Songs of Shailendra::
archives

1950s

This tag is associated with 238 posts

१९५८ – डिटेक्टिव – राही चल सँभलके | 1958 – Detective – rahi chal sambhal ke

राही चल सँभल-सँभलके है बड़ा कठिन ये रास्ता बड़ा कठिन है रस्ता ये प्यार का राही चल सँभल-सँभलके है बड़ा कठिन ये रास्ता ये गली लागे भली, दिल तेरा चुराए रे आगे जाकर किसीकी समझ में ना आए रे खो ना जाना, तू कहीं खो ना जाना राही चल सँभल-सँभलके … जो नज़र तुझको उधर … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – छोड़िये ग़ुस्सा हुज़ूर | 1964 – Detective – chhodiye gussa huzoor

छोड़िए ग़ुस्सा हुज़ूर, ऐसी नाराज़ी भी क्या हमने तो जो कुछ किया, दिल के कहने पर किया आपकी मर्ज़ी है, अब जो चाहे दीजिए सज़ा छोड़िए ग़ुस्सा हुज़ूर, ऐसी नाराज़ी भी क्या सीने के पार कर दो, तिरछी नज़र का तीर हम चुप हैं लो पहना भी दो ज़ुल्फ़ों की ये ज़ंजीर यूँ भी घायल … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – आ जा कर ले मुक़ाबला | 1958 – Detective – aa ja kar le muqabla

आजा कर ले मुक़ाबला, ये बाज़ी प्यार की हो जाए आज फ़ैसला, ये बाज़ी प्यार की कहती हूँ मान जा, ऐ नादाँ मान जा उल्फ़त के खेल में ख़तरा है जान का, हो हो जा जा जा जा जा जा जा आजा कर ले मुक़ाबला … चाल मेरी मस्तानी, हर क़दम मेरा तूफ़ानी यहाँ भी … Continue reading

१९६० – दिल अपना और प्रीत पराई – मेरा दिल अब तेरा ओ साजना | 1960 – Dil Apna Aur Preet Parai – mera dil ab tera o saajna

मेरा दिल अब तेरा, ओ साजना कैसा जादू फेरा, ओ साजना मेरा दिल अब तेरा, ओ साजना नैन हमारे तुम संग लागे, तुम संग प्रीत हमारी मन भाए तुम जानो न जानो, जाने है दुनिया सारी कोई और न मेरा, ओ साजना मेरा दिल अब तेरा … मोरनी बनके राह तकूँ मैं, तुम बादल बन … Continue reading

१९६० – दिल अपना और प्रीत पराई – अंदाज़ मेरा मस्ताना | 1960 – Dil Apna Aur Preet Parai – andaz mera mastana

अंदाज़ मेरा मस्ताना, माँगे दिल का नज़राना ज़रा सोच के आँख मिलाना, हो जाए न तू दीवाना कि हम भी जवाँ हैं, समाँ भी जवाँ है न फिर हमसे कहना, मेरा दिल कहाँ है, मेरा दिल कहाँ है प्यार की किताब हूँ मैं, सच हूँ फिर भी ख़्वाब हूँ मैं देखकर सुरूर आए, वो अजब … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – छम छम छम छम गीत सुनाए | 1959 – Deep Jalta Rahe – chham chham chham chham geet sunaye

छम छम छम छम गीत सुनाए मेरी पायल गाए दिन आए मिलन के, बालमा खींच बुलाए बाहर कोई, आँगन में मेरा जी ना लगे हो जाऊँगी आज मैं उनकी, जिन संग मेरे नैन लगे जिया लहराए, मेरे बस में न आए दिन आए मिलन के, बालमा छम छम छम छम गीत सुनाए ऊदे रे ऊदे … Continue reading

१९५९ – दीप जलता रहे – देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान | 1959 – Deep Jalta Rahe – dekho ji ras le gayo bhanwra beiman

देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान बेचारी कली क्या करे छोटी-सी जान देखो जी रस ले गयो भँवरा बेईमान नई-नवेली, दिन थे बहार के बाग़ में थी वो अकेली, कि हाय राम, बाग़ में थी वो अकेली बाली उमर में कोई क्या जाने क्या है प्रीत पहेली, कि हाय राम, क्या है प्रीत पहेली … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – दो चमकती आँखों में | 1958 – Detective – do chamakti ankhon mein

दो चमकती आँखों में कल ख़्वाब सुनहरा था जितना हाय, ज़िंदगी तेरी राहों में आज अँधेरा है उतना हमने सोचा था जीवन में फूल चाँद और तारे हैं क्या ख़बर थी साथ में इनके काँटे और अंगारे हैं हमपे क़िस्मत हँस रही है, कल हँसे थे हम जितना दो चमकती आँखों में … इतने आँसू … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – मुझको तुम जो मिले ये जहाँ मिल गया | 1958 – Detective – mujhko tum jo mile ye jahan mil gaya

मुझको तुम जो मिले, ये जहाँ मिल गया तुम जो मेरे दिल में हँसे, दिल का कमल देखो खिल गया मुझको तुम जो मिले, ये जहाँ मिल गया ये भीगती हुई फ़िज़ा, बरस रही है चाँदनी तारों ने मिलके छेड़ दी, मधुर मिलन की रागिनी लेके क़रार आया है प्यार, क्या है अगर मेरा दिल … Continue reading

१९५८ – डिटेक्टिव – आँखों पे भरोसा मत कर | 1958 – Detective – ankhon pe bharosa mat kar

आँखों पे भरोसा मत कर, दुनिया जादू का खेल है हर चीज़ यहाँ एक धोखा, हर बात यहाँ बेमेल है ओ मतवाले, हँस ले गा ले, ले जीने का मज़ा इस दुनिया की भीड़ में तू, मेरी तरह नन्हा बन जा आँखों पे भरोसा मत कर, दुनिया जादू का खेल है हर चीज़ यहाँ एक … Continue reading