलफाँसी तान सुनाके मेरा तन-मन लूटे मनमोहना बड़े झूठे manamohanaa ba.De jhuuThe haarake haar nahii.n maane.n manamohanaa bane the khilaa.Dii piyaa, nikale anaa.Dii mose be_iimaanii karii, mujhase … Continue reading

१९५५ – मुनीमजी – नैन खोए-खोए तेरे दिल में भी कुछ होए रे | 1955 – Munimji – nain khoye khoye tere dil mein bhi kuchh hoye re

नैन खोए-खोए तेरे दिल में भी कुछ होए रे प्यार ये नहीं तो और क्या है होंठों पे इनकार, तेरी आँखों में इक़रार रे प्यार ये नहीं तो और क्या है दिल ही दिल में तेरा बलखाना, मन में हाँ-हाँ मगर मुँह पे ना-ना बड़ी-बड़ी आँखों से लेके निशाना, घड़ी-घड़ी तीर चलाके तेरा शरमाना प्यार … Continue reading