Songs of Shailendra::
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१९५१ – आवारा – नैय्या तेरी मँझधार | 1951 – Awara – naiyya teri majhdhaar

नैय्या तेरी मँझधार, होशियार, होशियार सूझे आर ना पार, होशियार, होशियार नैय्या तेरी मँझधार, होशियार, होशियार डर कैसा रे खुला हुआ आसमान सँभलके माँझी, सँभल कि तेरी नाव में है तूफ़ान गहरी चंचल धार, होशियार, होशियार नैय्या तेरी मँझधार, होशियार, होशियार काठ का टुकड़ा बह जाता है, लोहा डूबके रह जाता है ग्यानी सोच विचार, … Continue reading

१९५१ – आवारा – तेरे बिना आग ये चाँदनी | 1951 – Awara – tere bina aag ye chandani

तेरे बिना आग ये चाँदनी, तू आजा तेरे बिना बेसुरी बाँसरी, ये मेरी ज़िंदगी, दर्द की रागिनी तू आजा, तू आजा ये नहीं है, ये नहीं है ज़िंदगी, ज़िंदगी ये नहीं ज़िंदगी ज़िंदगी की ये चिता में ज़िंदा जल रहा हूँ, हाय साँस के ये आग के ये तीर चीरते हैं आरपार, आरपार मुझको ये … Continue reading

१९६३ – बेगाना – तोसे नज़र लड़ी सजना रे | 1963 – Begana – tose nazar ladi sajana re

तोसे नज़र लड़ी, सजना रे मेरे मन सुई गड़ी, सजना रे दिल की कसक बढ़ी, सजना रे प्यार की आग लगानेवाले, दिल का चैन चुरानेवाले अब मत आँख चुरा तू हमसे, मत तड़पा तड़पानेवाले बैंया थाम अपना रे तोसे नज़र लड़ी … याद आएँ जब तेरी बातें, आँखों में कटती हैं रातें अंदर जलता है … Continue reading

१९६३ – बेगाना – बुलाती है बहार चले हम दोनों | 1963 – Begana – bulaati hai bahar chale hum dono

बुलाती है बहार, चले हम दोनों, ओहो ओहो कोयल बोले कुहू कुहू कुहू, पपीहा कहे पीहू पीहू पीहू बुलाती है बहार अंबुवा की डाली-डाली न जाने क्यूँ झुकती जाए चंचल हवा का झोंका संदेसा जाने किसका लाए भँवरों की टोली घूमे, कलियों के मुखड़े चूमे बुलाती है बहार … महकी-सी जाए जब से बहक गई … Continue reading

१९६३ – बेगाना – आए गयो मोरे मन भाए गयो | 1963 – Begana – aaye gayo more man bhaye gayo

आए गयो, मोरे मन भाए गयो दिल में समाए गयो राम, बलम मोरा जिया उलझाए गयो रे आए गयो, मोरे मन भाए गयो … रातों की नींद गई, दिन का चैन गया कहीं भी जी न लगे, लगा एक रोग नया चाँदनी रात जले मोरी चँदा के बिना आके मिल जा रे सजन, और तारे … Continue reading

१९६३ – बेगाना – दाँतों का ज़माना, प्यारे दाँत बचाना | 1963 – Begana – daanton ka zamana, pyare daant bachaana

दाँतों का ज़माना, प्यारे दाँत बचाना कोई तोड़ दे या टूटें तो, पास हमारे आना दाँतों का ज़माना होश के तोते उड़ गए होते दुखता जो होता प्यारे तेरा कोई जबड़ा तकिया भिगोते, भूखे ही सोते खीच के मारे होता घरवाली से झगड़ा बैठे न रहते, रह-रहके कहते जल्दी बुलाओ, जल्दी बुलाओ खन्ना कहाँ है? … Continue reading

१९७१ – दूर का राही – एक दिन और गया | 1971 – Door Ka Raahi – ek din aur gaya

एक दिन और गया, हाय रोके न रुका छाया अँधियारा आज भी नाव न आई, आया ना खेवनहारा एक दिन और गया काली नागिन-सी घिरी रैना कजरारी सहमी-सहमी-सी है ये नगरी हमारी देके आवाज़ थका मन दुखियारा आज भी नाव न आई, आया ना खेवनहारा एक दिन और गया … फिर वही रात कठिन, छुप … Continue reading